Thursday, November 9, 2023

ग्राउंड रिपोर्ट : रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा से पहले सजाई जा रही है राम की नगरी अयोध्या

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अयोध्या में श्रीरामजन्मभूमि (Ayodhya Sri Ram Janmbhoomi) पर बन रहे भव्य राम मंदिर ( Ram Mandir) में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा 22 जनवरी 2024 होगी. इस दिन अयोध्या समेत देशभर के 5 लाख से ज्यादा मंदिरों में कार्यक्रम होंगे. राम मंदिर का ग्राउंड फ्लोर तैयार हो चुका है. गर्भगृह के साथ नृत्य मंडप और रंग मंडप फाइनल है. ग्राउंड फ्लोर में बने गर्भगृह में रामलला (Ram Lala) की प्रतिमा की प्राण-प्रतिष्ठा होगी. फर्स्ट फ्लोर में राम दरबार सजेगा. मंदिर के निर्माण तय समय पर पूरा करने के लिए 24 घंटे यानी 3 शिफ्ट में 2600 मजदूर काम कर रहे हैं.

अयोध्या के 25 लाख निवासी 22 जनवरी को रामलला की प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा से पहले शहर में बड़ा बदलाव होते देख रहे हैं. शहर के सबसे प्रसिद्ध स्थलों में से एक हनुमानगढ़ी मंदिर की ओर जाने वाली सड़क में पूरा ढांचागत बदलाव देखा जा रहा है. सड़क को चौड़ा किया जा रहा है. इसके लिए कुछ दुकानें तोड़ दी गईं हैं और कुछ दुकानों का पुनर्निर्माण किया गया है.

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कई दुकानदारों को मिला मुआवजा
राज्य सरकार का कहना है कि जिन दुकानदारों को पुनर्विकास के कारण नुकसान हुआ, उन्हें मुआवजा दिया गया है. पुनर्विकास के कारण कुछ महीनों तक हनुमानगढ़ी के आसपास कारोबार को झटका लगा हैं. हालांकि, दुकानदारों को इससे कोई परेशानी नहीं है. वो रामलला के मंदिर के लिए उत्साहित हैं.

जुटने लगी पर्यटकों की भीड़
इलाके की एक दुकानदार अनीता कहती हैं, "पहले कोई पर्यटक नहीं थे, अब बहुत ज्यादा आते हैं...इससे हमारी दुकान के आकार पर असर पड़ा है, लेकिन हमारा कारोबार बढ़ेगा." हनुमानगढ़ी के आसपास के बहुत कम मुस्लिम दुकानदारों में एक रईस मोहम्मद पुनर्विकास से खुश हैं. रईस कहते हैं, ''जाहिर तौर पर कारोबार में बढ़ोतरी हुई है. यह और भी बढ़ेगा."

हालांकि, अयोध्या के पुनर्विकास से हर कोई उतना आशावान नहीं है. 50 साल के राजकुमार सैनी करीब 30 साल से हनुमानगढ़ी मंदिर के बाहर फूल बेच रहे हैं. किराए की दुकान तोड़ दी जाने के बाद अब वह सड़क पर फूल बेचने को मजबूर हैं. राजकुमार सैनी कहते हैं, ''पहले हम 500 पीस बेचते थे. अब बिना दुकान के 200 पीस (पैच) बेचते हैं... हमारा कारोबार बढ़ेगा तो हमें खुशी होगी.''

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कुछ होटलों में अभी से 100% ऑक्यूपेंसी
वहीं, नया निर्माणाधीन अयोध्या रेलवे स्टेशन इस समय खाली-खाली दिखता है. लेकिन जनवरी में यह लाखों यात्रियों का गवाह बनेगा. शहर में पहले से ही कई नए होटल खुल गए हैं. कुछ होटलों में अभी से 100% ऑक्यूपेंसी (बुकिंग) है. रामायण होटल के मैनेजर अमित मिश्रा कहते हैं, "जब हमने यहां शुरुआत की, तो लोग हमारी इमारत को एक पर्यटक आकर्षण के रूप में देखने आए. हमारी ऑक्यूपेंसी 70%-80% तक बढ़ गई. हम 100% बुक हो चुके हैं."

पीएम मोदी ने 5 अगस्त 2020 को रखी थी राम मंदिर की आधारशिला 
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर 2019 में अयोध्या मामले में फैसला दिया था. जिसके बाद राम मंदिर के निर्माण का रास्ता साफ हुआ. पीएम मोदी ने 5 अगस्त 2020 को राम मंदिर की आधारशिला रखी थी.

16 से 24 जनवरी 2024 तक चलेगा समारोह
राम मंदिर में रामलला की प्रतिमा की प्राण-प्रतिष्ठा का समारोह 16 से 24 जनवरी 2024 तक होगा. समारोह के मुख्य दिन यानी 22 जनवरी को पीएम नरेंद्र मोदी शामिल होंगे. सुरक्षा की दृष्टि से बाहरी लोगों का प्रवेश इस दिन बंद रहेगा. सीमाएं सील कर बड़ी संख्या में सुरक्षा कर्मी अयोध्या के चप्पे-चप्पे पर तैनात रहेंगे. आसामान, पानी और जमीन तीनों तरफ से अयोध्या की सुरक्षा का व्यापक इंतजाम रहेगा.

