Thursday, August 10, 2023

Exclusive : "मणिपुर के लिए कोई भी केंद्र को नहीं ठहरा रहा जिम्मेदार" - असम के CM हिमंता बिस्वा सरमा

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भारत 15 अगस्त 2023 को आजादी की 76वीं सालगिरह मनाने जा रहा है. इस खास मौके पर NDTV आपके लिए इंटरव्यू सीरीज AZADI@76 लेकर आया है. AZADI@76 सीरीज के तहत NDTV के एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर और एडिटर-इन-चीफ संजय पुगलिया ने असम के सीएम हिमंता बिस्वा सरमा के साथ एक्सक्लूसिव बातचीत की. इस दौरान सरमा ने बताया कि आखिर पूर्वोतर के राज्य मणिपुर हिंसा के लिए केंद्र को क्यों जिम्मेदार नहीं ठहराते. इंटरव्यू में सरमा ने पिछले 9 साल में उत्तर पूर्व में हुए विकास के बारे में विस्तार से बातें की.

राजनीति, प्रशासन या विकास की बात करें, तो इस सरकार में सीमा वाले राज्यों में बहुत ज्यादा ध्यान दिया गया है. पूर्वोत्तर से लेकर जम्मू-कश्मीर तक अच्छा काम हुआ है. ये बड़े लैंडमार्क हैं. ऐसे राज्यों में राजनीति कितनी बदली है? इस सवाल के जवाब में असम के सीएम हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा, "पूर्वोत्तर राज्यों में 2014 के बाद से लोगों के नजरिए में एक बड़ा बदलाव आया. 2014 के पहले तक इन राज्यों में विकास की गति बहुत धीमी थी. लेकिन 2014 के बाद कनेक्टिविटी में बहुत बड़ा बदलाव आया है. चीन की सीमा तक सड़क निर्माण का काम शुरू हुआ. रेलवे ट्रैक शुरू हुआ. अचानक से सभी मीटर गेज ब्रॉड गेज में परिवर्तित होने लगे. गुवाहाटी इंटरनेशनल एयरपोर्ट बन रहा है, जो भारत का पांचवां सबसे व्यस्ततम एयरपोर्ट होगा."

हिमंता बिस्वा सरमा ने आगे कहा, "पहले विकास की रफ्तार सुस्त थी. अब तेजी से काम हो रहा है. इंटर्नल कनेक्टिविटी बढ़ रही है. इससे पूर्वोत्तर के राज्यों में अच्छा मैसेज गया. लोगों ने समझा कि कोई तो है, जो उनकी केयर कर रहा है. उनकी जरूरतों और मुश्किलों को समझ रहा है. 2014 के बाद महसूस होने वाले बदलाव हुए. पहले पूर्वोत्तर (नॉर्थईस्ट) फोकस में नहीं था. अब इन राज्यों में ध्यान दिया जा रहा है."

सरमा ने मणिपुर के हालात का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा, "बेशक मणिपुर में अभी भी तनाव और अशांति है. लेकिन कोई भी वहां से केंद्र को दोषी नहीं ठहराता. कोई भी पीएम की आलोचना नहीं कर रहा है. कोई गृह मंत्री की आलोचना नहीं कर रहा है. कोई भी यह नहीं कह रहा कि मणिपुर में जो कुछ हुआ, उसके लिए केंद्र सरकार जिम्मेदार है." 

हिंसा के लिए मोदी सरकार जिम्मेदार नहीं
उन्होंने कहा, "पहले पूर्वोत्तर राज्यों में कुछ भी होता था, तो आरोप दिल्ली में बैठी केंद्र सरकार पर लगाया जाता था. लेकिन अब वहां के लोग जानते और समझते हैं कि ये हमारा संघर्ष है. इसमें केंद्र सरकार कुछ नहीं कर सकती. बेशक मणिपुर में अभी अशांति है, लेकिन कोई भी मोदी सरकार को इसके लिए जिम्मेदार नहीं ठहराता."

लोकसभा में मणिपुर पर क्या बोले पीएम मोदी?
बता दें कि लोकसभा में विपक्ष की ओर से लाए गए अविश्वास प्रस्ताव (No-Confidence Motion) पर गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने मणिपुर (Manipur Issue) पर बयान दिया. उन्होंने कहा, "मणिपुर में एक अदालत का फैसला आया. उसके पक्ष-विपक्ष में परिस्थिति बनी और हिंसा का  दौर शुरू हुआ. कई लोगों ने अपनों को खोया, महिलाओं के साथ अपराध हुआ. दोषियों को कड़ी सजा दिलाने के लिए केंद्र और राज्य सरकार काम कर रही है. देश भरोसा रखे, मणिपुर में शांति का सूरज जरूर उगेगा. मणिपुर के लोगों से भी कहना चाहता हूं कि देश आपके साथ है, हम आपके साथ हैं." पीएम के भाषण के बाद अविश्वास प्रस्ताव ध्वनिमत से खारिज हो गया.

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Wednesday, August 9, 2023

अमित शाह ने अविश्वास प्रस्ताव पर विपक्ष की हर 'गेंद' पर लगाया 'सिक्सर', अब PM मोदी का करना होगा सामना

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लोकसभा में विपक्ष की ओर से लाए गए अविश्वास प्रस्ताव (No-Confidence Motion) पर चर्चा का बुधवार को दूसरा दिन था. आज कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मणिपुर मुद्दे पर सरकार को जमकर घेरा, जिसका जवाब सरकार की ओर से पहले केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने दिया और फिर गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष के हर सवालों का जवाब दिया. मणिपुर में हुई हिंसा का आज 99वां दिन था. गुरुवार को मणिपुर संकट का 100 दिन है. गुरुवार को ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विपक्ष के अविश्वास प्रस्ताव का जवाब देंगे और इसपर वोटिंग होगी. सवाल ये है कि अमित शाह के लंबे भाषण के बाद गुरुवार को पीएम मोदी क्या कहेंगे.

दरअसल, सदन में आज अमित शाह ने जैसे तेवर दिखाए हैं, उस हिसाब से आसानी से समझा जा सकता है कि गुरुवार को पीएम मोदी के तेवर उससे भी ज्यादा आक्रामक रहेंगे. मंगलवार को जब बीजेपी संसदीय दल की बैठक हुई थी तब पीएम मोदी ने कहा था कि आप विपक्ष के अविश्वास प्रस्ताव को आखिरी ओवर की तरह ट्रिट करिए. इसमें आपको हर गेंद पर सिक्सर मारना है. आज गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष के हर वार पर सिक्सर लगाए हैं. अब देखना है कि पीएम मोदी गुरुवार को विपक्ष को कैसे जवाब देंगे.

बहस के दौरान अमित शाह ने मणिपुर (Manipur Issue) पर भी बात की. उन्होंने कहा, "राहुल गांधी ने मणिपुर जाकर नाटक किया. उन्हें वहां राजनीति करनी थी. मणिपुर पर जो हुआ, वो शर्मनाक हैं. लेकिन इस पर राजनीति करना और भी ज्यादा शर्मनाक है."

राहुल गांधी ने मणिपुर जाकर किया नाटक
अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान राहुल गांधी ने कहा- "हमारे प्रधानमंत्री आज तक मणिपुर नहीं गए. उनके लिए मणिपुर हिंदुस्तान नहीं है. मैं रिलीफ कैंप गया. महिलाओं-बच्चों से बात की. सेना एक दिन में वहां शांति ला सकती है. आप ऐसा नहीं कर रहे हो." राहुल के इन आरोपों पर अमित शाह ने कहा- "राहुल गांधी मणिपुर गए थे. उन्होंने कहा मुझे चुराचांदपुर जाना है. सेना ने कहा- हेलिकॉप्टर से जाइए. वे नहीं माने. तीन घंटे ऑनलाइन आकर नाटक किया, फिर लौट गए. अगले दिन फिर हेलिकॉप्टर से ही गए. पहले दिन ही वे हेलिकॉप्टर से जा सकते थे, लेकिन उन्हें राजनीति करनी थी."

हमने मणिपुर में एक्शन लिया
गृहमंत्री ने कहा, "मणिपुर में हुई नस्लीय हिंसा परिस्थितिजन्य है. हमने 4 मई तक ही काफी कुछ कर दिया था. हिंसक घटनाओं में 152 लोग मारे गए. मई में 107 मारे गए. जून-जुलाई में 15, अगस्त में 4." गृह मंत्री ने 4 मई को दो महिलाओं के साथ बर्बर व्यवहार के वीडियो का भी ज़िक्र किया. उन्होंने कहा कि विपक्ष को वो वीडियो समय पर पुलिस को दे देना चाहिए था, उसके सार्वजनिक होने का इंतज़ार नहीं करना चाहिए था.  

मणिपुर में कैसे शुरू हुआ विवाद?
मणिपुर की आबादी करीब 38 लाख है. यहां तीन प्रमुख समुदाय हैं- मैतेई, नगा और कुकी. मैतई ज्यादातर हिंदू हैं. मैतेई समुदाय की मांग है कि उन्हें भी जनजाति का दर्जा दिया जाए. समुदाय ने इसके लिए मणिपुर हाई कोर्ट में याचिका लगाई. समुदाय की दलील थी कि 1949 में मणिपुर का भारत में विलय हुआ था. उससे पहले उन्हें जनजाति का ही दर्जा मिला हुआ था. इसके बाद हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से सिफारिश की कि मैतेई को अनुसूचित जनजाति (ST) में शामिल किया जाए. इसी को लेकर विवाद शुरू हुआ. नगा और कुकी जनजाति मैतेई समुदाय को आरक्षण देने के विरोध में हैं. इनका कहना है कि राज्य की 60 में से 40 विधानसभा सीट पहले से मैतेई बहुल इंफाल घाटी में हैं. ऐसे में ST वर्ग में मैतेई को आरक्षण मिलने से उनके अधिकारों का बंटवारा होगा.

हिंसा में 131 लोग गंवा चुके हैं जान
मणिपुर में 3 मई से कुकी और मैतेई समुदाय के बीच जारी हिंसा में अब तक 131 लोगों की मौत हो चुकी है. वहीं 419 लोग घायल हुए हैं. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 65000 से अधिक लोग अपना घर छोड़ चुके हैं. आगजनी की 5 हजार से ज्यादा घटनाएं हुई हैं. 6 हजार मामले दर्ज हुए हैं.

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"13 बार लॉन्च किया गया, हर बार फेल"... कलावती की कहानी बता अमित शाह ने राहुल गांधी को घेरा

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लोकसभा में विपक्ष की ओर से लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर बुधवार को भी चर्चा हुई. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस दौरान विपक्ष को जमकर खरीखोटी सुनाई. शाह ने इस दौरान बुंदेलखंड की बुजुर्ग महिला कलावती की कहानी बताकर राहुल गांधी पर परोक्ष हमला बोला. उन्होंने लोकसभा में अपने संबोधन में किसी का नाम लिए बिना कहा, "इस सदन में एक ऐसे नेता हैं, जिसे 13 बार लॉन्च किया गया और हर बार फेल हुए." मोदी सरनेम वाले मानहानि केस में सुप्रीम कोर्ट की ओर से सजा पर रोक लगाए जाने के बाद राहुल गांधी की सांसदी बहाल हुई है. बुधवार को राहुल गांधी लोकसभा पहुंचे. उन्होंने अविश्वास प्रस्ताव पर भाषण भी दिया.

सदन में गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, "इस सदन में एक ऐसे नेता हैं, जिन्हें आज तक 13 बार राजनीति में लॉन्च किया गया है. 13 ही बार फेल हुए हैं. उनका एक लॉन्चिंग यहां सदन में हुआ था. एक गरीब मां बुलेंदखंड की थीं. कलावती नाम था. वे उनके घर खाने गए. गरीबी का वर्णन किया. वेदना को यहां बताया. सरकार छह साल चली. वो कलावती का क्या करा? उस कलावती को घर, बिजली, शौचालय, अनाज देने का काम मोदी सरकार ने किया."

कौन हैं कलावती?
बता दें कि 2008 में कलावती बंदुरकर सुर्खियों में आई थीं. राहुल गांधी महाराष्ट्र के यवतमाल के जलका गांव में उनके घर पहुंचे थे. उनके किसान पति ने 2005 में आत्महत्या कर ली थी. साल 2008 में तत्कालीन मनमोहन सरकार के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर बहस के दौरान बोलते हुए राहुल गांधी ने कलावती का जिक्र किया था. आज इसी को लेकर अमित शाह ने राहुल गांधी पर परोक्ष रूप से निशाना साधा.

अमित शाह ने अनुसूचित जाति व जनजाति वर्ग के लिए नरेंद्र मोदी सरकार के किए कार्यों का भी जिक्र करते हुए कहा, ‘हमने राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग बनाया… बीजेपी ने दो बार.. एक बार दलित और एक बार आदिवासी राष्ट्रपति बनाया.'

