Friday, January 26, 2024

ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर वाले लोगों की हो सकती है जल्दी मौत, अध्ययन में सामने आया चौकाने वाला आंकड़ा

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स्वीडन में कारोलिंस्का इंस्टिट्यूट के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए एक हालिया अध्ययन में लाइफ एक्सपेक्टेंसी ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर (ओसीडी) के चिंताजनक प्रभाव के बारे में बताया गया है. अध्ययन से पता चला कि ओसीडी वाले व्यक्तियों में समय से पहले मृत्यु होने की संभावना 82 प्रतिशत ज्यादा है, जिसमें प्राकृतिक और अप्राकृतिक दोनों कारण शामिल हैं. जिसमें प्राकृतिक और अप्राकृतिक दोनों कारण शामिल हैं. हालांकि पहले किए गए शोध में ओसीडी वाले व्यक्तियों में बढ़ी हुई मृत्यु दर की पहचान की गई थी, लेकिन इसमें योगदान देने वाले स्पेसिफिक फेक्टर्स की पूरी तरह से जांच नहीं की गई थी. जिससे पता चलता है कि ओसीडी वाले व्यक्तियों में समय से पहले मौत के कारणों का ठीक से पता लगाया गया है.

ओसीडी, जो लगभग 2 प्रतिशत आबादी को प्रभावित करती है. यह डिसऑर्डर डेली लाइफ को प्रभावित करता है, रिश्तों, सामाजिक जुड़ाव और डेली कामकाज को प्रभावित करता है.

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चार दशकों (1973-2020) तक चले शोध में ओसीडी से पीड़ित 61,378 व्यक्तियों के एक ग्रुप की तुलना डिसऑर्डर के बिना 613,780 के कंट्रोल ग्रुप से की गई.

ओसीडी वाले व्यक्ति 69 साल की औसत आयु में समय से पहले मृत्यु का शिकार हो जाते हैं, जबकि डिसऑर्डर के बिना उनके काउंटरपार्ट 78 साल की औसत आयु तक जीवित रहते हैं. ये निष्कर्ष मेंटल वेलबीइंग पर इसके प्रभाव से परे, ओसीडी से जुड़े प्रभावों की आगे की जांच की अरजेंसी पर जोर देते हैं.

अध्ययन के निष्कर्ष में, शोधकर्ताओं ने लिखा कि इस जनसंख्या-बेस्ड मिलान वाले ग्रुप और भाई-बहन के ग्रुप स्टडी में नॉन-कम्युनिकेबल डिजीज और सुसाइड और दुर्घटनाओं सहित मृत्यु के बाहरी कारण, ओसीडी वाले लोगों में मृत्यु के जोखिम में प्रमुख थे.

ओसीडी वाले लोगों में घातक परिणामों को कम करने के लिए बेहतर निगरानी, ​​रोकथाम और तुरंत इलाज पर ध्यान दिया जाना चाहिए.



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Delhi top cop's son murdered in Haryana, search on for body; 1 arrested

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Thursday, January 25, 2024

‘Derek O’Brien a foreigner, knows all’: Adhir Ranjan, blamed for alliance fiasco

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Wednesday, January 24, 2024

For ‘miracle cure’, parents submerge son with cancer in Ganges repeatedly; child dies

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Sanjay Raut's brother summoned by Enforcement Directorate in 'khichdi' scam

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Tuesday, January 23, 2024

2024 की जंग में पिछड़ों का मसीहा कौन? PM मोदी ने 'कर्पूरी कार्ड' से INDIA अलायंस को कर दिया बेचैन

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बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर ( Karpoori Thakur) को इस साल 'भारत रत्न' (मरणोपरांत) से सम्मानित किया जा रहा है. कर्पूरी ठाकुर बिहार में 2 बार मुख्यमंत्री और एक बार उप-मुख्यमंत्री रहे. उन्हें दबे-कुचलों और पिछड़े वर्गों के हितों की वकालत करने के लिए जाना जाता है. लोकसभा चुनाव 2024 (Lok Sabha Elections 2024) से पहले 'भारत रत्न' (Bharat Ratna)का ऐलान करके भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने विपक्षी दलों के INDIA अलायंस को बेचैन कर दिया है. इसे मोदी सरकार का 'मास्टर स्ट्रोक' माना जा रहा है. मरणोपरांत कर्पूरी ठाकुर को 'भारत रत्न' देने का ऐलान करके मोदी सरकार ने बिहार के सीएम नीतीश कुमार के EBC (अति पिछड़ा वर्ग) कार्ड पर भी बड़ा दांव खेला है. ऐसे में 2024 की जंग से पहले OBC वर्ग के 'हमदर्द' को लेकर भी बहस छिड़ गई है.