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'Fixed-match from the beginning': Mahua Moitra on ethics panel's recommendation

\ Fixedmatch from the beginning Mahua Moitra on ethics panels recommendation

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Wednesday, November 8, 2023

घूसकांड के आरोपों से सांसदी रद्द करने की सिफारिश तक, महुआ मोइत्रा केस की पूरी टाइमलाइन

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घूस लेकर संसद में सवाल पूछने (Cash for Query) के आरोपों में घिरीं पश्चिम बंगाल के कृष्णानगर से टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा (Mahua Moitra) की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं. पार्लियामेंट एथिक्स कमेटी ने इस मामले की जांच के बाद महुआ मोइत्रा की लोकसभा सदस्यता रद्द करने की सिफारिश की है. वहीं, बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे (Nishikant Dubey) ने दावा किया है कि एंटी-करप्शन पैनल ने इसी मामले में महुआ मोइत्रा के खिलाफ सीबीआई जांच का आदेश दिया है. आइए महुआ मोइत्रा घूसकांड की पूरी टाइमलाइन पर डालते हैं एक नजर:-

14 अक्टूबर:- महुआ मोइत्रा के एक्स लिव इन पार्टनर और सुप्रीम कोर्ट के वकील जय अनंत देहद्राई ने महुआ के खिलाफ घूस लेकर संसद में सवाल पूछने की शिकायत की. जय अनंत देहद्राई ने इसी मामले में बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे को भी एक चिट्ठी लिखी.

15 अक्टूबर:-  इसके बाद झारखंड के गोड्डा से बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से महुआ मोइत्रा के बारे में वही शिकायत की. दुबे ने मोइत्रा को सस्पेंड करने की मांग की.

16 अक्टूबर:- बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने केंद्रीय आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव और आईटी राज्य मंत्री राजीव चंद्रशेखर से महुआ मोइत्रा के संसद अकाउंट के लॉग-इन आईडी और आईपी की जांच कराने की मांग की. महुआ ने भी सभी सांसदों के CDR और लॉग-इन डिटेल मांगी. राजीव चंद्रशेखर ने इसपर ट्वीट भी किया था.

17 अक्टूबर:- बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे की शिकायत को स्पीकर ने एथिक्स कमेटी को सौंप दिया. इसी दिन महुआ ने दिल्ली हाईकोर्ट में मानहानि की याचिका दायर की.

18 अक्टूबर:- लोकसभा एथिक्स कमेटी ने नोटिस जारी कर 26 अक्टूबर को निशिकांत दुबे को कमेटी के सामने पेश होने को कहा. इसी दिन वकील जय अनंत देहद्राई का भी बयान लिया गया.

19 अक्टूबर:- बिजनेसमैन दर्शन हीरानंदानी का विस्फोटक कबूलनामा सामने आया. उन्होंने अपने एफिडेविट में माना कि महुआ मोइत्रा ने उन्हें अपने लोकसभा अकाउंट का क्रेडेंशियल दिया था, ताकि वो सवाल पोस्ट कर सके. हीरानंदानी ने ये भी कबूल किया कि मोइत्रा ने इसके एवज में उनसे मोटा कैश और लग्जरी गिफ्ट्स, फॉरिन टूर की डिमांड की.

20 अक्टूबर:- इसी दिन महुआ के मानहानि मामले की सुनवाई हुई. अदालत ने 31 अक्टूबर की अगली डेट दी.

21 अक्टूबर:- निशिकांत दुबे ने आरोप लगाया कि महुआ मोइत्रा की संसद की आईडी दुबई से 47 बार लॉग-इन हुई है. जबकि इस दौरान वो खुद भारत में थीं. इसके बाद एथिक्स कमेटी ने आईटी मंत्रालय, विदेश मंत्रालय और गृह मंत्रालय से रिपोर्ट मांगी.

27 अक्टूबर:- एथिक्स कमेटी ने महुआ मोइत्रा को 31 अक्टूबर को पेश होने को कहा. महुआ ने पेशी के लिए 5 नवंबर के बाद की डेट मांगी. इसी दिन महुआ मोइत्रा ने माना कि उन्होंने हीरानंदानी को अपने संसद अकाउंट का लॉग-इन आईडी और पासवर्ड दिया था. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने दर्शन हीरानंदानी के सिर पर बंदूक रखकर एफिडेटिव साइन करवाया है. 

28 अक्टूबर:- महुआ की गुजारिश पर एथिक्स कमेटी ने उन्हें 31 अक्टूबर के बजाय 2 नवंबर को पेश होने को कहा.
महुआ ने भी पेश होने की हामी भरी.
    
31 अक्टूबर:- तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा ने अपने खिलाफ कथित फर्जी और अपमानजनक सामग्री के प्रसारण के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में दायर अपनी याचिका से पक्षकार के रूप में कई मीडिया घरानों को हटाने का अनुरोध किया. मुकदमा सिर्फ दो प्रतिवादियों - बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे और वकील जय अनंत देहद्राई के खिलाफ जारी रहेगा. 

1 नवंबर:- महुआ मोइत्रा की पेशी से एक दिन पहले एथिक्स कमेटी को गृह मंत्रालय, विदेश मंत्रालय और आईटी मंत्रालय की रिपोर्ट मिली. आईटी मंत्रालय की रिपोर्ट में बताया गया कि महुआ का संसद अकाउंट दुबई से 47 बार लॉग-इन हुआ था.

2 नवंबर:- 2 नवंबर को महुआ मोइत्रा संसद की एथिक्स कमेटी के सामने पेश हुईं. इस दौरान मीटिंग में खूब हंगामा हुआ. महुआ ने कहा कि एथिक्स कमेटी को कोई दूसरा नाम देना चाहिए, क्योंकि इसमें कोई नैतिकता नहीं बची है. चेयरमैन ने दुर्भावनापूर्ण और अपमानजनक तरीके से सवाल किए. वहां मौजूद 11 में से 5 सदस्यों ने पूछताछ का बहिष्कार किया. महुआ ने आरोप लगाया कि एक महिला के रूप में मेरी गरिमा को तार-तार करने वाले व्यक्तिगत सवाल पूछे गए. कमेटी ने इन आरोपों को खारिज किया. 7 नवंबर को अगली मीटिंग रखी गई, जो बाद में रद्द हो गई.

6 नवंबर:- महुआ ने दावा किया कि 7 नवंबर को होने वाली लोकसभा की एथिक्स कमेटी की बैठक इसलिए स्थगित की गई, ताकि कमेटी के मेंबर कांग्रेस सांसदों को कार्यवाही से दूर रखा जा सके.