मोदी आजादी के बाद से सबसे भरोसेमंद पीएम-शाह
विपक्ष के अविश्वास प्रस्ताव का जवाब देते हुए अमित शाह ने कहा, "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारत की आजादी के बाद से सबसे भरोसेमंद पीएम हैं." कांग्रेस पर हमला बोलते हुए शाह ने कहा, "जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी और राजीव गांधी के कार्यकाल में सबसे ज्यादा सांप्रदायिक हिंसा हुई." 

'मोदी जी ने आज तीनों को भारत छोड़ने का नारा दिया'
शाह ने कहा, "आज ही के दिन गांधी जी ने नारा दिया था कि अंग्रेजों भारत छोड़ो. साढ़े नौ साल में मोदी जी ने नए प्रकार के राजनीतिक युग की शुरुआत की. तीस साल से राजनीति भ्रष्टाचार, परिवारवाद, तुष्टीकरण के नासूर से ग्रसित रही. मोदी जी ने पॉलिटिक्स ऑफ परफॉर्मेंस को तरजीह दी. मगर फिर भी कहीं दूर तक भ्रष्टाचार भी बैठा है, परिवारवाद दिखाई ही देता है और तुष्टीकरण की राजनीति दिखाई देती है. इसलिए मोदी जी ने आज तीनों को भारत छोड़ने का नारा दिया है."

हमारा वह चरित्र नहीं
अमित शाह ने कहा कि अविश्वास प्रस्ताव संवैधानिक प्रक्रिया है, हमें इसमें कोई आपत्ति नहीं है. इससे राजनीतिक दलों और पार्टियों के चरित्र उजागर होते हैं. मैं तीन प्रस्तावों का जरूर जिक्र करना चाहूंगा. दो प्रस्ताव हम लेकर आए थे, एक एनडीए सरकार के खिलाफ आया. जुलाई 1993 में नरसिंह राव जी की सरकार थी, अविश्वास प्रस्ताव आया. कांग्रेस का मूल सिद्धांत है येन केन प्रकारेण सत्ता में बने रहना. नरसिंह राव जी की सरकार जीत गई, लेकिन बाद में कई लोगों को जेल की सजा हुई, क्योंकि झारखंड मुक्ति मोर्चा को घूस देकर यह जीत हासिल की गई.
 



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अविश्वास प्रस्ताव : हर वार पर पलटवार, तीखे तंज... कुछ ऐसे अमित शाह ने विपक्ष को दिया मुंहतोड़ जवाब

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लोकसभा में विपक्ष की ओर से लाए गए अविश्वास प्रस्ताव (No-Confidence Motion) पर चर्चा का बुधवार को दूसरा दिन था. आज बहस की शुरुआत राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने की. शाम को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने अविश्वास प्रस्ताव पर बहस के दौरान विपक्ष पर तीखे वार किए. शाह ने कांग्रेस, राहुल गांधी समेत विपक्षी दलों के हर सवाल का जवाब दिया. गृह मंत्री ने यूपीए गठबंधन को घोटाले गिनाए. साथ ही मोदी सरकार की उपलब्धियां भी गिनाईं. बहस के दौरान अमित शाह ने मणिपुर (Manipur Issue) पर भी बात की. उन्होंने कहा, "राहुल गांधी ने मणिपुर जाकर नाटक किया. उन्हें वहां राजनीति करनी थी. मणिपुर पर जो हुआ, वो शर्मनाक हैं. लेकिन इस पर राजनीति करना और भी ज्यादा शर्मनाक है."

गृहमंत्री अमित शाह ने सदन में 2 घंटे 5 मिनट तक भाषण दिया. भारत की संसद के इतिहास में अविश्वास प्रस्ताव पर किसी भी नेता का ये सबसे लंबा भाषण रहा. इस दौरान अमित शाह ने विस्तार से बताया कि उनकी सरकार ने मणिपुर संकट को हल करने के लिए क्या-क्या किया. आइए जानते हैं कि लोकसभा में गृह मंत्री अमित शाह ने मणिपुर पर क्या कहा और विपक्ष पर किए कौन-कौन से वार:-

राहुल गांधी ने मणिपुर जाकर किया नाटक
अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान राहुल गांधी ने कहा- "हमारे प्रधानमंत्री आज तक मणिपुर नहीं गए. उनके लिए मणिपुर हिंदुस्तान नहीं है. मैं रिलीफ कैंप गया. महिलाओं-बच्चों से बात की. सेना एक दिन में वहां शांति ला सकती है. आप ऐसा नहीं कर रहे हो." राहुल के इन आरोपों पर अमित शाह ने कहा- "राहुल गांधी मणिपुर गए थे. उन्होंने कहा मुझे चुराचांदपुर जाना है. सेना ने कहा- हेलिकॉप्टर से जाइए. वे नहीं माने. तीन घंटे ऑनलाइन आकर नाटक किया, फिर लौट गए. अगले दिन फिर हेलिकॉप्टर से ही गए. पहले दिन ही वे हेलिकॉप्टर से जा सकते थे, लेकिन उन्हें राजनीति करनी थी."

"मणिपुर में जो हुआ वो शर्मनाक, उसपर राजनीति करना और भी शर्मनाक" : अमित शाह के विपक्ष पर 10 बड़े प्रहार

मणिपुर पर राजनीति शर्मनाक
अमित शाह ने आगे कहा, "मणिपुर में जो हुआ वो शर्मनाक है. उस पर राजनीति करना उससे भी ज्यादा शर्मनाक है. नरसिम्हा राव पीएम थे, तब भी मणिपुर में 700 लोग मारे गए, लेकिन पीएम वहां नहीं गए. मैं नाम बोलना नहीं चाहता. गृह मंत्रालय के रिकॉर्ड में शामिल है कि कौन इसमें शामिल है. 2004 में मनमोहन सिंह की सरकार थी, तब वहां 1700 से ज्यादा लोगों के एनकाउंटर हुए. मणिपुर में जो हुआ वो नस्लीय हिंसा है. इस पर राजनीति नहीं होनी चाहिए."

हमने मणिपुर में एक्शन लिया
गृहमंत्री ने कहा, "मणिपुर में हुई नस्लीय हिंसा परिस्थितिजन्य है. हमने 4 मई तक ही काफी कुछ कर दिया था. हिंसक घटनाओं में 152 लोग मारे गए. मई में 107 मारे गए. जून-जुलाई में 15, अगस्त में 4." गृह मंत्री ने 4 मई को दो महिलाओं के साथ बर्बर व्यवहार के वीडियो का भी ज़िक्र किया. उन्होंने कहा कि विपक्ष को वो वीडियो समय पर पुलिस को दे देना चाहिए था, उसके सार्वजनिक होने का इंतज़ार नहीं करना चाहिए था. 

अमित शाह के राहुल गांधी पर कोविड वैक्सीन वाले आरोप पर कांग्रेस ने मांगे सबूत

मणिपुर में है शांति
शाह ने कहा, "मणिपुर में मैं तीन दिन और तीन रात रहा. मेरे साथी नित्यानंद 23 दिन रहे. हमने जांच के लिए हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज की कमेटी बनाई है. इसमें आईपीएस भी हैं. आज भी मैतेई और कुकी का गुस्सा शांत नहीं हुआ है, लेकिन हमने फोर्स लगा रखी है, इसलिए वहां शांति है."

हमने खुद चर्चा के लिए स्पीकर को लिखा
शाह ने कहा- "ये कहा जा रहा है कि हम मणिपुर पर चर्चा नहीं चाहते, लेकिन सदन शुरू होने से पहले हमने इस पर चर्चा के लिए स्पीकर को लिखा था. विपक्ष चर्चा नहीं चाहता, वे सिर्फ विरोध करना चाहते हैं. मणिपुर जैसे मुद्दे पर आप गृहमंत्री को नहीं बोलने दे रहे हैं. आप हमें चुप नहीं कर सकते हो, हमें सुनना पड़ेगा."

मणिपुर सीएम बीरेन सिंह का किया बचाव
भाषण के दौरान अमित शाह ने मणिपुर के सीएम बीरेन सिंह का बचाव किया. उन्होंने कहा, "मोदी जी ने रात मैं मुझे फोन करके उठाया. हमने कई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की. वहां के अफसर बदले. हमने DGP बदला, चीफ सेक्रेटरी बदला, लेकिन सीएम ने हमें सहयोग किया. इसलिए वहां राष्ट्रपति शासन नहीं लगाया. राष्ट्रपति शासन तब लगता है, जब राज्य सरकार सहयोग न करे."

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कांग्रेस ने गरीबी हटाओ का नारा दिया, गरीबी नहीं हटी
शाह ने इस दौरान कांग्रेस पर भी तीखे वार किए. उन्होंने कहा- "कांग्रेस ने गरीबी हटाओ का नारा दिया. लेकिन गरीबी जस की तस रही. लेकिन मोदी ने इस समस्या को समझा क्योंकि उन्होंने गरीबी देखी थी. कांग्रेस कर्ज माफ करने का लॉलीपॉप देती थी, वहीं बीजेपी का एजेंडा है कि किसान को कर्ज ही ना लेना पड़े."

नीतीश कुमार पर साधा निशाना
अमित शाह ने कहा, "जब हम बैंक अकाउंट खोलने की जनधन योजना लेकर आए तो नीतीश कुमार ने हमारा मजाक उड़ाया. कि अकाउंट तो खोल दिया, अंदर क्या डालेंगे, बोनी तो कराओ. नीतीश बाबू हमारी बात सुन लीजिए. 49 करोड़ बैंक खाते खोले जिसमें 2 लाख करोड़ गरीबों के जमा हैं. केंद्र-राज्य सरकार की 300 से ज्यादा योजनाओं का पैसा डायरेक्ट इन खातों में जाता है. ये लोग जनधन योजना का विरोध क्यों कर रहे थे ये समझने वाली बात है." 

यूपीए पर भी कसे तंज
शाह ने कहा, "यूपीए के शासनकाल में पीएम रहे (राजीव गांधी) नेता ने कहा था कि मैं दिल्ली से 1 रुपया भेजता हूं लेकिन 15 पैसे ही पहुंचते हैं. उन्होंने ये बात कबूल की क्योंकि सच्चे आदमी थे, नए-नए राजनीति में आए थे. लेकिन मैं अब आगे पूछता हूं कि 85 पैसा कौन ले जाता था. ये पैसा वो ले जाते थे जो जनधन का विरोध कर रहे थे. कांग्रेस ने कहा सबकुछ लेकिन किया कुछ नहीं. किया बीजेपी ने."

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राहुल गांधी पर अमित शाह का निशाना
शाह ने आगे राहुल गांधी पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि इस सदन में एक ऐसे नेता हैं जिनको 13 बार राजनीति में लॉन्च किया गया. हर बार उनकी लॉन्चिंग फेल हुई. उनकी एक ऐसी ही लॉन्चिंग संसद से हुई थी." 

कोविड वैक्सीन पर भी कसे तंज
कोरोना पर बात करते हुए अमित शाह ने कहा कि कोरोना काल में अखिलेश यादव और राहुल गांधी ने जनता से कहा कि ये मोदी वैक्सीन है लेना मत. लेकिन जनता ने मोदी पर विश्वास जताया और सभी डोज लगवाईं. शाह ने कहा कि विरोधी पार्टियों को मोदी में अविश्वास हो सकता है लेकिन देश की जनता को नहीं. वो मोदी के साथ है."

मोदी सरकार अल्पमत में होने का मतलब ही नहीं 
अविश्वास प्रस्ताव पर अमित शाह ने कहा, "अब तक लोकसभा में 27 अविश्वास और 11 विश्वास प्रस्ताव आ चुके हैं. इस बार पीएम मोदी और मंत्रिमंडल के प्रति किसी को अविश्वास नहीं है. इसका मकसद सिर्फ जनता में भ्रांति पैदा करना है. दो तिहाई बहुमत से दो बार NDA को चुना गया. सरकार अल्पमत में होने का मतलब ही नहीं है."

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Tuesday, August 8, 2023

आर्टिकल 370 के बिना कश्मीर के 4 साल, घाटी में क्या हुए बदलाव?

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मोदी सरकार ने 5 अगस्त 2019 को जम्मू-कश्मीर (Jammu-Kashmir) में आर्टिकल 370 (Article 370) और 35A को निरस्त करके इसे दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित किया था. मोदी सरकार (Modi Government) ने ऐसा करके दुनिया को बताया कि 'असंभव कुछ भी नहीं है', ये सिर्फ एक कैची टैगलाइन नहीं है. वास्तव में इसके उदाहरण भी मिलते हैं. हालांकि, अंदर ही अंदर सत्ता प्रतिष्ठान को मालूम था कि अभी सिर्फ आधा काम पूरा हुआ है. अभी कई मील दूर जाना था.