बिहार के सीएम नीतीश कुमार कई मौकों पर कर्पूरी ठाकुर के लिए 'भारत रत्न' की मांग कर चुके हैं. आइए समझते हैं कि कर्पूरी ठाकुर के लिए 'भारत रत्न' के ऐलान को INDIA अलायंस के खिलाफ बीजेपी का मास्टरस्ट्रोक कैसे माना जा रहा है:-

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चुनाव से पहले ही विपक्ष को पटखनी की कोशिश
दरअसल, बिहार के 'जननायक' कर्पूरी ठाकुर की बुधवार (24 जनवरी) को 100वीं जयंती है. इससे ठीक पहले ही मोदी सरकार ने 'भारत रत्न' के लिए कर्पूरी ठाकुर के नाम का ऐलान किया. दिक्कत ये है कि बीजेपी को घेरने के लिए INDIA अलायंस का कोई भी दल 'भारत रत्न' के ऐलान का विरोध नहीं कर सकेगा. नीतीश कुमार और लालू प्रसाद यादव तो ऐसा कतई नहीं करेंगे. अगर उन्होंने मोदी सरकार के इस कदम का विरोध किया, तो चुनाव से पहले OBC वोटर्स की नाराजगी झेलनी पड़ सकती है. 

गौर करने वाली बात ये है कि खुद नीतीश कुमार हाल में कई मौकों पर कर्पूरी ठाकुर के लिए 'भारत रत्न' की मांग कर चुके हैं. बेशक नीतीश ने EBC और OBC वोटर्स को साधने के लिए ये मांग की हो, लेकिन पीएम मोदी के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार ने उनकी इस मांग को मानकर सारा क्रेडिट ले लिया. 

कर्पूरी ठाकुर को 'भारत रत्न' से सम्मानित करने का मोदी सरकार फैसला वैसे हर तरह से बीजेपी के लिए हितकारी ही साबित होता दिख रहा है:-

बिहार के सबसे बड़ा OBC चेहरा
कर्पूरी ठाकुर को बिहार का जननायक कहा जाता है. वो बिहार के सबसे बड़े OBC चेहरे भी थे. उन्होंने हर वर्ग के लिए काम किया. कर्पूरी ठाकुर ने कई ऐसे फैसले लिए जो न सिर्फ बिहार में बल्कि देश में मिसाल बने. उन्होंने देश में सबसे पहले पिछड़ा वर्ग को आरक्षण दिया. देश में सबसे पहले महिलाओं और आर्थिक रूप से कमजोर सवर्णों को आरक्षण देने का क्रेडिट भी कर्पूरी ठाकुर को जाता है. बता दें कि बाद में ये फैसला खत्म कर दिया गया था.

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कर्पूरी ठाकुर की विरासत में हिस्सेदारी की कोशिश
बिहार के दिग्गज नेता लालू प्रसाद यादव और नीतीश कुमार कर्पूरी ठाकुर की ही पाठशाला के छात्र रहे हैं. दोनों ने कर्पूरी ठाकुर से ही राजनीति के गुर सीखे थे. जनता दल यूनाइटेड और राष्ट्रीय जनता दल उनपर अपना एकाधिकार मानती आई है.
ऐसे में कर्पूरी ठाकुर के लिए देश के सबसे बड़े सम्मान का ऐलान करके बीजेपी ने चुनाव से पहले OBC वर्ग को टारगेट तो किया ही है, इसके साथ ही कर्पूरी ठाकुर की विरासत में हिस्सेदारी की कोशिश भी की है. इसके लिए बीजेपी पहली बार कर्पूरी ठाकुर के नाम पर समारोह आयोजित कर रही है.