8 नवंबर:- सूत्रों के मुताबिक, मामले की जांच के बाद संसदीय एथिक्स कमेटी ने महुआ मोइत्रा की लोकसभा सदस्यता रद्द करने की सिफारिश की है. वहीं, बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने अपने X हैंडल पर दावा किया है कि एंटी-करप्शन पैनल ने इसी मामले में महुआ मोइत्रा के खिलाफ सीबीआई जांच का आदेश दिया है. 

9 नवंबर:- महुआ पर लगे आरोपों की मसौदा रिपोर्ट पर विचार करने के लिए 9 नवंबर को एथिक्स कमेटी की बैठक होगी. कमेटी ने महुआ को गुरुवार शाम 4 बजे पेश होने को कहा है.


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Tuesday, November 7, 2023

Deepfake वीडियो पर क्या कहता है IT एक्ट? कानून के बाद भी क्यों शिकार हुईं रश्मिका मंदाना और कैटरीना कैफ?

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टेक्नोलॉजी जिस तेज़ी से बदल रही है और दुनिया को जिस तेज़ी से प्रभावित कर रही है, वो हैरान करने वाला है. ऐसी कई चीज़ें, जिनके बारे में हम कभी सोच भी नहीं सकते थे, वो भी इस टेक्नोलॉजी के ज़रिए असलियत में सामने आ रही हैं. Artificial Intelligence यानी AI ऐसी ही एक टेक्नोलॉजी है. AI इन दिनों हमारी जिंदगी के हर पहलू को प्रभावित कर रही है. कई मायनों में AI से हमारी ज़िंदगी आसान हुई है, तो कई मायनों में ये हमारे लिए नई मुसीबतें भी खड़ी कर सकती है. इसी AI के ज़रिए एक डीपफेक टेक्नॉलजी (Deepfake Technology) विकसित हुई है. इससे किसी के भी चेहरे और शरीर को बदलकर दिखाया जा सकता है. हाल में एक्ट्रेस रश्मिका मंदाना (Rashmika Mandana) और कैटरीना कैफ (Katreena Kaif) इसका शिकार हुई हैं, जिसे लेकर नई बहस छिड़ गई है.

आइए जानते हैं क्या है डीपफेक वीडियो और इसे रोकने के लिए भारत के आईटी लॉ में क्या है खामियां:-

डीपफेक वीडियो क्या होता है?
किसी रियल वीडियो, फोटो या ऑडियो में दूसरे के चेहरे, आवाज और एक्सप्रेशन को फिट कर देने को डीपफेक नाम दिया गया है. ये इतनी सफाई से होता है कि कोई भी यकीन कर ले.

पहली बार Reddit पर पोस्ट किए गए थे डीपफेक वीडियोज
'डीपफेक' शब्द पहली बार 2017 में इस्तेमाल किया गया था. तब अमेरिका के सोशल न्यूज एग्रीगेटर Reddit पर डीपफेक आईडी से कई सेलिब्रिटीज के वीडियो पोस्ट किए गए थे. इसमें एक्ट्रेस एमा वॉटसन, गैल गैडोट, स्कारलेट जोहानसन के कई पोर्न वीडियो थे.

AI और मशीन लर्निंग का लिया जाता है सहारा
डीपफेक वीडियो में मशीन लर्निंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का सहारा लिया जाता है. इसमें वीडियो और ऑडियो को टेक्नोलॉजी और सॉफ्टवेयर की मदद से ऐसे तैयार किया जाता है कि फेक भी रियल दिखने लगता है. वर्तमान टेक्नोलॉजी में अब आवाज भी इम्प्रूव हो गई है. इसमें वॉयस क्लोनिंग बेहद खतरनाक हो गई है.

रश्मिका मंदाना का मामला क्या है?
साउथ और बॉलीवुड एक्ट्रेस रश्मिका मंदाना का एक डीपफेक वीडियो वायरल हुआ है. इसमें एक्ट्रेस को बेहद वोल्ड कपड़ों में एक लिफ्ट की ओर जाते हुए दिखाया गया है. खास बात ये है कि इस वीडियो में चेहरा रश्मिका मंदाना का है, लेकिन बॉडी किसी और की है. जैसे ही ये क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल हुई, तो पता चला कि वीडियो दरअसल ब्रिटिश इंडियन इन्फ़्लुएंसर ज़ारा पटेल के वीडियो के साथ छेड़छाड़ कर बनाया गया है. YouTube influencer ज़ारा पटेल का वीडियो 9 अक्टूबर का था, जिसे डीपफेक टेक्नॉलजी के इस्तेमाल से बदला गया. इसमें ज़ारा पटेल के चेहरे को बदलकर उसकी जगह रश्मिका मंदाना का चेहरा बनाया गया है. 

जब तक रश्मिका मंदाना ने इस वीडियो पर ऐतराज नहीं जताया, तब तक किसी को इसके डीपफेक होने का अहसास भी नहीं हुआ. ये है डीपफेक की ताकत, जो अब न जाने कितने ही लोगों के लिए एक नई मुसीबत के तौर पर सामने आ रही है. 

रश्मिका ने X पर जताई हैरानी
रश्मिका मंदाना ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट कर इस डीपफेक वीडियो पर हैरानी और डर जताया है. उन्होंने लिखा, "मैं इसे शेयर करते हुए बहुत दुखी हूं और मुझे ऑनलाइन फैलाए जा रहे अपने डीपफेक वीडियो पर बात करनी है. ऐसा न सिर्फ़ मेरे लिए बहुत डरावना है, बल्कि जिस तरह टेक्नॉलजी का गलत इस्तेमाल हो रहा है उसके कारण हम सभी पर इसका ख़तरा मंडरा रहा है."
 