सरकार ने किसी भी चुनौती क्षेत्रीय, राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और खास तौर पर दो शत्रुतापूर्ण पड़ोसियों (पाकिस्तान, चीन) से निपटने में पर्याप्त उपाय किए हैं. जम्मू-कश्मीर का कानूनी और संवैधानिक एकीकरण अब पूरा हो गया. अब सबसे बड़ी चुनौती कश्मीर घाटी के लोगों का शेष भारत के साथ एकीकरण करना था.

70 साल तक कश्मीर घाटी के लोगों को पूर्व जनसंघ और बीजेपी को छोड़कर बाकी दलों के क्षेत्रीय और केंद्रीय नेताओं की ओर से समझाया गया था कि आर्टिकल 370 भारत के खिलाफ उनका कवच था. इसके तहत दी गई सुरक्षा के कारण उन्हें विशेष दर्जा हासिल था. पीढ़ियों ने कश्मीर बनाम भारत की इस मानसिकता को विकसित कर लिया था.

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने संसद को दोनों सदन में सबसे बेहतरीन तरीके से बताया कि आर्टिकल 370 कितना भेदभावपूर्ण था. यहां तक कि जम्मू-कश्मीर के लोगों के लिए भी. ये आर्टिकल केवल मुट्ठी भर और तीन आधुनिक राजनीतिक राजवंशों को लाभ पहुंचा रहा था. अमित शाह सही थे.

पिछले शासन के एक प्रसिद्ध राजनीतिक सलाहकार ने बताया था कि कैसे पिछले कुछ सालों में कश्मीर में संघर्ष की राजनीति घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कुटीर, मध्यम और बड़े उद्योगों में बदल गई. उन्होंने कहा था कि मजबूत लाभार्थी इसे किसी भी कीमत पर जाने नहीं देंगे.

किस तरह कश्मीरियों की पीढ़ियों का ब्रेनवॉश किया गया. उन्हें पत्थर और बंदूकें उठाने के लिए उकसाया गया. इसे हाल ही में जाने-माने कश्मीरी नौकरशाह से राजनेता बने शाह फैसल ने शानदार ढंग से समझाया है. उन्होंने एक कश्मीरी और राज्य के एक अधिकारी के रूप में अपने व्यक्तिगत अनुभव शेयर किए. उन्होंने बताया कि कैसे 9 से 10 साल के युवा लड़के पत्थर और लाठियां उठाते थे. ये बच्चे बुजुर्गों से अपना आईडी कार्ड दिखाने के लिए कहते थे. कर्फ्यू का उल्लंघन करने पर उन पर लाठियां भी बरसाते थे.

4 साल पहले 5 अगस्त 2019 को आर्टिकल 370 को निरस्त कर दिया गया था.

इस क्लिप में आईएएस शाह फैसल बताते हैं कि उन्होंने आर्टिकल 370 पर अपना मन क्यों बदला. कैसे पाकिस्तान ने कश्मीर में अलगाववाद को बढ़ावा दिया. साथ ही राज्य को इस आर्टिकल के निरस्त होने से कैसे फायदा हुआ.

आर्टिकल 370 को लेकर पहला विश्वास बहाली उपाय 7 अगस्त 2019 को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल की ओर से आया. वह श्रीनगर की सड़कों पर बिना सुरक्षा कर्मियों के घूम रहे थे. लोगों से बातचीत कर रहे थे. उनके साथ खाना खा रहे थे. इसके कुछ दिनों बाद एनएसए ने ईद पर लाल चौक, हजरतबल तीर्थ और श्रीनगर शहर का दौरा किया. इससे यह मैसेज गया कि भारत सरकार आम लोगों की परवाह करती है. आर्टिकल 370 पर डरने की कोई बात नहीं है. जो हुआ वह अच्छे के लिए हुआ.

केंद्र में राजनीतिक नेतृत्व को श्रीनगर और जम्मू में एक ऐसे प्रभारी की जरूरत महसूस हुई, जो पीएम मोदी के विजन को लोगों के बीच अच्छे से रख सके. ऐसा व्यक्ति जो ईमानदार हो, बेहतर करने के लिए प्रेरित हो, विनम्र और आकर्षण व्यक्तित्व वाला हो. ऐसा शख्स जो पहुंच योग्य हो और जो लोगों से आसानी से जुड़ सके. पूर्व केंद्रीय मंत्री मनोज सिन्हा इस रोल में एकदम फिट बैठते दिखे.

उन्हें गृह मंत्री अमित शाह और पीएम मोदी ने वाराणसी से दिल्ली बुलाया. फिर उन्हें बतौर नए उपराज्यपाल श्रीनगर भेजा गया. 7 अगस्त 2020 को सिन्हा ने पदभार संभाल लिया. श्रीनगर में अन्य मुद्दों के अलावा कोविड ने कई अन्य चुनौतियां भी खड़ी कीं. सिन्हा ने काम वहीं से शुरू किया, जहां एनएसए डोभाल ने छोड़ा था. मनोज सिन्हा का पहला पड़ाव श्रीनगर का सरकारी मेडिकल कॉलेज था. यह आउटरीच लोगों को तुरंत पसंद आई. सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने लिखा कि उपराज्यपाल ने वो किया है जो पहले मुख्यमंत्रियों ने नहीं किया था.

उसके बाद मनोज सिन्हा ने हर कार्यक्रम में सड़क के रास्ते से यात्रा करने की आदत बना ली. जब तक उनक गंतव्य वास्तव में दूर न हो या कोई इमरजेंसी न हो, तब तक वो हेलिकॉप्टर का इस्तेमाल नहीं करते थे. इससे उनकी जमीनी समझ बेहतर हुई. लोगों की उनके प्रति धारणा बेहतर हुई. सिन्हा आतंकवाद के गढ़ माने जाने वाले क्षेत्रों के दौरे पर भी गए. हाल ही में तीन दशकों से अधिक समय के बाद आयोजित हुए मुहर्रम के जुलूस में उनकी मौजूदगी और एकत्रित भीड़ के साथ उनके घुलने-मिलने ने घाटी में मोदी सरकार के आलोचकों को भी हैरान कर दिया. कोई कल्पना कर सकता है कि ऐसी यात्राएं करने के उनके निर्णय पर उनके सुरक्षा अधिकारियों की क्या प्रतिक्रिया रही होगी.

जो 2019 से पहले और बाद में कश्मीर गया है, वह बता सकता है कि क्या बदलाव आया है.

पहला- कश्मीर घाटी में लोगों के बीच बीजेपी को लेकर अभी भी कुछ संदेह है, लेकिन पीएम मोदी और एलजी सरकार की स्वीकार्य वास्तविकताएं भी हैं.

दूसरा- पत्थरबाजी या पथराव और सुरक्षा कर्मियों पर हमले अब अतीत की बात हो गए हैं. अगस्त 2019 के बाद से पथराव की कोई घटना सामने नहीं आई है. युवा पीढ़ी के लिए अब खेल के मैदान, घाटी भर में निर्मित स्टेडियम, कौशल विकास के अवसर, स्वयं सहायता समूह, स्कूल और कॉलेज जैसे कई रचनात्मक रास्ते हैं. कश्मीर में रिकॉर्ड पर्यटक भी आ रहे हैं. इससे पुराने व्यवसाय पुनर्जीवित हो गए हैं. भारत के साथ बेहतर कनेक्टिविटी ने नए व्यवसायों और मौके पैदा किए हैं. कहा जाता है कि महिलाएं और लड़कियां इस बदलाव के प्रति ज्यादा ग्रहणशील हैं.

तीसरा- घाटी में पहले बंद की संस्कृति थी. उग्रवादियों, अलगाववादियों और आतंकवादी संगठनों द्वारा किसी भी चीज़ या हर चीज़ पर बंद बुलाया जा सकता था. किसी भी वीवीआईपी यात्रा के दौरान बंद का फैसला और भी तेजी से लिया जाता था. लेकिन जुलाई 2021 में जब तत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद कश्मीर के तीन दिवसीय दौरे पर गए, तो प्रशासन ने सुनिश्चित किया कि कोई बंद न हो. उस साल 5 अगस्त को कोई शटडाउन नहीं हुआ.

बंद को लेकर एक सार्वजनिक समारोह में मनोज सिन्हा का एक बयान सबसे उल्लेखनीय था. समारोह में सिन्हा से पूछा गया कि उन्होंने बंद या शटडाउन को रोकने के लिए छड़ी (किसी तरह की सख्ती) का इस्तेमाल किया? जवाब देते हुए सिन्हा ने कहा, "अगर पाकिस्तान और आतंकवादी संगठन बंदूक का इस्तेमाल करके बंद लागू कर सकते हैं, तो प्रशासन द्वारा डंडा का इस्तेमाल करने में क्या गलत है?"

चौथा- जिला विकास परिषद चुनाव और शहरी निकाय चुनाव जैसे स्थानीय चुनावों ने सभी तरह के नए जमीनी स्तर के नेताओं को सामने लाने का काम किया. सड़कें और छोटे पुल बनाए गए. उन क्षेत्रों में बिजली पहुंचाई गई, जो सदियों से इसकी मांग कर रहे थे.

डीडीसी चुनाव नतीजे इस बात का भी प्रतिबिंब थे कि पारंपरिक पार्टियों में लोगों का विश्वास कितना कम हो गया है. आदर्श रूप से नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC), पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP), सीपीआई (M), सीपीआई, जेएंडके पीपुल्स कॉन्फ्रेंस, अवामी नेशनल कॉन्फ्रेंस और पीपुल्स मूवमेंट वाले पीपुल्स अलायंस फॉर गुपकर डिक्लेरेशन (PAGD) को जीत हासिल करनी चाहिए थी. लेकिन इसके उलट हुआ. सर्वेक्षणों में प्रतिद्वंद्वी दलों या संरचनाओं के लिए कोई गुंजाइश नहीं छोड़ी गई, लेकिन नतीजे उस तरह नहीं आए.

पांचवां- सिनेमा हॉल, संगीत, साहित्य उत्सव का खुलना. आर्टिकल 370 को निरस्त करने और 33 वर्षों के बाद घाटी में सिनेमा थिएटरों को खोलने के लिए सामान्य स्थिति की वापसी हुई. श्रीनगर में पहला मल्टीप्लेक्स था. अन्य जिलों में भी सिनेमा हॉल खोले गए. सिनेमाघरों को फिर से खोलना एक शानदार सफलता साबित हुई. इससे उन लोगों को एक कड़ा संदेश गया जो कश्मीरियों को अश्लीलता और कट्टरवाद में धकेलना चाहते थे. इसी तरह झेलम रिवर फ्रंट का उद्घाटन हुआ. इससे डल झील और झेलम नदी के किनारे संगीत, साहित्य और आनंद का माहौल बन गया.

कश्मीर में जी20 पर्यटन शिखर सम्मेलन का सफल समापन इस बात का स्पष्ट संकेत है कि क्या बदलाव आया है. वहीं, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा ने गुलमर्ग में अपनी खूबसूरत तस्वीरों और वीडियो के जरिए अनजाने में दुनिया को बताया कि पिछले चार वर्षों में कश्मीर कैसे बदल गया है.

(संजय सिंह वरिष्ठ पत्रकार हैं)

डिस्क्लेमर: इस आलेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं.



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Suryakumar 83 blows away WI as India keep series alive with victory in 3rd T20I

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Monday, August 7, 2023

चंद्रयान-3 को 100 किमी की कक्षा से नीचे उतारना बहुत महत्वपूर्ण चरण: इसरो प्रमुख सोमनाथ

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नई दिल्ली: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के अध्यक्ष एस. सोमनाथ ने सोमवार को कहा कि चंद्रयान-3 अच्छी हालत में है और इसका सर्वाधिक महत्वपूर्ण चरण कक्षा निर्धारण प्रक्रिया होगी, जब अंतरिक्षयान 100 किलोमीटर की वृत्ताकार कक्षा से चंद्रमा के करीब जाना शुरू करेगा.

प्रक्षेपण यान मार्क-3 रॉकेट से 14 जुलाई को प्रक्षेपित किया गया चंद्रयान-3 अंतरिक्षयान अब चंद्रमा की 4,313 किलोमीटर (किमी) दीर्घवृत्ताकार कक्षा में मौजूद है और इसे 100 किमी की वृत्ताकार कक्षा में ले जाने के लिए नौ से 17 अगस्त के बीच सिलसिलेवा प्रक्रियाएं किये जाने की जरूरत है. विक्रम लैंडर के चंद्रमा पर 23 अगस्त को उतरने की उम्मीद है.

सोमनाथ ने यहां ‘पीटीआई-भाषा' से कहा, ‘‘100 किमी तक हम कोई कठिनाई नहीं देख रहे हैं. समस्या केवल पृथ्वी से लैंडर की स्थिति का अनुमान लगाने में है. यह माप एक बहुत महत्वपूर्ण माप है, हम इसे कक्षा निर्धारण प्रक्रिया कह सकते हैं. यदि यह सही है तो शेष प्रक्रिया पूरी की जा सकती है.''