बिहार के वोट बैंक को किया टारगेट
माना जाता है कि बिहार की राजनीति में कर्पूरी ठाकुर की विरासत वोट बैंक के रूप में 36 प्रतिशत से अधिक है. ये सभी अति पिछड़ी जातियों से हैं. इनके बल पर ही लालू प्रसाद 15 साल शासन में रहे. इसी आबादी के दम पर नीतीश कुमार बिहार की राजनीति में बने हुए हैं. अति पिछड़ी आबादी को नीतीश कुमार की सबसे बड़ी राजनीतिक पूंजी मानी जाती है, जिसे बीजेपी ने टारगेट किया है.

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नीतीश कुमार का गेम किया 'हाइजैक'
दरअसल, बिहार में 2023 के जाति आधारित गणना के बाद नीतीश कुमार ने अति पिछड़ी जातियों का आरक्षण कोटा बढ़ा दिया. ऐसा करके नीतीश कुमार ने खुद का 'अति पिछड़ा वर्ग का मसीहा' बताने की कोशिश की. लेकिन बीजेपी के इस ऐलान के बाद नीतीश कुमार की बेचैनी जरूर बढ़ गई होगी.

बिहार में लोकसभा की 40 सीटें हैं. 2 अक्टूबर 2023 को बिहार सरकार ने जातीय गणना की रिपोर्ट जारी की थी. इसके मुताबिक राज्य में 27.12% पिछड़ा वर्ग और 36% आबादी अत्यंत पिछड़ा वर्ग की है. दोनों को जोड़ दें तो इनकी संख्या 63% हो गई है. दूसरी तरफ मौजूदा समय में बिहार में अत्यंत पिछड़ा वर्ग (EBC) को 18% और पिछड़ा (OBC) को 12% आरक्षण दिया जा रहा है. यानी EBC और OBC को मिलाकर 30% के रिजर्वेशन का प्रावधान है.

जनता से सीधा संवाद
मोदी सरकार का यह कदम बिहार की जनता से एक तरह से सीधा संवाद है. मोदी सरकार ने एक बार फिर संदेश देने की कोशिश की है कि उसकी राजनीति हर वर्ग के लिए है. किसी भी नेक शख्स का काम भुलाया नहीं जाएगा. समय आने पर सबको एक समान मौका मिलेगा और सम्मान भी.



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'At whose behest?': Supreme Court grapples with listing row in Adani Power case

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Monday, January 22, 2024

Zomato suspends delivery of non-veg items in North India, says this is due to govt order

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Sunday, January 21, 2024

राहुल गांधी 22 जनवरी को वैष्णव संत शंकरदेव के जन्मस्थान पर जायेंगे : कांग्रेस

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कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी को अयोध्या में रामलला विग्रह के प्राण-प्रतिष्ठा समारोह के दौरान वैष्णव संत श्रीमंत शंकरदेव की जन्मस्थली बोर्दोवा थान का दौरा करने से बचने की असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा के परामर्श पर कांग्रेस ने रविवार को जोर देकर कहा कि गांधी की यात्रा निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार जारी रहेगी. अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) के महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि गांधी अपनी पूर्व निर्धारित योजना के अनुसार असम के नागांव जिले में बोर्दोवा थान का दौरा करेंगे. उन्होंने आग्रह किया कि 'इस पर कोई राजनीति नहीं की जानी चाहिए'.

गांधी मणिपुर से मुंबई तक 'भारत जोड़ो न्याय यात्रा' का नेतृत्व कर रहे हैं और यह यात्रा 18 जनवरी को असम पहुंची थी और यह 25 जनवरी तक प्रदेश में रहेगी. कार्यक्रम के अनुसार, यात्रा रविवार को नागांव पहुंचेगी और रात में वहीं रुकेगी तथा अगली सुबह वहां से आगे के लिये प्रस्थान करेगी.

गांधी के साथ यात्रा में शामिल रमेश ने संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘यात्रा का मार्ग 3-4 सप्ताह पहले तय किया गया था और कार्यक्रम के अनुसार, हम 22 जनवरी को नागांव में होंगे.''

उन्होंने कहा, 'हमें लगता है कि यह जरूरी है कि हम बोर्दोवा थान का दौरा करें, क्योंकि हम नागांव से गुजर रहे हैं. यह महान समाज सुधारक श्रीमंत शंकरदेव का जन्मस्थान है, जिनका जीवन आज भी करोड़ों लोगों को प्रेरित करता है.' कांग्रेस नेता ने कहा, 'इस पर कोई विवाद नहीं होना चाहिए था. इस पर कोई राजनीति नहीं की जानी चाहिए.'