एक्ट्रेस ने लिखा, "आज एक महिला और अभिनेत्री होने के नाते मैं अपने परिवार, दोस्तों और चाहने वालों की शुक्रगुज़ार हूं जो मेरे बचाव में रहे हैं. लेकिन अगर ऐसा मेरे साथ तब होता, जब मैं स्कूल या कॉलेज में थी; तो मैं सोच भी नहीं सकती कि मैं कैसे इसका मुकाबला करती. हमें एक समुदाय के तौर पर इससे गंभीरता से निपटना होगा, इससे पहले कि पहचान की इस चोरी से हममें से और लोग भी प्रभावित हों."
 
कैटरीना कैफ भी हुईं शिकार

रश्मिका मंदाना के बाद मंगलवार को एक्ट्रेस कैटरीना कैफ से जुड़ी ऐसा ही एक डीपफेक वीडियो सामने आया. रियल इमेज में कैटरीना कैफ टॉवल पहने फिल्म 'टाइगर-3' के लिए एक एक्शन सीक्वेंस कर रही हैं. लेकिन जो मॉर्फ्ड इमेज बनाई गई है, उसमें कैटरीना को उसी पोज़ में लेकिन अलग कपड़ों में दिखाया गया है, जो तस्वीर को अश्लील बनाता है. मॉर्फ्ड इमेज सामने आने के कुछ ही घंटे बाद इसे सोशल मीडिया से हटा दिया गया.

अमेरिका में डीपफेक तस्वीरों पर हुआ हंगामा
कुछ ही दिन पहले अमेरिका में AI से तैयार ऐसी ही कई डीपफेक तस्वीरों पर हंगामा हुआ था. तब न्यू जर्सी के वेस्टफील्ड हाई स्कूल में स्कूली छात्राओं की कई नेकेड फोटोज सोशल मीडिया पर वायरल की गईं. इन फेक फोटोज से स्कूली छात्राएं दहशत में आ गई थीं. हैरान करने वाली बात ये रही कि इन तस्वीरों को तैयार करने वाले उनके ही बैचमेट थे, जिन्होंने चैट पर ये मॉर्फ्ड तस्वीरें शेयर की थीं.

डीपफेक टेक्नोलॉजी का पिछले कुछ सालों में काफी गलत इस्तेमाल हुआ है. स्कैमर्स और साइबर क्रिमिनल इसका धड़ल्ले से दुरुपयोग कर रहे हैं. इसका सबसे ज़्यादा दुरुपयोग पोर्नोग्राफ़ी यानी अश्लील वीडियो या तस्वीरों के तौर पर हो रहा है. यही नहीं जानी मानी हस्तियों की पहचान के साथ भी इस टेक्नॉलजी के ज़रिए खिलवाड़ हो रहा है. 

इस डीपफेक टेक्नॉलजी में पावरफुल ग्राफ़िक कार्ड्स का इस्तेमाल किया जाता है. इंटरनेट पर ऑनलाइन ऐसे कई टूल्स और ट्यूटोरियल्स हैं, जो फ्री में इस डीपफेक टेक्नॉलजी का इस्तेमाल करना सिखाते हैं. यही वजह है कि दुनिया भर में AI से जुड़े नियमों को सख्त करने की मांग तेजी से उठ रही है. 

आईटी मंत्री ने भी किया पोस्ट
रश्मिका मंदाना से जुड़े डीपफेक वीडियो के विवाद के बाद केंद्रीय आईटी राज्य मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट किया. उन्होंने कहा, "अप्रैल 2023 में जारी आईटी नियमों के मुताबिक सभी प्लेटफॉर्म्स के लिए ये कानूनी बाध्यता है कि वो किसी भी यूज़र द्वारा गलत जानकारी को पोस्ट न होने दें. अगर कोई यूज़र या सरकार इसकी शिकायत करती है, तो गलत जानकारी को 36 घंटे में हटाना सुनिश्चित करें. अगर प्लेटफॉर्म इस पर अमल नहीं करते, तो उनके खिलाफ नियम 7 लागू होगा और उनके खिलाफ आईपीसी की धाराओं के तहत प्रभावित व्यक्ति द्वारा केस किया जा सकता है."

सरकार ने याद दिलाए नियम
इस बीच केंद्र सरकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को वो कानून याद दिलाए हैं, जो Artificial Intelligence के ज़रिए ऐसे डीपफेक्स के दुरुपयोग पर होने वाली सज़ा से जुड़ा है. इलेक्ट्रॉनिक्स और इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी मंत्रालय ने अपनी एडवाइज़री में Information Technology Act, 2000 के Section 66D का ज़िक्र किया है. 

Section 66D के तहत कोई भी अगर किसी संचार उपकरण (Communication Device) या कंप्यूटर के ज़रिए किसी की पहचान बदलकर धोखा देता है, तो उसे तीन साल तक की सजा और 1 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है.

क्या कहते हैं साइबर लॉ एक्सपर्ट?
सवाल ये है कि क्या ये कानून प्रभावी तरीके से लागू हो रहा है या इसमें कुछ खामियां हैं? NDTV ने इस पूरे मामले पर साइबर लॉ एक्सपर्ट विराग गुप्ता से बात की. विराग गुप्ता ने बताया, "इंटरनेट की दुनिया में 20-25 सालों में कई मंजिल की एक बिल्डिंग बन गई है. डीपफेक उसी का एक एक्टेंशन है. जब तक हम उस बिल्डिंग को, उसके बेसिक स्ट्रक्चर को कानून के दायरे में नहीं लाएंगे, तो डीपफेक की दुनिया के रेगुलेशन में मुश्किल आएगी. क्योंकि जब तक आप समस्या की जड़ नहीं पकड़ेंगे, तब तक समाधान नहीं होगा."