इसरो अध्यक्ष ने कहा, ‘‘हम इस बार इसे बहुत सही तरीके से नीचे उतारने में सक्षम हैं. योजना के अनुसार कक्षा में बदलाव किया जा रहा है. इसमें कोई भटकाव नहीं है. इसलिए, यह शानदार नतीजे दे रहा है और हमें उम्मीद है कि सब कुछ ठीक रहेगा.'' उन्होंने कहा कि चंद्रयान-2 से मिला अनुभव बहुत उपयोगी साबित हो रहा है क्योंकि अंतरिक्ष एजेंसी ने चंद्रमा पर एक अंतरिक्षयान उतारने की कोशिश की थी. 2019 में यह अभियान आंशिक रूप से सफल रहा था.

सोमनाथ ने कहा, ‘‘चंद्रयान-2 से मिले अनुभव से काफी मदद मिलेगी. क्या कुछ गलत रहा, उस पर हमने काफी विस्तार से विचार किया. हमने फिर से परिदृश्य तैयार किया और चंद्रयान-3 में काफी संशोधन किया.'' उन्होंने कहा कि चंद्रयान-2 अभियान से मिली चंद्रमा की तस्वीरों का उपयोग चंद्रयान-3 की बेहतर अवस्थिति के लिए किया गया. सोमनाथ ने कहा, ‘‘हमने आकस्मिक स्थिति एवं गड़बड़ी से निपटने के लिए और अधिक सूचना जुटाई. हमने इन सभी चीजों पर व्यापक परीक्षण कार्यक्रम संचालित किया.''

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खरगे और राहुल ने हरियाणा के कांग्रेस नेताओं के साथ बैठक की, लोकसभा चुनाव की तैयारियों पर चर्चा

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नई दिल्ली: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने सोमवार को पार्टी की हरियाणा इकाई के वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक की, जिसमें अगले लोकसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर चर्चा की गई. पार्टी मुख्यालय में हुई बैठक में खरगे और राहुल गांधी के अलावा कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा, प्रदेश प्रभारी दीपक बाबरिया, प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष उदयभान और कई अन्य नेता मौजूद थे.

खरगे ने ट्वीट किया, ‘‘लोकसभा चुनाव की तैयारियों के लिए पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ आज बैठक हुई. भाजपा की डबल इंजन सरकारों ने हरियाणा की 2.5 करोड़ जनता को विश्वासघात के अलावा कुछ नहीं दिया. कांग्रेस पार्टी हरियाणा में जनता से जुड़े मुद्दे लगातार उठा रही है.''

उन्होंने कहा, ‘‘हम हरियाणा के हर वर्ग- किसान, जवान, युवा, खेत-मज़दूर, महिलाओं, दलित व पिछड़े वर्ग और छोटे व्यापारी, सभी की भलाई के लिए सजग हैं. हरियाणा में सद्भाव और शान्ति क़ायम रहे. सभी समुदाय मिलकर रहें. यह राज्य फ़िर से तरक़्क़ी की ओर अग्रसर हो, हर एक कांग्रेस नेता व आम कार्यकर्त्ता इसके लिए संघर्षशील है.''

हुड्डा ने संवाददाताओं से कहा कि संगठन में योग्यता के आधार पर लोगों को स्थान दिया जाएगा. बाबरिया ने कहा कि संगठन में सभी वर्गों की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी. उन्होंने बताया कि हरियाणा प्रदेश कांग्रेस कमेटी का एक प्रतिनिधिमंडल मंगलवार को नूंह जाएगा, जहां सभी समुदायों से मिलेगा. वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में हरियाणा की सभी 10 सीट पर भारतीय जनता पार्टी को जीत मिली थी. कांग्रेस को एक भी सीट नहीं मिल पाई थी.

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प्रधानमंत्री मोदी की डिग्री: केजरीवाल, संजय सिंह को मानहानि मामले में राहत देने से अदालत का इनकार

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अहमदाबाद: गुजरात में अहमदाबाद की एक सत्र अदालत ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और आम आदमी पार्टी (आप) के राज्यसभा सदस्य संजय सिंह की ओर से दायर उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने अपने खिलाफ आपराधिक मानहानि मामले में सुनवाई पर अंतरिम रोक लगाने का आग्रह किया था.

सत्र न्यायाधीश एजे कनानी की अदालत ने मेट्रोपोलिटन अदालत में चल रहे आपराधिक मानहानि मामले की सुनवाई पर अंतरिम रोक लगाने का आग्रह करने वाली आप नेताओं की याचिकाएं खारिज कर दी हैं. यह मामला गुजरात विश्वविद्यालय ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की डिग्री के सिलसिले में केजरीवाल और सिंह के ‘व्यंगात्मक' और ‘अपमानजनक' बयानों को लेकर दायर किया था.

आप नेताओं के वकील पुनित जुनेजा ने कहा कि अदालत ने शनिवार को अपना आदेश जारी किया और गुजरात विश्वविद्यालय द्वारा समय मांगे जाने के बाद मामले की अगली सुनवाई 21 अगस्त के लिए मुकर्रर कर दी. जुनेजा ने कहा कि केजरीवाल और सिंह ने मानहानि मामले में मेट्रोपोलिटन अदालत के समन को चुनौती देते हुए सत्र अदालत में एक पुनर्विचार याचिका दायर की थी और अपनी मुख्य याचिका के लंबित रहने के दौरान सत्र अदालत से अंतरिम राहत मांगी थी तथा उनकी मुख्य याचिका को अदालत ने खारिज कर दिया था.

मेट्रोपोलिटन अदालत ने दोनों नेताओं को इस संबंध में जारी समन को लेकर 11 अगस्त को अदालत में उपस्थित रहने का निर्देश दिया है. जुनेजा ने कहा, “हमने यहां मेट्रोपोलिटन अदालत में चल रहे आपराधिक मानहानि मामले की सुनवाई पर अंतरिम रोक लगाने के लिए सत्र अदालत में एक याचिका दायर की थी. अदालत ने शनिवार को हमारी याचिका खारिज कर दी और मामले को 21 अगस्त के लिए सूचीबद्ध कर दिया.”

अदालत ने उन्हें इस आधार पर मामले में अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया कि दोनों नेताओं ने मेट्रोपोलिटन अदालत से कहा है कि वे 11 अगस्त को उसके समक्ष उपस्थित रहेंगे. जुनेजा ने कहा कि वे गुजरात उच्च न्यायालय का रुख करेंगे. गुजरात विश्वविद्यालय के कुलसचिव पीयूष पटेल की ओर से दायर मानहानि याचिका में कहा गया है कि विश्वविद्यालय को निशाना बनाने वाली इन दोनों नेताओं की टिप्पणियां अपमानजनक थीं और विश्वविद्यालय की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाती हैं.

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लोकसभा में आज से विपक्ष के अविश्वास प्रस्ताव पर होगी चर्चा, पीएम मोदी 10 अगस्त को देंगे जवाब

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केंद्र सरकार ने संसद के दोनों सदन लोकसभा (Loksabha) और राज्यसभा (Rajyasabha) से दिल्ली सर्विस बिल पास करा लिया है. अब 8 अगस्त यानी मंगलवार से विपक्ष की ओर से लाए गए अविश्वास प्रस्ताव (No-Confidence Motion) पर चर्चा होगी. लोकसभा में आज दोपहर 12 बजे से अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा शुरू होगी, जो शाम 7 बजे तक चलेगी. इस दौरान कांग्रेस सांसद राहुल गांधी (Rahul Gandhi) चर्चा की शुरुआत कर सकते हैं. 10 अगस्त को पीएम मोदी (PM Narendra Modi) अविश्वास प्रस्ताव का जवाब देंगे.

26 जुलाई को कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने लोकसभा सचिवालय में अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को संबोधित करते हुए एक नोटिस दिया था. नोटिस में कहा गया था कि वो और उनके विपक्षी गठबंधन इंडिया के अन्य सांसद सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव ला रहे हैं जिसकी वो मंजूरी दे दें. इंडिया गठबंधन की ओर से सदन के नियम 198 के तहत मणिपुर मुद्दे पर अविश्वास प्रस्ताव लाया गया था, जिसे लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने स्वीकार कर लिया था.

बुधवार शाम 4 बजे पीएम मोदी देंगे बयान
अविश्वास प्रस्ताव पर 9 अगस्त (बुधवार) को भी दोपहर 12 बजे से शाम 7 बजे तक चर्चा होगी. बुधवार को ही गृह मंत्री अमित शाह अविश्वास प्रस्ताव पर बयान दे सकते हैं. इस दौरान वह मणिपुर के हालात पर विस्तार से सरकार का पक्ष रखेंगे. इसके बाद 10 अगस्त को दोपहर 12 बजे फिर से चर्चा शुरू होगी और शाम 4 बजे पीएम नरेंद्र मोदी अविश्वास प्रस्ताव पर जवाब देंगे. फिर इस प्रस्ताव पर मतदान होगा.

ये हैं बीजेपी के स्पीकर
जानकारी के मुताबिक, बीजेपी की ओर से निशिकांत दुबे अविश्वास प्रस्ताव के विरोध में चर्चा की शुरुआत करेंगे. बीजेपी की तरफ से करीब 20 स्पीकर होंगे. इनमें स्मृति ईरानी, निर्मला सीतारमण, ज्योतिरादित्य सिंधिया और राजवर्धन सिंह राठौर का नाम खासतौर पर शामिल है.

लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव का गिरना तय
विपक्ष द्वारा लाए गए इस अविश्वास का संसद प्रस्ताव का पास होना नामुमकिन है, क्योंकि पीएम मोदी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार के पास पूर्ण बहुमत है. आंकड़ों पर नजर डालें तो संसद के निचले सदन लोकसभा में मोदी सरकार बहुमत में है. उसके पास 301 सांसद हैं, वहीं एनडीए के पास 333 सांसद हैं. इधर पूरे विपक्ष के पास कुल 142 सांसद हैं. सबसे ज्यादा 50 सांसद हैं. ऐसे में स्पष्ट है कि विपक्ष का अविश्वास प्रस्ताव फेल हो जाएगा. 

फिर विपक्ष ने क्यों चला ये दांव?
ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर विपक्ष इसे संसद में क्यों लाया? विपक्ष से जुड़े सूत्रों का कहना है कि इस अविश्वास प्रस्ताव के जरिए विपक्ष पीएम मोदी को मणिपुर मुद्दे पर बोलने के लिए मजबूर करना चाहता है. हाल ही में विपक्षी गठबंधन इंडिया में शामिल 16 पार्टियों के 21 सांसदों ने मणिपुर का दौरा किया था. खबरों के मुताबिक अपने दौरे में विपक्षी दलों के सांसदों ने मणिपुर की वर्तमान स्थिति को लेकर जानकारी जुटाने की भी योजना थी, जिसे बहस के दौरान संसद में उठाया जा सकता है.