उन्होंने बताया कि गांधी सोमवार सुबह थान का दौरा करेंगे और उसके बाद दिन में आगे की यात्रा शुरू करेंगे. उन्होंने कहा कि इस दौरान वह पड़ोसी मेघालय में प्रवेश करने से पहले मोरीगांव जिले से गुजरेंगे.

यह यात्रा पड़ोसी राज्य मेघालय की एक छोटी यात्रा के बाद असम लौट आएगी. शर्मा ने रविवार को एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि गांधी को 22 जनवरी को बोर्दोवा थान जाने से बचना चाहिए, क्योंकि भगवान राम और राज्य में एक प्रतीक के रूप में प्रतिष्ठित मध्ययुगीन वैष्णव संत के बीच कोई प्रतिस्पर्धा नहीं हो सकती है. उन्होंने यह भी कहा कि सोमवार को यात्रा के दौरान अल्पसंख्यक बहुल इलाकों के संवेदनशील मार्गों पर कमांडो तैनात किये जायेंगे.

उन्होंने कहा, 'हम राहुल गांधी से अनुरोध करेंगे कि वह सोमवार को राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा समारोह के दौरान बोर्दोवा थान न जाएं, क्योंकि इससे असम की गलत छवि बनेगी.' रमेश ने शनिवार को एक संवाददाता सम्मेलन में कहा था कि गांधी 22 जनवरी को वैष्णव संत शंकरदेव के जन्मस्थान जाएंगे.

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Moderate fog, clear sky: Check Ayodhya's weather forecast for tomorrow

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Saturday, January 20, 2024

गठबंधन के लिए कांग्रेस से बातचीत जारी, जल्द फैसला होने की उम्मीद : अखिलेश यादव

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लखनऊ: आगामी लोकसभा चुनाव के लिए राष्ट्रीय लोक दल (रालोद) के साथ सीट बंटवारे पर सहमति बनने के एक दिन बाद समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने शनिवार को कहा कि गठबंधन के लिए कांग्रेस से बातचीत जारी है और उन्‍होंने उम्मीद जताई कि फैसला जल्द होगा.

यहां सपा मुख्यालय में पत्रकारों से बातचीत करते हुए अखिलेश यादव ने कहा, ‘‘हम कांग्रेस से (लोकसभा चुनाव में) गठबंधन के लिए बातचीत कर रहे हैं, दिल्ली में कई बैठकें हो चुकी हैं. जल्द ही और बैठकें होंगी और रास्ता निकाला जाएगा.''

उन्होंने कहा, ‘‘विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया' को मजबूत होना चाहिए. सवाल सीट का नहीं बल्कि जीत का है, जीत के आधार पर हम सब मिलकर फैसला लेंगे.''

समाजवादी पार्टी (सपा) और राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) ने लोकसभा चुनाव के लिए शुक्रवार को गठबंधन की औपचारिक घोषणा की. इसके साथ ही रालोद ने कहा कि वह पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सात सीट पर चुनाव लड़ेगी. इस साल के अंत में होने वाले चुनाव के लिए सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव और रालोद प्रमुख जयंत चौधरी ने शुक्रवार को सोशल मीडिया पर गठबंधन की घोषणा की.

हालांकि, 2019 के लोकसभा चुनाव में सपा का कांग्रेस के साथ कोई औपचारिक गठबंधन नहीं था, लेकिन पार्टी ने सोनिया गांधी और उनके बेटे राहुल गांधी की क्रमशः रायबरेली और अमेठी सीट पर अपना कोई उम्मीदवार नहीं उतारा था. उप्र में लोकसभा की 80 सीट हैं.

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Friday, January 19, 2024

समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय लोक दल ने लोकसभा चुनाव के लिए गठबंधन की घोषणा की

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समाजवादी पार्टी (सपा) और राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) ने लोकसभा चुनाव के लिए गठबंधन की शुक्रवार को औपचारिक घोषणा की और सीट बंटवारे को अंतिम रूप दे दिया. सपा प्रमुख अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) और रालोद प्रमुख जयंत चौधरी (Jayant Chaudhary) ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स' (पूर्व में ट्विटर) के जरिये गठबंधन की घोषणा की. यादव ने ‘एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ''राष्ट्रीय लोक दल और सपा के गठबंधन की सभी को बधाई. जीत के लिए सभी एकजुट हो जाएं, जुट जाएं.''