विराग गुप्ता आगे बताते हैं, "इस समस्या की जड़ के पहलुओं को समझना भी जरूरी है. जिन कंपनियों के प्लेटफॉर्म पर डीपफेक का सर्कुलेशन होता है. जैसे-फेसबुक, इंस्टाग्राम, यू-ट्यूब या फिर दूसरे प्लेटफॉर्म. इन कंपनियों को कानून की भाषा में इंटरमिडिएरी कहते हैं. भारत में आईटी एक्ट की धारा 79 के तहत उनको कानूनी छूट प्राप्त है. इसलिए सेफ हार्बर की वजह से उनके खिलाफ कोई एक्शन नहीं लिया जाता है. ऐसे में मौजूदा कानून को लेकर पेंच ये है कि जब भी आपत्तिजनक कंटेंट हटाने की बात आती है, तब ये कंपनियां कहती हैं कि ये तो सरकार का आदेश है या फिर कोर्ट का आदेश आए. इसके लिए 10 साल पहले गोविंदाचार्य मामले में हाईकोर्ट ने शिकायतकर्ता से कहा था कि आप शिकायत अधिकारी नियुक्त करें, लोग उनके टोलफ्री नंबर पर कॉल करें. ईमेल में संपर्क करें. ये कंपनियां इन शिकायतों का निपटारा करेंगी. एक मैकेनिज्म होने के बाद भी लोगों को राहत नहीं मिल पा रही है."

साइबर लॉ एक्सपर्ट विराग गुप्ता कहते हैं, "दूसरी बात, भारत में बच्चों के जो डिजिटली बालिग होने का कानून है, उसे सही तरीके से लागू नहीं किया गया है. कानूनन 18 साल से कम उम्र के बच्चे नाबालिग होते हैं, वो सोशल मीडिया के अकाउंट नहीं खोल सकते हैं. ऐसे कॉन्ट्रैक्ट नहीं कर सकते हैं. लेकिन ये कानून भी फॉलो नहीं किया जाता. कंपनियों की इसकी जानकारी रहती है, लेकिन ये कंपनियां मुनाफे के लिए इसपर रोक नहीं लगाती हैं."

यूरोपीय यूनियन ने उठाया है बड़ा कदम
बता दें कि यूरोपीय यूनियन ने डीपफेक को रोकने के लिए AI एक्ट के तहत "कोड ऑफ प्रैक्टिस ऑन डिसइन्फॉर्मेशन' लागू किया है. इस पर साइन करने के बाद गूगल, मेटा, ट्विटर सहित कई तकनीकी कंपनियों को अपने प्लेटफॉर्म पर डीपफेक और फेक अकाउंट्स रोकने के लिए सख्त कदम उठाने होते हैं. इन्हें लागू करने के लिए छह महीने का समय दिया जाता है. कानून तोड़ने पर कंपनी को अपने सालाना ग्लोबल रेवेन्यू का 6% जुर्माना देना पड़ता है.

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अगले चार-पांच सालों में सेना से चरणबद्ध तरीके से हटाए जाएंगे चीता और चेतक हेलीकॉप्टर

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सियाचिन में सेना की शान चीता और चेतक हेलीकॉप्टर को थलसेना अगले चार-पांच सालों में चरणबद्ध तरीके से हटाएगी. आर्मी एविएशन कोर को सेना की जरूरतों के लिए ऐसे 250 हल्के हेलीकॉप्टर की जरूरत है. फिलहाल सेना के पास करीब 190 चेतक और चीता हेलीकॉप्टर हैं. सेना को अगले कुछ सालों में हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड से 100 के करीब लाइट यूटिलिटी हेलीकॉप्टर मिलेंगे.

सेना बाकी जरूरतों को पूरा करने के लिए लीज पर भी हेलीकॉप्टर लेने पर विचार कर रही है. हालांकि सेना का कहना है कि हमारी कोशिश तो रहेगी कि हम देश में बने हेलीकॉप्टर ही लें, लेकिन अगले 10-12 सालों में एचएएल  इतने एलयूएच हेलीकॉप्टर सेना को सप्लाई कर पाएगी, इसकी संभावना ना के बराबर है.
 

वैसे सेना को एलयूएच हेलीकॉप्टर के डिजाइन में भी कुछ दिक़्क़तें थी, जिसे काफी हद तक दूर कर लिया गया है. एविएशन कोर के मुताबिक अभी इसमें ऑटो पायलट को फिट किया जा रहा है और सब कुछ ठीक ठाक रहा तो थल सेना को अगले साल के अंत तक इसकी डिलीवरी शुरू हो जाएगी.

आर्मी सियाचिन जैसे दुर्गम और कठिन इलाके में सैनिकों और समान को ले आने में चीता और चेतक का इस्तेमाल करती है. इस ऊंचाई में दूसरा कोई हेलीकॉप्टर उतना सफल नही हो पाता है. 12 हज़ार फ़ीट की ऊंचाई पर भी ये आसानी से उड़ पाता है. हालांकि इसमें ऑटो पायलट नही हैं. ये हर मौसम में फ्लाई भी नहीं कर सकता है. करीब 50 साल पुराना भी हो गया है. कई बार इन हेलीकॉप्टर के दुर्घटनाग्रस्त होने पर भी इनके हटाये जाने की बात उठी, लेकिन इतनी जल्दी इनको रिप्लेस नहीं किया जा सकता है.

वहीं अगर देश में बने एलयूएच की बात करें तो इसका इंजन और एवोनिक्स अत्याधुनिक है. हर मौसम में उड़ान भर सकता है. एविएशन कोर की मानें तो चीता और चेतक से एलयूएच 25 से 30 फीसदी बेहतर है.