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Back-door robbery of power: Delhi Chief Minister slams BJP after Rajya Sabha snub

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दिल्ली सर्विस बिल संसद से पास, अमित शाह के हमले पर केजरीवाल का पलटवार; 10 प्वाइंट्स में जानें सब कुछ

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  1.  केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने राज्यसभा में ये बिल पेश किया. जिसका बीजू जनता दल (BJD) और वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (YSRCP) ने भी समर्थन किया. बिल के पक्ष में 131 और विपक्ष में 102 वोट पड़े. राज्यसभा में आप, कांग्रेस के अलावा विपक्षी गठबंधन इंडिया के सभी घटक दलों ने बिल का जोरदार विरोध किया. 
  2. राज्यसभा में विपक्ष के सभी संशोधन प्रस्ताव गिर गए थे. अमित शाह ने राज्यसभा में कहा कि इस बिल का उद्देश्य दिल्ली में भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन सुनिश्चित करना है. बिल के एक भी प्रावधान से, पहले जो व्यवस्था थी, उस व्यवस्था में एक इंच मात्र भी परिवर्तन नहीं हो रहा है. 
  3. शाह ने कहा कि यह बिल पूर्व की तरह प्रधानमंत्रियों की सदस्यता बचाने नहीं लाए. इमरजेंसी लगाने नहीं लाए. कांग्रेस को लोकतंत्र पर बोलने का अधिकार नहीं है. आपने देश को इमरजेंसी दी थी.
  4. अमित शाह ने अरविंद केजरीवाल पर निशाना साधते हुए कहा, "AAP का जन्म कांग्रेस को गाली देकर हुआ. खरगे साहब आप जिस गठबंधन को बचाने के लिए इस बिल का विरोध कर रहे हैं, सदन के बाद केजरीवाल साहब उससे मुंह मोड़ लेंगे."
  5. विपक्षी गठबंधन INDIA को लेकर गृह मंत्री ने कहा, "कांग्रेस को पता है कि अकेले कुछ होने वाला नहीं है. इसलिए गठबंधन बना लिया है. केरल में कांग्रेस और लेफ्ट एक दूसरे के खिलाफ है, लेकिन गठबंधन में ईलू-ईलू कर रहे हैं. आप 4-5 दल और जोड़ लें, फिर भी 24 मई 2024 को नरेंद्र मोदी ही प्रधानमंत्री की शपथ लेंगे.
  6.  इस बीच अमित शाह ने कहा- "8 से 10 अगस्त तक लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा होनी है, इसलिए विपक्ष मणिपुर पर 11 अगस्त को चर्चा करे. अगर खरगे जी 11 अगस्त को चर्चा के लिए हां कहते हैं, तो मैं भी इसके लिए तैयार हूं.आप कहते हैं कि हमें नागपुर से इशारा आता है. नागपुर भारत में ही है. आपको तो रसिया (रूस) और चाइना (चीन) से इशारा आता है."
  7. बिल पास होने के बाद दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने अपनी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा- 'संसद में अमित शाह ने कहा कि हमारे पास कानून पारित करने की शक्ति है. आपको लोगों के लिए काम करने की शक्ति दी गई है, उनके अधिकार छीनने की नहीं.'
  8. केजरीवाल ने कहा, "साफ जाहिर है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कह रहे हैं कि मैं सुप्रीम कोर्ट को नहीं मानता. दिल्ली की जनता ने आम आदमी पार्टी को जिताकर साफ कहा है कि दिल्ली में दखलंदाजी मत करना, लेकिन मोदी जी जनता की बात नहीं सुनना चाहते हैं."
  9. अरविंद केजरीवाल ने कहा, "मैं जो भी करता हूं दिल्ली की जनता उसमें मेरा समर्थन करती है और उन्होंने मुझे चुनाव में जीत दिलाकर अपना समर्थन दिखाया है. बीजेपी सिर्फ हमारे अच्छे काम को रोकने की कोशिश कर रही है. इस बार जनता उन्हें कोई भी सीट नहीं जीतने देगी."
  10.  19 मई को केंद्र सरकार ने अध्यादेश लाकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को बदल दिया था. केंद्र ने दिल्ली में ट्रांसफर-पोस्टिंग का अधिकार उपराज्यपाल को दे दिया. दिल्ली सर्विस बिल कानून बनने के बाद इसी अध्यादेश की जगह लेगा.


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Sunday, August 6, 2023

Chandrayaan-3 Updates : चंद्रमा की ऑर्बिट में पहुंचने के बाद चंद्रयान-3 ने भेजी पहली तस्वीर

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भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने भारत के तीसरे मानवरहित चंद्रमा मिशन चंद्रयान 3 द्वारा ली गई चंद्रमा की पहली तस्वीर जारी की है. चद्रयान-3 ने शनिवार को चंद्रमा की कक्षा में प्रवेश करने के बाद ये तस्वीरें लीं. मिशन के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से ट्वीट किया गया है कि 5 अगस्त, 2023 को चंद्र कक्षा में प्रवेश के दौरान चंद्रयान -3 अंतरिक्ष यान द्वारा देखा गया चंद्रमा. 

चंद्रमा मिशन अब तक सुचारू रहा है और इसरो को उम्मीद है कि विक्रम लैंडर इस महीने के अंत में 23 अगस्त को चंद्रमा की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग करेगा. 

गौरतलब है कि भारत का तीसरा मानवरहित चंद्र मिशन ‘चंद्रयान-3' शनिवार को चंद्रमा की कक्षा में सफलतापूर्वक प्रवेश कर गया. चंद्रयान-3 को 22 दिन पहले चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतरने के लिए प्रक्षेपित किया गया था, जहां अब तक कोई भी देश नहीं पहुंचा है. चंद्रयान-3 को बिना किसी गड़बड़ी के चंद्रमा के करीब लाने वाली आवश्यक प्रक्रिया बेंगलुरु स्थित अंतरिक्ष इकाई से किए जाने के बाद चंद्रयान-3 ने इसरो को संदेश भेजा, ‘‘मैं चंद्रमा का गुरुत्वाकर्षण महसूस कर रहा हूं."

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2nd T20I: West Indies survive late collapse to secure 2-wicket win over India

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"न्यूज़क्लिक चीनी कम्युनिस्ट पार्टी का खतरनाक उपकरण, कांग्रेस का बचाव करना स्वाभाविक" : अनुराग ठाकुर

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केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण और युवा एवं खेल मामलों के मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर ने रविवार को ट्वीट कर कांग्रेस पार्टी और विपक्षी गठबंधन पर हमला बोला. अनुराग ठाकुर ने न्यूज वेबसाइट न्यूजक्लिक को लेकर न्यूयॉर्क टाइम्स में छपी खबर का स्क्रीनशॉट्स ट्विटर पर शेयर करते हुए लिखा कि यहां तक ​​कि 'द न्यूयॉर्क टाइम्स' जैसे अखबार भी अब स्वीकार कर रहे हैं कि नेविल रॉय सिंघम और उनका न्यूज़क्लिक चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीसी) के खतरनाक उपकरण हैं और दुनिया भर में चीन के राजनीतिक एजेंडे को बढ़ावा दे रहे हैं.

अनुराग ठाकुर ने लिखा कि NYT से बहुत पहले, भारत लंबे समय से दुनिया को बताता रहा है कि न्यूज़क्लिक चीनी प्रचार का एक खतरनाक वैश्विक जाल है. समान विचारधारा वाली ताकतों द्वारा समर्थित, नेविल एक संदिग्ध भारत विरोधी एजेंडे को आगे बढ़ा रहा है. 

वर्ष 2021 में, जब भारत की प्रवर्तन एजेंसियों ने मनी लॉन्ड्रिंग के पुख्ता सबूतों के आधार पर न्यूज़क्लिक के खिलाफ जांच शुरू की थी तो कांग्रेस और संपूर्ण वाम-उदारवादी लोगों ने उसका बचाव किया था. 

कांग्रेस के लिए नेविल और न्यूज़क्लिक का बचाव करना स्वाभाविक है क्योंकि कांग्रेस नेतृत्व के लिए राष्ट्रीय हित कभी मायने नहीं रखता. क्या यह वही कांग्रेस पार्टी नहीं है जिसने भारत में चीनी हितों को बढ़ावा देने के लिए वर्ष 2008 में सीपीसी के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए थे और कथित तौर पर चीनी दूतावास से राजीव गांधी फाउंडेशन (आरजीएफ) के लिए दान स्वीकार किया था? यूपीए हजार बार अपना नाम बदल सकता है. लेकिन लोग जानते हैं कि घमंडिया गठबंधन के हाथों में देश सुरक्षित नहीं रहेगा.

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Saturday, August 5, 2023

यूपी के श्रावस्‍ती में दर्दनाक हादसा, मवेशी से टकराने के बाद अनियंत्रित कार खाई में गिरी, 5 की मौत 

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उत्तर प्रदेश के श्रावस्‍ती में एक दर्दनाक हादसे में पांच लोगों की मौत हो गई. पुलिस के मुताबिक, एक कार अनियंत्रित होकर खाई में जा गिरी, जिसमें सवार पांच लोगों की मौत हो गई. हादसे में मरने वालों में दो बच्‍चे भी शामिल हैं. घटना की सूचना मिलने के बाद इकौना पुलिस मौके पर पहुंची. खाई से निकालकर घायलों को आनन-फानन में अस्‍पताल ले जाया गया. यह हादसा श्रावस्‍ती के इकौना थाना इलाके के सीताद्वार के नजदीक हुआ.

पुलिस के मुताबिक, सूचना मिलने के बाद इकौना पुलिस मौके पर पहुंची. घटना की गंभीरता को देखते हुए सीओ भी मौके पर पहुंचे. घायलों को तुरंत अस्‍पताल ले जाया गया और कार को खाई से बाहर निकलवाया गया. 

पुलिस ने इस घटना की जानकारी देते हुए ड्राइवर के हवाले से बताया कि कार के सामने अचानक से एक मवेशी आ गया था, जिसे बचाने के चक्‍कर में गाड़ी पलट गई और खाई में जा गिरी. इस घटना में ड्राइवर घायल है. 

पुलिस के मुताबिक, तीन लोगों की मौके पर ही मौत हो गई थी. वहीं दो लोगों की मौत अस्‍पताल लाने के बाद हुई. पुलिस ने बताया कि मृतकों में दो बच्‍चों के साथ ही दो महिलाएं और एक पुरुष भी शामिल है. वहीं इस हादसे में घायल एक शख्‍स को बहराइच के अस्‍पताल में रैफर किया गया है. 

पुलिस ने बताया कि कार में सवार सभी लोग नेपालगंज के रहने वाले थे और किसी काम से यहां पर आए थे. 

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Actress Ileana D'Cruz welcomes baby boy, shares pictures on Instagram

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मुंबई: बंदूक की नोक पर आभूषण की दुकान में लूटपाट करने वाला आरोपी गिरफ्तार

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मुंबई: बंदूक दिखाकर ज्वेलरी शॉप में लूटपाट करने आए एक शख्स को मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच की यूनिट 9 ने गिरफ्तार किया है. वारदात 2 अगस्त को  बांद्रा के एक ज्वेलरी शॉप की है. लूटपाट की यह घटना ज्वैलरी शॉप में लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई थी. गिरफ्तार आरोपी का नाम रियाज अहमद अब्दुल गनी है, जो जम्मू-कश्मीर का रहने वाला है.

CCTV फुटेज में दिख रहा है कि कैसे आरोपी रेनकोट पहनकर दुकान में घुस रहा है और फिर बंदूक निकालकर महिला को धमकाने की कोशिश कर रहा है. दुकान में दो महिलाओं को धमकाता है. लेकिन एक महिला डरकर दुकान से बाहर भागती है तो आरोपी भी डर जाता है. फिर लूटेरा भी मौके से भाग जाता है. वीडियो को देखने से लगता है कि लूटेरा लूटपाट की घटना में सफल नहीं पाता है.

गिरफ्तार आरोपी ने पांच लाख की फिरौती भी मांगी थी. क्राइम ब्रांच 9 के अधिकारियों ने तकनीकी जानकारी की मदद से आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है और इस मामले में आगे की जांच कर रही है.

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Anti-terror agency arrests sixth accused in Maharashtra ISIS module case

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Friday, August 4, 2023

Samudrayaan: Indian submersible to go beyond Oceangate's Titan

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"आप जंग का ऐलान करेंगे तो मैं भी..." TDP कार्यकर्ताओं पर लाठीचार्ज से नाराज चंद्रबाबू नायडू ने चेताया

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आंध्र प्रदेश में तेलुगू देशम पार्टी (TDP) प्रमुख एन चंद्रबाबू नायडू (Chandrababu Naidu) की एक कथित आपत्तिजनक टिप्पणी से शुक्रवार को सत्तारूढ़ YSR कांग्रेस पार्टी और टीडीपी कार्यकर्ताओं के बीच झड़प हो गई. 
YSR कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने चंद्रबाबू नायडू के काफिले को रोक दिया. आगजनी और पत्थरबाजी की. इस झड़प में
कम से कम 20 पुलिसकर्मी और दोनों पार्टियों के कई कार्यकर्ता घायल हो गए हैं.

शुक्रवार की झड़प के बाद आक्रामक रुख अपनाते हुए चंद्रबाबू नायडू ने कहा, "अगर आप लाठियां लेकर आएंगे, तो मैं भी लाठियां लेकर आऊंगा. अगर आप युद्ध की घोषणा करेंगे, तो मैं भी जंग का ऐलान करूंगा. मेरे कार्यकर्ताओं के शरीर से बहे खून को देखकर लगता है जैसा मेरा खून बहाया जा रहा हो. आप ऐसी हिंसा का सहारा क्यों ले रहे हैं?"

चंद्रबाबू ने पूछा, 'क्या मैं बम से लड़ने वाला व्यक्ति हूं. अगर हिम्मत है तो सामने आएं. मेरा जन्म चित्तूर जिले में हुआ. मैंने चित्तूर जिले में राजनीति की, लेकिन ऐसी राजनीति कभी नहीं देखी.'

दरअसल, TDP सु्प्रीमो चंद्रबाबू नायडू शुक्रवार को अन्नामैया जिले के पुंगनूर में परियोजनाओं का दौरा करने जा रहे थे. YSR कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने चंद्रबाबू नायडू का स्वागत करने जा रहे TDP कार्यकर्ताओं पर हमला कर दिया. उनकी गाड़ियों के शीशे तोड़ दिए. इसके बाद पुलिस ने टीडीपी कार्यकर्ताओं पर लाठीचार्ज कर दिया. दोनों पार्टियों के कार्यकर्ताओं के बवाल के कारण अंगल्लू गांव में स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई.