‘एक्स' पर अखिलेश के ट्वीट को दोबारा पोस्ट करते हुए जयंत चौधरी ने 'एक्स' पर लिखा, ''राष्ट्रीय, संवैधानिक मूल्यों के रक्षा के लिए सदैव तत्पर, हमारे गठबंधन के सभी कार्यकर्ताओं से उम्मीद है, अपने क्षेत्र के विकास और ख़ुशहाली के लिए कदम मिलाकर आगे बढ़ें.''

जयंत चौधरी ने इसके साथ ही अपने पोस्ट के साथ तस्वीरें भी डाली जिसमें वह और अखिलेश यादव हाथ मिलाते हुए दिख रहे हैं.

रालोद प्रवक्ता अनिल दुबे ने ‘पीटीआई-भाषा' से बात करते हुए कहा कि दोनों नेताओं के बीच हुई बैठक में सीट बंटवारे को अंतिम रूप दे दिया गया है. उन्होंने कहा, 'रालोद पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सात सीटों पर चुनाव लड़ेगी.'

दुबे से जब यह पूछा गया कि रालोद किन सीटों पर चुनाव लड़ेगा तो उन्होंने इस संबंध में विस्तार से कुछ नहीं बताया.

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Rinku is like left-handed Dhoni: Ashwin lauds young batter's composed batting

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Thursday, January 18, 2024

Case filed against Tamil Youtuber for force feeding live rooster to bull

\ Case filed against Tamil Youtuber for force feeding live rooster to bull

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दृष्टिबाधितों के लिए कला का नया आयाम: 'हुनर अनलिमिटेड' में NFC तकनीक से सजी पेंटिंग्स

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PHD चैम्बर ऑफ कॉमर्स और इंडस्ट्री द्वारा आयोजित 'हुनर अनलिमिटेड' कार्यक्रम में दिव्यांग बच्चों द्वारा बनाई गई चित्रकलाओं ने नवाचार और सामाजिक समावेशीता का अनूठा मिश्रण प्रस्तुत किया. लेकिन ये कलाकृतियाँ सामान्य नहीं थीं क्योंकि इनमें नियर फील्ड कम्युनिकेशन (NFC) और क्विक रिस्पॉन्स (QR) कोड तकनीक का इस्तेमाल किया गया था, जिससे दृष्टिबाधित लोग भी कला का अनुभव कर सकते हैं.
 
18 जनवरी को PHD के मुख्यालय में आयोजित इस कार्यक्रम ने तकनीकी और सृजनात्मकता के संगम के माध्यम से एक नई पहल की. NFC और QR कोड्स जो चित्रों में लगे थे, उन्होंने दृष्टिबाधित आगंतुकों को अपने स्मार्टफोन से स्कैन करने और ऑडियो विवरणों के माध्यम से कला को अनुभव करने की संभावना प्रदान की.सेंट स्टीफेंस कॉलेज के ऑर्थोपेडिक डॉ. मैथ्यू वर्गीज, जिन्होंने इन चित्रों को कार्यक्रम में लाने में मुख्य भूमिका निभाई, ने इस तकनीक के क्षेत्र में क्रांतिकारी क्षमता को रेखांकित किया. उन्होंने एनडीटीवी से बात करते हुए कहा, "दुनिया भर के संग्रहालयों में दृष्टिबाधितों के लिए नैरेशन तकनीकें हैं. हमारी दृष्टि है कि भारत के हर संग्रहालय में ये NFC चिप्स लगाए जाएं."

 विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम में दिव्यांग व्यक्तियों के सशक्तिकरण के विभाग के सचिव राजेश अग्रवाल भी शामिल हुए, जिन्होंने एनडीटीवी  को अपनी प्रतिक्रिया में कहां, "PHD चैम्बर जैसी संगठनों द्वारा समाज के सबसे कमजोर वर्गों के बच्चों को उद्यमी कौशल और प्रशिक्षण से संपन्न करना देखकर अच्छा लगता है. आज का कार्यक्रम यह दिखाता है कि कैसे तकनीक अंतरों को पाट सकती है, जिससे अंधे भी कला के संवर्धन का आनंद ले सकते हैं."