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AUS v AFG: Maxwell 201* helps Australia snatch miraculous victory, seal semi-final spot

\ AUS v AFG Maxwell helps Australia snatch miraculous victory seal semifinal spot

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Monday, November 6, 2023

छत्तीसगढ़ की नक्सल प्रभावित 20 सीटों पर वोटिंग कल, मिजोरम की 40 सीटों के लिए भी होगा मतदान

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  1.  छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित 20 सीटों पर 40,78,681 मतदाता 223 उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला करेंगे. इन उम्मीदवरों में पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और बस्तर के सांसद दीपक बैज, कांग्रेस सरकार के 3 मंत्री, बीजेपी की ओर से 4 पूर्व मंत्री और एक पूर्व IAS अधिकारी शामिल हैं.
  2. 20 विधानसभा क्षेत्रों में से 10 विधानसभा क्षेत्रों मोहला-मानपुर, अंतागढ़, भानुप्रतापपुर, कांकेर, केशकाल, कोंडागांव, नारायणपुर, दंतेवाड़ा, बीजापुर और कोंटा विधानसभा क्षेत्रों में सुबह 7 बजे से दोपहर 3 बजे तक और बाकी 10 सीटों पंडरिया, कवर्धा, खैरागढ़, डोंगरगढ़, राजनांदगांव, डोंगरगांव, खुज्जी, बस्तर, जगदलपुर और चित्रकोट विधानसभा क्षेत्रों में सुबह 8 बजे से शाम 5 बजे तक मतदान होगा.
  3. छत्तीसगढ़ चुनाव के पहले फेज में जिन 20 सीटों पर मतदान होना है उनमें से 12 अनुसूचित जनजाति (एसटी) के लिए जबकि एक अनुसूचित जाति (एससी) वर्ग के लिए आरक्षित है. 2018 के चुनाव में बीजेपी को इन 20 सीटों में से 18 पर हार का सामना करना पड़ा था. पहले फेज में सबसे ज्यादा उम्मीदवार राजनांदगांव निर्वाचन क्षेत्र (29) में हैं, जबकि सबसे कम उम्मीदवार चित्रकोट और दंतेवाड़ा सीटों पर 7-7 उम्मीदवार हैं.
  4.  पहले चरण में कांग्रेस से प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष और सांसद दीपक बैज (चित्रकोट सीट), मंत्री कवासी लखमा (कोंटा), मोहन मरकाम (कोंडागांव), मोहम्मद अकबर :कवर्धा: और दिवंगत कांग्रेस नेता महेंद्र कर्मा के बेटे छविंद्र कर्मा (दंतेवाड़ा) प्रमुख उम्मीदवारों में से हैं.
  5.  वहीं, बीजेपी से पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह (राजनांदगांव), राज्य के चार पूर्व मंत्री केदार कश्यप (नारायणपुर), लता उसेंडी (कोंडागांव), विक्रम उसेंडी (अंतागढ़) और महेश गागड़ा (बीजापुर) और पूर्व आईएएस अधिकारी नीलकंठ टेकाम (केशकाल) प्रमुख उम्मीदवार हैं.
  6. अधिकारियों ने बताया कि पहले फेज के 20 विधानसभा क्षेत्रों में कुल 223 उम्मीदवार हैं, जिनमें 198 पुरुष और 25 महिला हैं. पहले फेज के लिए 40 लाख 78 हजार 681 मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे. पहले फेज के निर्वाचन के लिए कुल 5304 मतदान केंद्र बनाए गए हैं.
  7. मिजोरम की सभी 40 सीटों के लिए मंगलवार को वोट डाले जाएंगे. कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच 8.57 लाख से ज्यादा मतदाता 174 उम्मीदवारों के चुनावी भाग्य का फैसला करेंगे. वोटिंग सभी 1,276 मतदान केंद्रों पर सुबह 7 बजे शुरू होगा और शाम 4 बजे तक जारी रहेगा.
  8. एक और अधिकारी ने कहा कि इनमें से 149 सुदूर मतदान केंद्र हैं, जबकि अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय सीमा के आसपास के करीब 30 मतदान केंद्रों को संवेदनशील घोषित किया गया है. मतदान से पहले म्यांमा से लगी 510 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा और बांग्लादेश से लगी 318 किलोमीटर लंबी सीमा को सील कर दिया गया है.
  9. चुनाव में 18 महिलाओं समेत कुल 174 उम्मीदवार मैदान में हैं. सत्तारूढ़ मिजो नेशनल फ्रंट (MNF), मुख्य विपक्षी दल जोरम पीपुल्स मूवमेंट (ZPM)और कांग्रेस ने सभी 40 सीटों पर उम्मीदवार खड़े किए हैं. BJP और AAP क्रमशः 23 और 4 सीटों पर चुनाव लड़ रही हैं. वहीं, 27 निर्दलीय उम्मीदवार मैदान में हैं.
  10. कुल मिलाकर 4,39,026 महिला मतदाताओं समेत 8,57,063 मतदाता मिजोरम विधानसभा चुनाव में अपने मताधिकार के इस्तेमाल के पात्र हैं. चुनाव के मद्देनजर असम के तीन जिलों, मणिपुर के दो और त्रिपुरा के एक जिले से लगीं अंतर-राज्यीय सीमाएं भी बंद कर दी गई हैं.


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Angelo Mathews dismisses Shakib Al Hasan, taunts batter with 'timed out' gesture

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Sunday, November 5, 2023

‘इंडिया’ गठबंधन लोगों के लिए काम करेगा, 'नेता की छवि' के लिए नहीं : शशि थरूर

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कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर (Shashi Tharoor) ने रविवार को कहा कि अगर देश के लोग चाहते हैं कि केंद्र में अगली सरकार 'नेता की छवि' के बजाय लोगों के लिए काम करे तो विपक्षी ‘इंडिया' (INDIA) गठबंधन ही इसका जवाब है. केरल के तिरुवनंतपुरम से लोकसभा सदस्य ने दावा किया कि विधानसभा चुनाव वाले सभी पांच राज्यों में कांग्रेस (Congress) पार्टी भाजपा (BJP) से आगे है और नतीजे अगले साल के लोकसभा चुनाव से पहले विपक्षी गठबंधन का मनोबल बढ़ाएंगे.

शशि थरूर ने ‘पीटीआई-भाषा' के साथ एक साक्षात्कार में कहा, 'मुझे लगता है कि भारतीय मतदाताओं के लिए यह पूछने का समय आ गया है कि उनके हित में क्या है, न कि मोदी की छवि या भाजपा के पीआर (जनसंपर्क) कार्य में क्या है. क्या आप ऐसी सरकार चाहते हैं जो आपके कल्याण को प्राथमिकता दे? क्या आप ऐसी सरकार चाहते हैं जो लोगों को पहले रखे, न कि नेता की छवि को.''