घटनास्थल का एक वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया जा रहा है. फुटेज में देखा जा सकता है कि भीड़ ने बख्तरबंद वाहनों सहित कई गाड़ियों को गिरा दिया और आग के हवाले कर दिया. पिछले हफ्ते भी दोनों पार्टियों के कार्यकर्ताओं के बीच झड़प हुई थी.

कार्यकर्ताओं के बीच यह लड़ाई तब भड़की, जब नायडू अगले साल राज्य में विधानसभा चुनाव से पहले अपने जनसंपर्क अभियान के तहत राज्य के विभिन्न जिलों का दौरा कर रहे थे. शुक्रवार सुबह अन्नामय्या जिले के मुलकालचेरुवु गांव में एक रैली को संबोधित करते हुए उन्होंने थम्बालापल्ले विधायक पीडी रेड्डी के खिलाफ तीखी टिप्पणी की. नायडू ने कथित तौर पर उन्हें 'रावण' कहा. इसके बाद YSR कांग्रेस ने हंगामा शुरू कर दिया.

चित्तूर के पुलिस अधीक्षक (एसपी) रिशांत रेड्डी ने कहा, "पुंगनूर के रास्ते में पथराव, आगजनी और पुलिस पर हमले की घटना सामने आई. इन घटनाओं में जहां एक सब-इंस्पेक्टर समेत 20 से ज्यादा पुलिस कर्मियों पर हमला किया गया. पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने और स्थिति को नियंत्रित करने के लिए लाठीचार्ज किया. आंसू गैस के गोले भी छोड़े गए."

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Footballer killed by crocodile while cooling off in river

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Thursday, August 3, 2023

India summons German envoy seeking return of baby Ariha

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हरियाणा हिंसा: सरकार ने सोशल मीडिया मंच पर निगरानी के लिए गठित की समिति

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हरियाणा सरकार ने एक समिति का गठन किया है जो राज्य में कानून-व्यवस्था और सांप्रदायिक सद्भाव बनाए रखने के लिए वीडियो, तस्वीरों और नफरत फैलाने वाले भाषणों सहित उत्तेजक सामग्री के प्रसार को रोकने के वास्ते सोशल मीडिया मंचों की निगरानी करेगी. समिति का गठन नूंह में सांप्रदायिक हिंसा के मद्देनजर किया गया है. अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) टी वी एस एन प्रसाद द्वारा बृहस्पतिवार को जारी एक आदेश के अनुसार, समिति ‘‘इस संबंध में उपचारात्मक/सुधारात्मक उपाय'' करने के लिए सभी संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय करेगी. विशेष सचिव, गृह समिति के अध्यक्ष होंगे. एक पुलिस अधीक्षक, अपराध जांच विभाग (सीआईडी), हरियाणा; उप सचिव, सूचना प्रौद्योगिकी और गृह विभाग के एसीएस कार्यालय के एक ‘इंटरसेप्शन' सहायक इसके सदस्य होंगे.

कुछ दिन पहले विश्व हिंदू परिषद की जलाभिषेक यात्रा को रोकने की कोशिश को लेकर नूंह में भड़की झड़पें गुरुग्राम तक फैल गईं. इन झड़पों में दो होम गार्ड और एक मौलवी समेत छह लोगों की मौत हो गई है. हरियाणा के गृह मंत्री अनिल विज ने बुधवार को कहा कि नूंह में हिंसा को बढ़ावा देने में सोशल मीडिया ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है.

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"BJP कभी दिल्ली को पूर्ण राज्य के दर्जे की थी समर्थक" : दिल्ली सेवा बिल पर AAP नेता राघव चड्ढा

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आम आदमी पार्टी (आप) के सांसद राघव चड्ढा ने गुरुवार को लोकसभा में दिल्ली सेवा विधेयक के पारित होने को "भारतीय लोकतंत्र के लिए एक काला क्षण" बताया है.चड्ढा ने ट्वीट किया कि "लोकसभा में दिल्ली अध्यादेश विधेयक का पारित होना भारतीय लोकतंत्र के लिए एक काला क्षण है. भाजपा, जो कभी दिल्ली के राज्य के दर्जे की समर्थक थी, ने लोगों और अपने ही नेताओं को धोखा दिया है. यह हमारे नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकारों को कमजोर करता है. यह शर्मनाक कृत्य, लोगों की इच्छा की अवहेलना और हमारे संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों का अपमान है."

गौरतलब है कि दिल्ली सेवा संबंधी विधेयक लोकसभा में पारित होने के बाद मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने बृहस्पतिवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर राष्ट्रीय राजधानी के लोगों की पीठ में छुरा घोंपने का आरोप लगाया. दिल्ली में वरिष्ठ अधिकारियों के तबादले और पदस्थापना से संबंधित दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र शासन संशोधन विधेयक 2023 को लोकसभा ने पारित कर दिया.

केजरीवाल ने साधा निशाना

विधेयक पर केजरीवाल ने भाजपा और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर जमकर निशाना साधा और लोगों से आग्रह किया कि वे प्रधानमंत्री की किसी भी बात पर विश्वास न करें. केजरीवाल ने कहा, ‘‘भाजपा ने हमेशा दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा देने का वादा किया. 2014 में मोदी ने कहा था कि प्रधानमंत्री बनने पर वह दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा देंगे. लेकिन आज इन लोगों ने दिल्ली के लोगों की पीठ में छुरा घोंपा है. आगे से मोदी जी की किसी भी बात पर विश्वास मत करना.''

लोकसभा में 4 घंटे तक चली बहस

करीब चार घंटे की बहस के बाद दिल्ली सेवा विधेयक पारित हो गया. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने विधेयक पर चर्चा का जवाब दिया. शाह ने स्पष्ट किया कि केंद्र शासित प्रदेशों पर कानून बनाने की शक्ति केंद्र सरकार के पास है और केंद्रशासित प्रदेश होने के नाते केंद्र को नियम बनाने का भी पूरा अधिकार है. विधेयक पर लोकसभा में चर्चा की शुरुआत करते हुए शाह ने कहा कि भाजपा और कांग्रेस ने बिना किसी टकराव के लंबे समय तक दिल्ली में शासन किया, लेकिन समस्याएं 2015 में उस वक्त पैदा हुईं जब एक सरकार आई जिसका मकसद सेवा करना नहीं, बल्कि झगड़ा करना है.

केजरीवाल ने विधेयक पेश होने के बाद अपनी पहली प्रतिक्रिया में कहा कि यह दिल्ली के लोगों को गुलाम बनाने वाला विधेयक है. उन्होंने एक ट्वीट में कहा, ‘‘आज लोकसभा में अमित शाह जी को दिल्ली वालों के अधिकार छीनने वाले विधेयक पर बोलते सुना. विधेयक का समर्थन करने के लिए उनके पास एक भी वाजिब तर्क नहीं है. बस इधर-उधर की फ़ालतू बातें कर रहे थे. वह भी जानते हैं, वह गलत कर रहे हैं.''

मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘यह दिल्ली के लोगों को गुलाम बनाने वाला विधेयक है. उन्हें बेबस और लाचार बनाने वाला विधेयक है. ‘इंडिया' ऐसा कभी नहीं होने देगा.'' आम आदमी पार्टी (आप) के नेतृत्व वाली दिल्ली सरकार का राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र प्रशासन में ग्रुप-ए अधिकारियों के नियंत्रण को लेकर केंद्र के साथ टकराव है. केंद्र ने मई में दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र शासन (संशोधन) अध्यादेश, 2023 जारी किया था, जिसने दिल्ली में ‘‘सेवाओं'' का नियंत्रण दिल्ली सरकार को सौंपने के उच्चतम न्यायालय के फैसले को पलट दिया था.

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WI vs IND: India lose in their 200th T20I as West Indies secure 4-run win

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Wednesday, August 2, 2023

मुंबई : पत्रकार की पिटाई करने के आरोप में दो ऑटोरिक्शा चालक गिरफ्तार

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मुंबई में एक यूट्यूब समाचार चैनल के पत्रकार की पिटाई करने के आरोप में दो ऑटोरिक्शा चालकों को गिरफ्तार किया गया है. पुलिस ने यह जानकारी दी. पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि घटना मंगलवार रात बांद्रा-कुर्ला कॉम्पलेक्स (बीकेसी) इलाके में हुई थी. पुलिस ने बताया कि 48 वर्षीय पत्रकार ने एक ऑटोरिक्शा चालक से उसे और उसके सहयोगी को कुर्ला रेलवे स्टेशन छोड़ने के लिए कहा. इसपर ऑटोरिक्शा चालक ने कहा कि उन्हें सीट साझा करने के आधार पर पैसे देने होंगे, न कि मीटर के हिसाब से.

पुलिस के मुताबिक, इस बात को लेकर दोनों (पत्रकार और ऑटोरिक्शा चालक) पक्षों के बीच बहस हो गई और पत्रकार ने ऑटो चालक को पास के बीकेसी पुलिस थाने ले जाने को कहा. पुलिस ने प्राथमिकी के हवाले से बताया कि चालक, पत्रकार को पुलिस थाने के समीप एक स्थान पर ले गया, जहां उसने अपने दोस्त और दूसरे ऑटोरिक्शा चालक को फोन कर बुला लिया. पुलिस के मुताबिक, दोनों आरोपियों ने पत्रकार की कथित रूप से पिटाई की.

पुलिस के मुताबिक, पत्रकार के शिकायत दर्ज कराने के बाद आरोपियों को पास के भरत नगर इलाके से गिरफ्तार कर लिया गया और उसके खिलाफ भारतीय दंड संहिता तथा मोटर वाहन अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है. अधिकारी ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है.

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Cheetah deaths: 2 of 4 experts say never consented to letter to Supreme Court

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हरियाणा हिंसा : केंद्रीय बलों की 20 कंपनी तैनात, मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने केंद्र से चार और कंपनी मांगी

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हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने राज्य में सांप्रदायिक हिंसा के मद्देनजर बुधवार को केंद्रीय बलों की चार और कंपनी मांगी तथा कहा कि आईआरबी (इंडियन रिजर्व बटालियन) की एक बटालियन भी नूंह में तैनात की जाएगी. खट्टर  उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला के उस दावे से भी असहमत नजर आए, जिसमें चौटाला ने कहा है कि नूंह में धार्मिक शोभायात्रा के आयोजकों ने जिला प्रशासन को संभावित भीड़ की सही जानकारी नहीं दी थी. चौटाला के दावे के बारे में पूछे जाने पर खट्टर ने कहा कि ऐसा नहीं है.

उन्होंने कहा, ‘‘जब शोभायात्रा की सूचना मिली तो एक दिन पहले उपायुक्त ने दोनों पक्षों के साथ बैठक की. प्रशासन को आश्वासन दिया गया कि कार्यक्रम शांतिपूर्ण तरीके से होगा. लेकिन, अचानक घटनाएं हुईं, जिसकी जांच की जा रही है.'' जननायक जनता पार्टी (जजपा) नेता चौटाला ने मंगलवार को संवाददाताओं से कहा था, ‘‘...आयोजकों ने जिला प्रशासन को जुलूस में जुटने वाली संभावित भीड़ की सही जानकारी नहीं दी थी. ऐसा प्रतीत होता है कि इस सूचना की कमी या अन्य कारण से हिंसा की स्थिति उत्पन्न हुई.'' हालांकि, अपने गठबंधन सहयोगी के दावे से असहमति जताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘ऐसा नहीं है.''

हाल के महीनों में दोनों सहयोगियों के बीच मतभेद के संकेत मिले हैं. मुख्यमंत्री ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि केंद्रीय बलों की 20 कंपनी पहले से ही हरियाणा में तैनात हैं, जिनमें से 14 नूंह में, तीन पलवल में, दो गुरुग्राम में और एक फरीदाबाद में तैनात है. विश्व हिंदू परिषद की शोभायात्रा को रोकने की कोशिश को लेकर नूंह में भड़की हिंसा-जो पिछले दो दिनों में गुरुग्राम तक फैल गई- में दो होम गार्ड और एक मौलवी सहित छह लोगों की मौत हो गई है. शांति की अपील करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि हिंसा के लिए जिम्मेदार लोगों को बख्शा नहीं जाएगा.

खट्टर ने कहा कि नूंह में सोमवार को हुई हिंसा के बाद से अब तक छह लोगों की मौत हो चुकी है और 116 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि 90 लोगों को हिरासत में लिया गया है. खट्टर ने कहा कि नूंह में गोरक्षा एक बड़ा मुद्दा है. उन्होंने कहा, ‘‘वहां (गाय की) तस्करी और गोहत्या होती है.'' उन्होंने कहा कि राज्य पुलिस के प्रवर्तन ब्यूरो के 100 जवानों को गायों की रक्षा के लिए तैनात किया जाएगा. खट्टर ने मुस्लिम समुदाय के युवाओं से भी गोरक्षा के लिए आगे आने की अपील की. उन्होंने कहा, ‘‘ऐसे कई मुस्लिम हैं जो गोरक्षा के लिए आवाज उठाते हैं और इसके लिए काम करते हैं.''