चैम्बर के अध्यक्ष संजीव अग्रवाल ने 'आत्मनिर्भर भारत' की प्रधानमंत्री मोदी की दृष्टि के साथ संगठन की प्रतिबद्धता को प्रकट किया, विशेष रूप से अशक्षम बच्चों के कौशल विकास पर जोर देते हुए.  कार्यक्रम के अंत में, PHD फ़ैमिली वेलफेयर फाउंडेशन की अध्यक्षा अनुराधा गोयल ने डॉ. वर्गीज के प्रयासों और कला में NFC तकनीक की संभावनाओं की प्रशंसा की.  उन्होंने ऐसे नवाचारों के महत्व पर जोर दिया जो दृष्टिबाधितों को अनुभव के माध्यम से 'देखने' की अनुमति देते हैं. 

यह आयोजन सिर्फ तकनीकी प्रगति का ही प्रदर्शन नहीं था, बल्कि यह उन कुशल शिल्पकारों की प्रतिभा को भी उजागर करता था जिनके द्वारा बनाई गई वस्त्रों की बिक्री कार्यक्रम में की गई थी, ये वस्त्र PHD परिवार कल्याण फाउंडेशन की कौशल विकास इकाइयों में प्राप्त प्रशिक्षण का परिणाम थे.  चित्रों की सफलबिक्री ने युवा कलाकारों की प्रतिभा और कठिन परिश्रम की गवाही दी, और सभी की उस समर्पण की जिसने कला को समावेशी अनुभव बनाया. 

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Wednesday, January 17, 2024

PM मोदी को प्राण प्रतिष्ठा समारोह में शामिल होने से रोकने के लिए याचिका दायर

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प्रयागराज: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को 22 जनवरी, 2024 को अयोध्या स्थित राम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा समारोह में शामिल होने से रोकने के लिए इलाहाबाद उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका दायर की गई है. इसमें दोनों को समारोह में शामिल होने से रोकने के लिए निर्देश देने का अनुरोध किया गया है.

गाजियाबाद के भोला दास नाम के एक व्यक्ति द्वारा दायर इस याचिका में इस साल आम चुनाव होने तक और न्याय के हित में सभी शंकराचार्यों की सहमति मिलने तक प्रधानमंत्री और प्रदेश के मुख्यमंत्री को प्राण प्रतिष्ठा समारोह में शामिल होने से रोकने का अनुरोध किया गया है.

इस जनहित याचिका में, केंद्र सरकार, प्रधानमंत्री, उत्तर प्रदेश, राज्य के मुख्यमंत्री और चारों शंकराचार्यों को प्रतिवादी के तौर पर पक्षकार बनाया गया है. याचिका में कहा गया है कि सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी सरकार की शक्तियों का दुरुपयोग कर रही है और आगामी चुनाव में अपने राजनीतिक हित के लिए सनातन संस्कृति को नष्ट कर रही है.

याचिका में कहा गया है कि धर्म गुरु शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती और शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद भी प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम में प्रधानमंत्री के शामिल होने के खिलाफ हैं. इस जनहित याचिका का नोटिस राज्य सरकार के कार्यालय में दिया गया है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि इस पर कब सुनवाई होगी.

एक अन्य कदम के तहत ‘ऑल इंडिया लॉयर्स यूनियन', उत्तर प्रदेश ने उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव के उस परिपत्र के खिलाफ एक रिट याचिका दायर की है जिसमें 14 से 22 जनवरी के बीच प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में पूजा, कीर्तन और मानस पाठ एवं कलश यात्रा जैसे धार्मिक आयोजन करने का निर्देश दिया गया है.

यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष नरोत्तम शुक्ला द्वारा दायर इस याचिका में आरोप लगाया गया है कि इन धार्मिक आयोजनों के लिए राज्य सरकार के कोष से करीब 590 लाख रुपये जारी किए गए हैं. राज्य सरकार ऐसा नहीं कर सकती क्योंकि यह संवैधानिक जनादेश के खिलाफ है.