उन्होंने कहा कि अगर लोग एक ऐसी सरकार चाहते हैं जो किसी नेता के बजाय लोगों के बारे में सोचे तो ‘इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इंक्लूसिव अलायंस' (इंडिया) इसका जवाब है.

जनता भाजपा को कड़ा संदेश देने की तैयारी कर रही

थरूर ने कहा, 'सच कहूं तो ऐसा लगता है कि भारत की जनता भाजपा को कड़ा संदेश देने की तैयारी कर रही है. अगर आप चुनावों पर नजर डालें तो इस समय भाजपा पांच में से चार राज्यों में कांग्रेस से काफी पीछे है और पांचवें राज्य राजस्थान में थोड़ा कम पीछे है.'

उन्होंने कहा, 'इसलिए, यदि आप नतीजों को देख रहे हैं, तो ऐसा लगता है कि जब अगले साल लोकसभा चुनाव होंगे तो विपक्ष को बहुत मजबूती मिलने वाली है. और यह भाजपा के लिए अच्छी खबर नहीं हो सकती.'

राजस्थान, मिजोरम, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और तेलंगाना में चुनाव पूर्व सर्वेक्षणों का जिक्र करते हुए वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने कहा कि इन सभी ने राजस्थान को छोड़कर सभी राज्यों में विपक्षी दल को भाजपा से आगे बताया है.

कांग्रेस इन चुनावों में बहुत अच्छा प्रदर्शन करने जा रही

उन्होंने कहा, 'यदि आप यह भी पूछें कि पार्टी कार्यकर्ता ज़मीनी स्तर पर क्या कह रहे हैं, तो कांग्रेस पार्टी में बहुत विश्वास है कि हम इन चुनावों में बहुत अच्छा प्रदर्शन करने जा रहे हैं.'

इन पांचों राज्यों में सात से 30 नवंबर के बीच मतदान होगा और मतगणना एक ही दिन तीन दिसंबर को होगी.

यह पूछे जाने पर कि क्या वह लोकसभा चुनाव से पहले इन पांच राज्यों के चुनावों को 'सेमीफाइनल' कहना चाहेंगे, थरूर ने कहा कि यह शब्दावली 'थोड़ी अजीब' है क्योंकि मतदाताओं ने विधानसभा और लोकसभा चुनावों में अलग-अलग तरीके से मतदान करना सीख लिया है.

विधानसभा और लोकसभा चुनावों के बीच हो सकता है कुछ भी

उन्होंने कहा, 'इसके अलावा, राज्यों के चुनावों के नतीजों और लोकसभा चुनाव के लिए आदर्श आचार संहिता की घोषणा के बीच कुछ महीनों में, कुछ भी हो सकता है. पिछली बार 2018 में, (नरेन्द्र) मोदी की पार्टी सभी पांच राज्यों में हार गई थी और मई तक 2019 में, उन्होंने इन सभी राज्यों में अधिकतर सीट जीती थीं.''

थरूर ने कहा, 'तो, क्या हुआ? खैर, आंशिक रूप से क्योंकि पुलवामा हुआ. पुलवामा और बालाकोट के साथ, सरकार अपनी आर्थिक अक्षमता पर जनमत संग्रह को राष्ट्रीय सुरक्षा वोट में बदलने में सक्षम रही. लोगों ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा कारणों से, वे मोदी को वोट देते हैं.'

अगले साल के चुनाव के दौरान फिर से ऐसे किसी मुद्दे का उपयोग होने की संभावना पर, थरूर ने कहा: 'मुझे नहीं लगता कि कोई घटना एक ही तरीके से एक ही स्थान पर दो बार हो सकती है.'

उन्होंने कहा कि सत्तारूढ़ भाजपा के नेतृत्व वाला राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) जनवरी में होने वाली दो घटनाओं- राम मंदिर का पूरा होना और गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में (अमेरिकी राष्ट्रपति) जो बाइडेन की यात्रा का फायदा उठा सकता है.

नरेन्द्र मोदी सरकार के सत्ता में आने से पहले किए गए भाजपा के वादों पर सवाल उठाते हुए थरूर ने देश के लोगों से पूछा कि क्या वे सभी आश्वासन पूरे हुए हैं. उन्होंने कहा कि लोगों को उसी के अनुसार निर्णय लेना चाहिए.

देश के नाम से जुड़े विवाद के बारे में सांसद ने कहा, 'मुझे लगता है कि यह देश के सामने मौजूद वास्तविक मुद्दों से पूरी तरह अनावश्यक रूप से ध्यान भटकाना है. भारत कुछ ऐसा है जिसे हर कोई हमारे देश के विचार के हिस्से के रूप में पहचानता है. हम एक से दूसरे को क्यों चुनना चाहते हैं? आइए हम दोनों (‘इंडिया' और भारत) को रखें.'

थरूर के अनुसार, लोग जिस भाषा को बोलते या लिखते हैं उसके आधार पर वे बहुत आसानी से ‘इंडिया' और भारत के बीच चयन कर लेते हैं. अंग्रेजी में हो और अंतरराष्ट्रीय मंच पर हो तो ‘इंडिया' और किसी की मातृभाषा में हो तो भारत.

कांग्रेस नेता ने कहा, 'इंडिया शब्द की उत्पत्ति हिंदू शब्द के समान व्युत्पत्ति संबंधी जड़ों से हुई है. दोनों इसलिए आए क्योंकि फारसियों ने सिंधु नदी के पार के लोगों को एक व्यक्ति के रूप में देखा. वे ‘सिंधु' नाम नहीं कह सकते थे क्योंकि वे 'एस' का स्पष्ट उच्चारण नहीं कर सकते थे, तो उन्होंने इसे हिंदू बना दिया.''