संपत्ति को नुकसान पहुंचने से जुड़े सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि जिस किसी ने भी सरकारी या निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया है, उसे इसकी भरपाई करनी होगी. उन्होंने कहा कि हरियाणा ने पहले ही इस संबंध में एक कानून बनाया है. मोनू मानेसर के बारे में पूछे जाने पर खट्टर ने कहा कि उस पर राजस्थान पुलिस ने मामला दर्ज किया है. खट्टर ने कहा कि हरियाणा सरकार मोनू मानेसर को पकड़ने के लिए हरसंभव सहायता प्रदान करेगी. गोरक्षक मोनू मानेसर के खिलाफ राजस्थान पुलिस ने दो मुस्लिम युवकों की हत्या के सिलसिले में मामला दर्ज किया था, जिनके झुलसे हुए शव फरवरी में हरियाणा के भिवानी जिले में पाए गए थे. खट्टर ने कहा, ‘‘राजस्थान पुलिस मोनू मानेसर की तलाश कर रही है. हमारे पास कोई जानकारी नहीं है कि वह अब कहां है. राजस्थान पुलिस उसके खिलाफ कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र है.''

मोनू मानेसर ने वीडियो जारी कर नूंह में बृज मंडल जलाभिषेक यात्रा में शामिल होने की बात कही थी. एक सवाल पर खट्टर ने कहा कि नूंह की घटना के दिन मोनू मानेसर की मौजूदगी का कोई मुद्दा नहीं है. उन्होंने कहा कि कई अफवाहें भी फैलाई जाती हैं जिससे माहौल खराब होता है. खट्टर ने कहा कि पुलिस हिंसा में शामिल लोगों की पहचान करने के लिए ‘मोबाइल डंप डेटा' की जांच कर रही है और सीसीटीवी फुटेज भी खंगाल रही है. केंद्रीय मंत्री और गुरुग्राम के सांसद राव इंद्रजीत सिंह ने कहा है कि किसी धार्मिक यात्रा में भाग लेने वालों के लिए तलवारें और लाठियां ले जाना सही नहीं है.

सिंह की टिप्पणी से जुड़े सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘मुझे जानकारी नहीं है कि उन्होंने किस आधार पर ऐसा बयान दिया है.'' बुधवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात के बाद पत्रकारों से बात करते हुए सांसद ने दंगे के वीडियो का हवाला देते हुए कहा कि दोनों समुदायों (हिंदू और मुस्लिम) के पास हथियार थे. खट्टर ने कहा कि सोशल मीडिया पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है और नफरत फैलाने वाले भाषण देने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी.

कुछ लोगों द्वारा नूंह से पलायन करने का विचार किए जाने से जुड़े सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी नागरिकों को सुरक्षा प्रदान करना राज्य सरकार की जिम्मेदारी है. उन्होंने कहा, ‘‘हम सभी से वहां शांति से रहने और भाईचारा बनाए रखने की अपील करते हैं.''

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कनाडा के PM जस्टिन ट्रूडो ने पत्नी से अलग होने का किया ऐलान, 18 साल बाद खत्म होगी शादी

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कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो और उनकी पत्नी सोफी अलग हो रहे हैं. ट्रूडो ने बुधवार को इसका ऐलान किया. कनाडाई पीएम जस्टिन ट्रूडो के ऑफिस ने बयान जारी किया कि ट्रूडो और उनकी पत्नी ने एक कानूनी समझौते पर साइन कर दिए हैं. कपल ने 18 साल बाद अपनी शादी को खत्म करने का ऐलान किया है.

समाचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक कनाडाई पीएम के ऑफिस ने बयान में कहा, "उन्होंने अलग होने के उनके फैसले के संबंध में सभी कानूनी और नैतिक कदम उठाए हैं. आगे भी ऐसा करना जारी रखेंगे." 51 साल के जस्टिन ट्रूडो और 48 वर्षीय सोफी की शादी मई 2005 के अंत में हुई थी. उनके तीन बच्चे हैं.

बयान में कहा गया, "वे एक करीबी परिवार बने हुए हैं. सोफी और प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो अपने बच्चों को सुरक्षित, प्रेमपूर्ण और सहयोगात्मक माहौल में पालने पर फोकस कर रहे हैं. अगले सप्ताह से ट्रूडो परिवार छुट्टियों पर रहेगा."

जस्टिन ट्रूडो और सोफी की लव स्टोरी भी काफी दिलचस्प रही है. सोफी दरअसल, ट्रूडो के छोटे भाई माइकल ट्रूडो की गर्लफ्रेंड थीं. दोनों बचपन से एक दूसरे को जानते थे. स्कूल में साथ पढ़ते थे. सोफी ने एक इंटरव्यू में जस्टिन ट्रूडो के साथ रिश्ते के बारे में बताया था. सोफी ने कहा था कि 1998 में एक लैंडस्लाइड में माइकल की मौत हो गई थी. फिर सालों तक सोफी और जस्टिन ट्रूडो की बात नहीं हुई.

2003 में एक चैरिटी शो के दौरान दोनों की मुलाकात हुई. इस दौरान सोफी ने ट्रूडो के लिए अट्रैक्शन महसूस किया. लेकिन उन्होंने आगे बात नहीं की. इसके बाद खुद ट्रूडो ने सोफी का मोबाइल नंबर पता किया और उन्हें डेट पर बुलाया और शादी के लिए प्रपोज किया. 2005 में दोनों ने शादी कर ली. 2015 में ट्रूडो पहली बार कनाडा के पीएम बने. 

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मानहानि मामला: राहुल गांधी ने माफी मांगने से फिर किया इनकार, 4 अगस्त को SC में होगी सुनवाई

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कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मोदी उपनाम वाली अपनी टिप्पणी के लिए माफी मांगने से एक बार फिर इनकार कर दिया है, जिसके कारण उन्हें संसद की सदस्यता से अयोग्य करार दिया गया था. गांधी ने हालांकि उच्चतम न्यायालय से अपनी टिप्पणी से उत्पन्न आपराधिक मानहानि मामले में अपनी सजा पर रोक लगाने का आग्रह किया और इस बात पर जोर दिया कि वह दोषी नहीं हैं. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता एवं गुजरात के पूर्व मंत्री पूर्णेश मोदी ने 2019 में गांधी के खिलाफ उनकी इस टिप्पणी को लेकर आपराधिक मानहानि का मामला दायर किया था कि ‘‘सभी चोरों का उपनाम मोदी क्यों है?'' उक्त टिप्पणी गांधी ने 13 अप्रैल, 2019 को कर्नाटक के कोलार में एक चुनावी रैली के दौरान की थी.

शीर्ष अदालत के समक्ष दायर एक हलफनामे में, गांधी ने कहा कि मोदी ने अपने जवाब में उनके लिए 'अहंकारी' जैसे 'निंदात्मक' शब्दों का इस्तेमाल केवल इसलिए किया क्योंकि उन्होंने माफी मांगने से इनकार कर दिया है. गांधी ने अपने हलफनामे में कहा, ‘‘याचिकाकर्ता को बिना किसी गलती के माफी मांगने के लिए मजबूर करने के लिए आपराधिक प्रक्रिया और जन प्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत प्रभावों का उपयोग करना न्यायिक प्रक्रिया का घोर दुरुपयोग है और इस न्यायालय द्वारा इसे स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए.''

गांधी ने हलफनामे में कहा, ‘‘याचिकाकर्ता का कहना है और उसने हमेशा कहा है कि वह अपराध का दोषी नहीं है और दोषसिद्धि टिकाऊ नहीं है और अगर उसे माफी मांगनी होती और समझौता करना होता, तो वह बहुत पहले ही ऐसा कर चुके होते.'' केरल के वायनाड से सांसद के रूप में अयोग्य ठहराये गए राहुल गांधी ने कहा कि उनका मामला 'असाधारण' है, क्योंकि अपराध 'मामूली' है और एक सांसद के तौर पर अयोग्य ठहराए जाने से उन्हें अपूरणीय क्षति हुई है.

उन्होंने हलफनामे में कहा, ‘‘इसलिए प्रार्थना की जाती है कि राहुल गांधी की सजा पर रोक लगाई जाए, जिससे वह लोकसभा की चल रही बैठकों और उसके बाद के सत्रों में हिस्सा ले सकें.'' उन्होंने दावा किया कि रिकॉर्ड में 'मोदी' नाम का कोई समुदाय या 'समाज' नहीं है और इसलिए, समग्र रूप से मोदी समुदाय को बदनाम करने का अपराध नहीं बनता है. हलफनामे में कहा गया है, ‘‘रिकॉर्ड में कोई मोदी समाज या समुदाय नहीं है और केवल मोदी वणिका समाज या मोध घांची समाज ही अस्तित्व में है... उन्होंने (शिकायतकर्ता) ने यह भी स्वीकार किया है कि मोदी उपनाम विभिन्न अन्य जातियों के अंतर्गत आता है. यह भी स्वीकारोक्ति है कि नीरव मोदी, ललित मोदी और मेहुल चोकसी सभी एक ही जाति में नहीं आते.''

इससे पहले, पूर्णेश मोदी ने उच्चतम न्यायालय से राहुल गांधी की उस अपील को खारिज करने का सोमवार को आग्रह किया था, जिसमें कांग्रेस नेता ने आपराधिक मानहानि के एक मामले में अपनी दोषसिद्धि पर रोक लगाने का आग्रह किया है. पूर्णेश मोदी ने कहा था कि गांधी ने मोदी उपनाम वाले सभी लोगों को खासकर गुजरात के ‘मोध वणिक' जाति से संबंधित लोगों का अपमान किया है.

शीर्ष अदालत ने 21 जून को गांधी की अपील पर मोदी और राज्य सरकार से जवाब मांगा था. गांधी ने 15 जुलाई को दायर अपनी अपील में कहा है कि यदि सात जुलाई के फैसले पर रोक नहीं लगाई गई, तो इससे बोलने, अभिव्यक्ति, विचार और बयान की स्वतंत्रता का गला घोंट दिया जाएगा. कांग्रेस नेता को 24 मार्च को संसद के सदस्य के रूप में अयोग्य घोषित कर दिया गया था जब गुजरात की एक अदालत ने उन्हें मोदी उपनाम टिप्पणी के लिए आपराधिक मानहानि मामले में दोषी ठहराया और दो साल की सजा सुनाई थी.

उच्च न्यायालय ने दोषसिद्धि पर रोक लगाने के अनुरोध वाली उनकी याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी थी कि 'राजनीति में शुचिता' समय की मांग है. गांधी की दोषसिद्धि पर रोक से लोकसभा सदस्य के रूप में उनकी बहाली का मार्ग प्रशस्त हो सकता था, लेकिन वह सत्र अदालत या गुजरात उच्च न्यायालय से कोई राहत पाने में विफल रहे है.

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Nuh Violence: नूंह में क्यों फेल हुई हरियाणा सरकार? हिंसा को रोकने में पुलिस से कहां हुई चूक?

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हरियाणा के नूंह (Nuh Violence) में सोमवार को भड़की सांप्रदायिक हिंसा में अब तक 6 की मौत हो चुकी है. कानून-व्यवस्था को लेकर सरकार और प्रशासन पर लगातार सवाल उठ रहे हैं. हिंसा को लेकर पुलिस ने अब तक 26 एफआईआर दर्ज की है. 116 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है. इस बीच मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर (Manohar Lal Khattar) ने कहा कि हिंसा में शामिल किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा. उन्होंने कहा कि हिंसा में हुए नुकसान की भरपाई दंगाइयों से करेंगे. नूंह में भड़की हिंसा को लेकर हरियाणा की मनोहर लाल खट्टर सरकार पर सवाल भी खड़े हो रहे हैं. 

NDTV की एक रिपोर्ट में हरियाणा के शीर्ष अधिकारियों ने भी माना कि नूंह में पुलिस और प्रशासन हालात को भांपने में नाकाम रहा. उन्होंने कहा कि इतने बड़े पैमाने पर हिंसा कैसे हुई? यह पता लगाने के लिए अभी भी जांच चल रही है. पुलिस हिंसा के लिए उपद्रवियों द्वारा फैलाई गई अफवाहों को जिम्मेदार ठहराती है.