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IND v AFG: India prevail in double Super Over T20I to seal series 3-0

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Respect sovereignty of 'brotherly' Pakistan but...: Iran on Balochistan attack

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Tuesday, January 16, 2024

छत्तीसगढ़ में आम आदमी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष ने दिया पार्टी से इस्तीफा

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रायपुर: छत्तीसगढ़ में आम आदमी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष कोमल हुपेंडी ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है. हुपेंडी ने कहा कि उन्होंने शीर्ष नेतृत्व के रूखे व्यवहार से परेशान होकर इस्तीफा दिया है. हुपेंडी ने मंगलवार को ‘पीटीआई-भाषा' को बताया कि उन्होंने पार्टी की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है तथा उनके साथ राज्य के कुछ अन्य पदाधिकारियों ने भी पार्टी छोड़ दी है.

उन्होंने बताया, ''मैंने और मेरे साथ छह-सात अन्य पदाधिकारियों ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है.'' हुपेंडी ने कहा, ''मैं सरकारी नौकरी में था. मैं समाज के लिए कुछ करना चाहता था इसलिए मैं आम आदमी पार्टी में शामिल हो गया. यह पार्टी मुझे बेहतर लगी तथा दिल्ली में जो काम कर रहे थे, उससे मैं प्रभावित था.''

उन्होंने कहा, ''राज्य में पार्टी का संगठन कमजोर था लेकिन मैं इसमें आया और मैंने अच्छा काम किया जिससे संगठन बढ़ा. जब यहां 2023 में विधानसभा चुनाव हुए तब हम लोगों ने 90 सीट पर चुनाव लड़ने की घोषणा की थी. लेकिन पार्टी पूरी सीट पर नहीं लड़ी. हम कहते रह गए. मैं प्रदेश अध्यक्ष हूं तो कम से कम मुझे बता देते कि पार्टी सभी सीट पर क्यों चुनाव नहीं लड़ रही है. जब हम शीर्ष नेतृत्व को फोन करते थे तब वे फोन उठाते नहीं थे. चुनाव में प्रत्याशियों को टिकट दे दिए गए थे लेकिन कोई सहयोग नहीं मिल रहा था. इससे कार्यकर्ता और उम्मीदवार परेशान थे. यदि पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का ऐसा रुख रहेगा तब हम छत्तीसगढ़ को कैसे बदलेंगे. हम काम करना चाहते हैं लेकिन ऐसे में काम करना कठिन है, इसलिए मैंने इस्तीफा दे दिया.''

जब उनसे पूछा गया कि क्या वह अन्य राजनीतिक दल में शामिल होने पर विचार कर रहे हैं तब उन्होंने कहा, ''इस संबंध में मैंने अभी कोई विचार नहीं किया है. कुछ समय बाद मैं इस पर विचार करूंगा.''

राज्य में पिछले वर्ष विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी ने 54 सीट पर चुनाव लड़ा था तथा पार्टी के सभी उम्मीदवार भारी अंतर से चुनाव हार गए थे. इस विधानसभा चुनाव में 'आप' को 0.93 प्रतिशत वोट मिले. इससे पहले 2018 के चुनाव में 'आप' ने 85 सीट पर चुनाव लड़ा था और उसे 0.87 फीसदी मत प्राप्त हुए थे.राज्य में 2018 तथा 2023 के चुनावों में पार्टी के सभी उम्मीदवार जमानत नहीं बचा पाए.

आप की राज्य इकाई के प्रमुख रहे कोमल हुपेंडी ने 2023 के चुनाव में 15,255 वोट हासिल किये थे. भानुप्रतापपुर सीट से लगातार दूसरी बार हार का सामना करते हुए वह तीसरे स्थान पर रहे.

इस चुनाव में भाजपा ने 54 सीट जीतकर पांच साल बाद सत्ता में वापसी की है तथा विष्णु देव साय के नेतृत्व में सरकार का गठन किया है. राज्य में कांग्रेस को 35 सीट मिलीं तथा गोंडवाना गणतंत्र पार्टी ने एक सीट पर जीत हासिल की है.



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PM Modi likes to keep his options open: Historian Niall Ferguson on India-US ties

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ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर वाले लोगों की हो सकती है जल्दी मौत, अध्ययन में सामने आया चौकाने वाला आंकड़ा

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