हिंदू और ‘इंडिया' दोनों की उत्पत्ति फारसी शब्दों से हुई

उन्होंने कहा, 'इस तरह हिंदू और ‘इंडिया' दोनों की उत्पत्ति सिंधु नदी के पार के लोगों के लिए फ़ारसी शब्दों से हुई है. इसलिए, यदि आप यह नहीं कहना चाहते कि 'गर्व से कहो कि हम ‘इंडियन' हैं', तो आप यह भी नहीं कह सकते कि 'गर्व से कहो कि हम हिंदू हैं'. दोनों एक ही मूल से हैं.''

केंद्रीय जांच एजेंसियों के कथित दुरुपयोग पर थरूर ने आरोप लगाया कि यह कोई नयी बात नहीं है क्योंकि भाजपा 2014 से अपने पूरे कार्यकाल में ऐसा करती रही है.

थरूर ने कहा, 'यह मतदान होने से पहले ही तेज होता है. वे किसी तरह उन लोगों को हतोत्साहित करना चाहते हैं जो उन्हें चुनौती देने का साहस रखते हैं. मुझे लगता है कि हमें विपक्ष और सरकार की आलोचकों के खिलाफ अधिक से अधिक मामले मिलेंगे.

उन्होंने कहा, '...और सच कहूं तो मुझे लगता है कि जनता ने अब इसके पीछे के संदेश को समझना सीख लिया है. ऐसा नहीं हो सकता कि इस देश में जांच के लायक एकमात्र लोग विपक्षी नेता हैं.'

थरूर 40 सदस्यीय मिजोरम विधानसभा के चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवारों के पक्ष में प्रचार करने के लिए आइजोल में थे. मिजोरम में सात नवंबर को एक ही चरण में मतदान होगा.



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Saturday, November 4, 2023

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Friday, November 3, 2023

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Thursday, November 2, 2023

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Wednesday, November 1, 2023

गाजा की दर्दनाक दास्तां : एक साथ एक परिवार की तीन पीढ़ियां खत्म, 3 महीने की बच्ची समेत 42 लोगों की मौत

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फिलिस्तीनी संगठन हमास और इजरायल (Israel Palestine Conflict) के बीच 7 अक्टूबर से जंग चल रही है. बुधवार (1 नवंबर) को जंग का 26वां दिन है. इजरायली सेना ने हमास को खत्म करने के लिए गाजा पट्टी पर हमले तेज कर दिए हैं. आसमान से लेकर जमीन तक हर तरफ से  हमास के ठिकानों पर हमले किए जा रहे हैं. इस भीषण जंग में बड़ी संख्या में आम लोग भी मारे जा रहे हैं. अमेरिका में रहने वाले एक फिलिस्तीनी परिवार ने दावा किया है कि उन्होंने गाजा में एक ही दिन में अपने परिवार की तीन पीढ़ियों को खो दिया है. इस गाजा में हुए इजरायल की बमबारी में इस परिवार के 42 रिश्तेदार मारे गए हैं.

अमेरिका में रह रहें तारिक हमौदा और उनकी पत्नी मनाल ने CNN को बताया, "एक हफ्ते पहले हमें पता चला कि मिडिल ईस्ट में चल रहे जंग में हमारे 42 रिश्तेदार मारे गए हैं." तारिक बताते हैं, "ये हमला 19 अक्टूबर को गाजा शहर के शेख एजलीन में हुआ. मेरे परिवार के सदस्य इजरायली सेना के दो मिसाइल हमलों में मारे गए."

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तारिक हमौदा मिनेसोटा के मेपल ग्रोव में रहते हैं. हामौदा ने बताया, "मेरी पत्नी ने अपने चार भाइयों, एक बहन और अपने ज्यादातर बच्चों को इजरायली हमले में खो दिया. हम दोनों मूल रूप से गाजा के निवासी हैं. 2004 से अमेरिका में रह रहे हैं. मेरी पत्नी ने हाल ही में अपने रिश्तेदारों से मुलाकात की थी." उन्होंने कहा, "हमारे पास मृतकों का ठीक से मातम मनाने का समय नहीं है, क्योंकि हमें अभी भी उन लोगों की फिक्र है, जो युद्धग्रस्त शहर में अब तक जिंदा हैं."

मनाल के चचेरे भाई इयाद अबू शाबान भी अपने परिवार के सदस्यों की मौत के बारे में जानकर बेचैन हैं. साउथ फ्लोरिडा में रहने वाले शाबान ने कहा, "ऐसा लगता है जैसे आपकी पूरी दुनिया रुक गई. यह एक, दो, तीन या चार नहीं है. एक ही परिवार के 42 लोग मारे गए हैं. इस सच का सामना करना वाकई बहुत मुश्किल है." 

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शाबान के मुताबिक, मृतकों की उम्र 3 महीने से लेकर 77 वर्ष के बीच थी. वे सभी एक ही कैंपस में रह रहे थे. CNN से बातचीत में शाबान ने दावा किया कि हवाई हमले से पहले इजरायली रक्षा बलों (IDF) ने फोन करके कहा था कि क्षेत्र में सैन्य गतिविधि हो सकती है, लेकिन उन्हें कभी भी अपना घर खाली करने के लिए नहीं कहा गया.

बता दें कि 7 अक्टूबर को हमास ने इजरायल पर रॉकेट हमले किए थे. हमास के लड़ाकों ने सुरंगों के रास्ते घुसपैठ करते हुए 1400 लोगों को मार डाला था. इसके साथ ही हमास के लड़ाके 240 लोगों को बंधक बनाकर अपने साथ ले गए थे, जिसके बाद से इजरायली सेना की गाजा पट्टी पर जवाबी कार्रवाई जारी है. इस जंग में अब तक 8,500 से ज्यादा फिलिस्तीनी मारे गए हैं, जिनमें से दो-तिहाई महिलाएं और बच्चे शामिल हैं.

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स्वीडन में कारोलिंस्का इंस्टिट्यूट के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए एक हालिया अध्ययन में लाइफ एक्सपेक्टेंसी ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर (ओसीडी) के...