आइए जानते हैं नूंह हिंसा में आखिर सीएम खट्टर सरकार से कहां हुई चूक और उठ रहे कौन से सवाल:-
 

1. जिस दिन हिंसा हुई, उस दिन नूंह के एसपी छुट्टी पर थे. पलवल के एसपी को अतिरिक्त प्रभार दिया गया था. क्या पलवल के एसपी पहले से नूंह में मौजूद थे या वो हिंसा के बाद वहां पहुंचे? ये अभी साफ नहीं हो पाया है.
 
2. जब मोनू मानेसर का एक वीडियो पहले से ही सोशल मीडिया पर चल रहा था, जिसमें वो कह रहा था कि वो नूंह आएगा. ऐसे में सवाल है कि बृज मंडल जलाभिषेक यात्रा के रास्ते पर पुलिस की पहले से ही पर्याप्त तैनाती क्यों नहीं की गई?

3. क्या प्रशासन को पहले से सोमवार के तनाव का अंदाज़ा नहीं हो पाया था. जबकि ये बात सामने आ रही है कि भीड़ में कई लोग पत्थर और हथियार लेकर पहुंचे हुए थे, तभी तो शोभायात्रा पर पत्थरबाज़ी हुई. ऐसे में क्या इसे खुफिया विभाग की नाकामी नहीं मानी जानी चाहिए?
 
4. हरियाणा के नूंह में तैनाती को लेकर आईएएस और आईपीएस अधिकारियों के बीच ये धारणा है कि उन्हें मेवात की ज़िम्मेदारी देकर मुख्य धारा से किनारे कर दिया गया है. कुछ अधिकारियों की यह भी शिकायत रहती है कि उन्हें पनिशमेंट पोस्टिंग दी गई है. इसलिए ये कहा जाता है कि कई अधिकारी वहां तैनाती को बहुत गंभीरता से नहीं लेते. 
अगर ऐसा है, तो ये पुलिस प्रशासन की भूमिका पर बड़ा सवालिया निशान लगाता है.

5. हरियाणा के उप-मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने बयान दिया है कि उनके प्रशासन को अंदाजा नहीं था कि शोभायात्रा में इतनी भीड़ जुटेगी. सवाल ये है कि प्रशासन को शोभायात्रा में कितने लोग आएंगे, इसकी जानकारी क्या वाकई नहीं दी गई थी?

6. सवाल इस बात का है कि अगर इतने पुलिसकर्मी थे, तो उनका किस इलाके में मोबिलाइजेशन हुआ? सोशल मीडिया पर चल रहे मैसेज और सावन के महीने को देखते हुए क्या अतिरिक्त सतर्कता बरतने की जरूरत नहीं थी? 

एसपी के छुट्टी पर होने से क्या होनी चाहिए व्यवस्था?
जब किसी जिले का एसपी छुट्टी पर हो, तो जिले में क्या व्यवस्था होनी चाहिए? इस सवाल के जवाब में यूपी के पूर्व डीजीपी विक्रम सिंह ने कहा, "ऐसे संवेदनशील प्रकरणों के पहले, जहां मालूम है कि समस्या उत्पन्न होने की प्रबल संभावना है... जब तक कि जिंदगी और मौत का मामला न हो, पुलिस अधिकारियों की छुट्टी निरस्त कर दी जाती है. ऐसे मामलों में अधिकारी छुट्टी पर नहीं जा सकते और न उन्हें जाना चाहिए. अगर इसके बाद भी अधिकारी या एसपी छुट्टी पर गए हैं, तो उनके लिंक अफसर की पूरी जिम्मेदारी बनती है."

हरियाणा में क्या हैं ताजा हालात?
तनावपूर्ण हालात को देखते हुए नूंह, फरीदाबाद, पलवल और गुरुग्राम में मानेसर, पटोदी व सोहना इलाके में 5 अगस्त की आधी रात तक इंटरनेट बंद कर दिया गया है. नूंह में सोमवार को भड़की हिंसा के दो दिन बाद भी कर्फ्यू जारी है. गुरुग्राम, पलवल जिले में तनाव का माहौल है. हरियाणा में पुलिस की 30 कंपनियां और केंद्रीय सुरक्षा बलों की 20 कंपनियों को तैनात किया गया है. सेंट्रल फोर्स की गुरुग्राम में 2 और नूंह में 14 कंपनियां लगाई गई हैं. दिल्ली और राजस्थान के भरतपुर में भी अलर्ट जारी किया गया है.



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Swords at Nuh rally were for puja: Cow vigilante Bittu Bajrangi to India Today

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Tuesday, August 1, 2023

नंदिनी दूध पर कर्नाटक की राजनीति में फिर से 'उबाल', अब दिया गया धार्मिक रंग

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कर्नाटक में नंदिनी दूध के जिस मुद्दे पर कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी को घेरा था और अमूल ब्रांड के प्रदेश में लाने से स्थानीय नंदिनी डेयरी ब्रांड को खत्म करने की साजिश का आरोप लगाया था, बीजेपी अब उसी मुद्दे पर कांग्रेस पर हमलावार है. बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष नलिन कुमार कतील ने कांग्रेस पर हिंदू मान्यताओं और भक्ति के प्रति उदासीनता के कारण तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (टीटीडी) को नंदिनी घी की आपूर्ति रोकने का आरोप लगाया है. टीटीडी विश्व प्रसिद्ध तिरूपति लड्डू बनाने के लिए घी का टेंडर जारी करता है, जो भक्तों को प्रसाद के रूप में दिया जाता है.

पार्टी नेता सीटी रवि ने यह भी दावा किया है कि राज्य सरकार ने नंदिनी दूध की कीमत बढ़ाकर कर्नाटक मिल्क फेडरेशन (केएमएफ), जो इस ब्रांड का मालिक है, उसको बोली की प्रक्रिया से दूर कर दिया है.

हालांकि, कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कहा है कि टीटीडी को नंदिनी घी की आपूर्ति पिछले डेढ़ साल से नहीं हुई है और कतील से पूछा कि क्या भाजपा, जो उस समय सत्ता में थी, 'हिन्दू भक्ति विरोधी' है.

मुख्यमंत्री के दावे की पुष्टि केएमएफ के अधिकारियों ने भी की. उन्होंने कहा कि आखिरी बार आंध्र प्रदेश में मंदिर को नंदिनी घी की आपूर्ति 2021 में की गई थी. उन्होंने यह भी कहा कि आखिरी निविदा प्रक्रिया इस साल मार्च में हुई थी, जब बीजेपी सरकार सत्ता में थी.

एक ट्वीट में, कतील ने मीडिया रिपोर्ट का हवाला दिया था और कांग्रेस सरकार पर तिरुपति लड्डू के लिए केएमएफ से घी की आपूर्ति रोकने का आरोप लगाया था.

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ट्वीट में कहा गया, "मंदिर और हिंदू मान्यताओं और भक्ति के प्रति कर्नाटक कांग्रेस की उदासीनता की नीति के कारण तिरूपति के लड्डुओं के लिए नंदिनी घी की आपूर्ति बंद कर दी गई है. तिरूपति के साथ 50 साल की विरासत खत्म हो गई है और यह सिद्धारमैया की हिंदुओं के प्रति उदासीनता की नीति को साबित करता है."

पिछले हफ्ते, कर्नाटक कैबिनेट ने केएमएफ को 1 अगस्त से नंदिनी दूध की कीमत ₹3 प्रति लीटर बढ़ाने की अनुमति दी थी. भाजपा नेता सीटी रवि ने कहा कि इससे नंदिनी के लिए टीटीडी को पहले की कीमत पर दूध की आपूर्ति करना असंभव हो गया.

रवि ने ट्वीट किया, "कांग्रेस ने विधानसभा चुनावों के दौरान नंदिनी मुद्दे का बेशर्मी से राजनीतिकरण किया और अमूल को बदनाम करने के लिए इसका इस्तेमाल किया. अक्षम कांग्रेस सरकार को धन्यवाद, नंदिनी अब प्रसिद्ध तिरूपति लड्डू तैयार करने के लिए घी की आपूर्ति नहीं करेगी. यह बहुत स्पष्ट है कि कांग्रेस इसे नष्ट करने पर तुली हुई है."

वहीं बीजेपी पर निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री ने ट्वीट किया, ''आंध्र प्रदेश के तिरूपति को नंदिनी घी की आपूर्ति आज या कल नहीं रोकी गई है. तिरूपति को घी की आपूर्ति डेढ़ साल पहले निलंबित कर दी गई थी. जब बीजेपी की सरका थी.''

सिद्धारमैया ने पूछा, "माननीय सांसद @nalinkateel, अब मुझे बताएं, क्या पिछली भाजपा सरकार हिंदू धार्मिक मान्यताओं और भक्ति के खिलाफ थी? या केवल तत्कालीन मुख्यमंत्री @BSBommai (बसवराज बोम्मई) हिंदू विरोधी थे."

उन्होंने कहा, "लोगों की धार्मिक आस्था के साथ-साथ डेयरी किसानों का जीवन भी हमारे लिए महत्वपूर्ण है. इसलिए, यदि राज्य के किसानों के हित में, अगर तिरूपति मंदिर हमारे द्वारा मांगी गई कीमत देने के लिए सहमत हो जाता है, तो हमें घी की आपूर्ति करने में कोई समस्या नहीं है."

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केएमएफ के अध्यक्ष भीमा नायक ने कहा कि नंदिनी ब्रांड अपनी गुणवत्ता के लिए जाना जाता है और कीमत पर कोई समझौता नहीं कर सकता. इसीलिए संगठन ने निविदा प्रक्रिया से बाहर रहने का विकल्प चुना है.

केएमएफ के वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा कि निविदा प्रक्रिया हर छह महीने में होती है और आखिरी बार इस साल मार्च में आयोजित की गई थी. उन्होंने कहा कि अगस्त में मूल्य वृद्धि से मार्च में निविदा प्रक्रिया पर कोई असर नहीं पड़ेगा.

अधिकारियों ने कहा कि केएमएफ ने 2005 में टीटीडी को नंदिनी घी की आपूर्ति शुरू की थी और आखिरी बार इसकी बोली आंशिक रूप से 2021 में सफल रही थी, जब बातचीत के बाद इसे आपूर्ति अनुबंध का 35% हिस्सा मिला था. एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, "2022 में बोली लगाई गई थी, लेकिन यह सफल नहीं रही. हमने 2023 में बोली नहीं लगाई."

टीटीडी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी, धर्मा रेड्डी ने कहा कि केएमएफ ने मार्च 2023 में पिछली नीलामी में भाग नहीं लिया था. उन्होंने यह भी कहा कि लड्डू के लिए घी सहित सभी वस्तुएं ई-टेंडर के माध्यम से खरीदी जाती हैं और सबसे कम बोली लगाने वाले को अनुबंध दिया जाता है, बशर्ते वे जिन सामग्रियों की आपूर्ति करते हैं वे टीटीडी द्वारा निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप हैं.

कर्नाटक विधानसभा चुनाव से एक महीने पहले अप्रैल में, कांग्रेस और जनता दल (सेक्युलर) ने कहा था कि अगर अमूल राज्य के बाजार में प्रवेश करेगा तो नंदिनी ब्रांड खतरे में पड़ जाएगा. पार्टियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर कर्नाटक को 'लूटने' का आरोप लगाया था.

बीजेपी ने दावा किया था कि कांग्रेस गलत सूचना अभियान चला रही है और दावा किया है कि उसने केएमएफ को मजबूत करने के लिए विपक्षी दल से कहीं अधिक काम किया है.



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All offices open, no restrictions: Gurugram Police debunks rumours amid unrest

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नूंह हिंसा: हरियाणा पुलिस ने मृतक होमगार्डों के परिवारों के लिए 57-57 लाख रुपये मुआवजे का किया ऐलान

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हरियाणा पुलिस ने नूंह में हुई हिंसा में जान गंवाने वाले दो होमगार्ड के परिवारों को 57-57 लाख रुपये का मुआवजा देने की मंगलवार को घोषणा की. हरियाणा में हुई हिंसा में पांच लोगों की मौत हो चुकी है. नूंह में दो होमगार्ड सहित चार लोगों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए, जहां भीड़ ने विश्व हिंदू परिषद के जुलूस को रोकने की कोशिश की थी जबकि गुरुग्राम में एक मस्जिद में एक नायब इमाम की हत्या कर दी गई.

एक आधिकारिक बयान के अनुसार हिंसा के मद्देनजर गुरुग्राम से नूंह में तैनात किए गए होमगार्ड नीरज और गुरसेव की ड्यूटी के दौरान मौत हो गई. बयान में कहा गया है, “हरियाणा पुलिस दुख की इस घड़ी में शोक संतप्त परिवारों के साथ खड़ी है. कोई भी राशि किसी प्रियजन को खोने से हुए नुकसान की भरपाई नहीं कर सकती, लेकिन फिर भी हरियाणा पुलिस की ओर से शोकाकुल परिवारों को 57-57 लाख रुपये और हर प्रकार की मदद प्रदान की जाएगी.”

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