Bengal government will collapse soon says BJP Trinamool calls it baseless claimfrom India Today | Latest Stories https://ift.tt/niRjYW4
उत्तर प्रदेश के मेरठ में एक कांवड़ के हाईटेंशन लाइन की चपेट में आने से बड़ा हादसा हुआ है. हरिद्वार से कांवड़ लेकर आये कांवड़ियों का डीजे हाईटेंशन लाइन से टकरा गया, जिससे 5 कांवड़ियों की मौत हो गई. करंट से झुलसे कुल कांवड़ियों की संख्या करीब दर्जन भर है. मेरठ के डीएम दीपक मीणा ने मौतों की पुष्टि की है. इस घटना के बाद आक्रोशित लोगों ने किला रोड पर जाम लगा दिया और प्रदर्शन करने लगे. उन्होंने बिजली अधिकारियों पर लापरवाही का आरोप लगाया है. घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस प्रशासन भी मौके पर पहुंचा.
जानकारी के मुताबिक, मेरठ के राली चौहान गांव के कांवड़िये शनिवार शाम करीब 8 बजे गांव में कांवड़ लेकर पहुंचे थे. डीजे के धूम-धड़ाके के बीच कांवड़ियों ने जैसे ही गांव में एंट्री की, सड़क किनारे नीचे लटक रही हाईटेंशन लाइन डीजे से टकराई और हाईटेंशन करंट पूरे डीजे और कांवड़ में दौड़ गया. कोई कुछ समझ पाता उससे पहले ही कांवड़िये एक-एक करके तड़पकर गिरने लगे. चारों तरफ चीख-पुकार मच गई. किसी ने बिजलीघर फोन करके शटडाउन की गुहार लगाई लेकिन किसी ने नही सुनी. ग्रामीण किसी तरह अपने वाहनों से करंट से झुलसे कांवड़ियों को अस्पताल लेकर भागे.
करीब आधा दर्जन अस्पतालों में कांवड़ियों को इलाज के लिए भर्ती कराया गया. गंगानगर के आईआईएमटी अस्पताल पहुंचे मनीष की इलाज मिलने से पहले ही मौत हो गई. आनंद अस्पताल में 4 कांवड़ियों की इलाज के दौरान मौत हुई, जिनमें से दो सगे भाई थे. घायलों को देखने एडीजी राजीव सभरवाल, डीएम दीपक मीणा और एसएसपी रोहित सिंह सजवाण भी पहुंचे. उधर, बिजली विभाग की लापरवाही से हुए हादसे से गुस्साए ग्रामीणों ने गांव के बाहर जाम लगाकर मेरठ-किला रोड मार्ग जाम कर दिया. आधी रात तक पुलिस अफसर जाम खुलवाने का प्रयास करते रहे. ग्रामीणों की मांग थी कि लापरवाह बिजली अफसरों को सजा दी जाए.
घायल कांवड़ियों में अभी कई की हालत गंभीर बनी हुई है. प्रशासन के अफसर उनके बेहतर इलाज की कोशिशें करा रहे है. लेकिन सवाल यह है कि जब जिले के सभी विभागों ने कांवड़ यात्रा की तैयारी और उसकी समीक्षा जमीनी तौर पर की थी तो राली चौहान गांव में लटका यह मौत का तार आखिर क्यों छोड़ दिया गया.
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पटना में शिक्षकों की नियुक्ति को लेकर हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान हुए लाठीचार्ज में बीजेपी कार्यकर्ता की मौत का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है. पटना में 13 जुलाई को हुई घटना की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में SIT गठित करने या CBI द्वारा इस मामले की जांच कराने के लिए निर्देश देने की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई है.
इसके अलावा याचिका में विरोध प्रदर्शन के दौरान लाठीचार्ज से जुड़े सभी दर्ज मामलों को CBI को देने का भी निर्देश देने की भी मांग की गई है
दरअसल बिहार में शिक्षकों की नियुक्ति को लेकर पटना के गांधी मैदान से विधानसभा तक मार्च निकालकर बीजेपी कार्यकर्ताओं को विधानसभा का घेराव करना था. उस दौरान बीजेपी कार्यकर्ताओं पर पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया. इसकी वजह से एक बीजेपी कार्यकर्ता की मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए.
इस घटना की जांच की मांग करते हुए वकील वरुण सिन्हा ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है.
हैदराबाद से 8 जुलाई को दिल्ली जा रही इंडिगो की फ्लाइट में सवार एक 40 साल के यात्री फुरकान हुसैन ने कथित तौर पर उड़ान भरने के दौरान विमान का इमरजेंसी एग्जिट गेट का कवर खोल दिया. दिल्ली एयरपोर्ट के सूत्रों ने यह जानकारी दी है. यह घटना फ्लाइट 6E 5605 की उड़ान के दौरान हुई. आरोपी को दिल्ली एयरपोर्ट पर उतरने के बाद सुरक्षाकर्मियों को सौंप दिया गया. आरोपी शख्स के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है. सूत्रों ने बताया कि यात्री के अनियंत्रित व्यवहार के चलते विमान में सवार अन्य यात्रियों और चालक दल में दहशत फैल गई.
यात्री सीट 18ए पर बैठा था, जो इमरजेंसी एग्जिट डोर के करीब था. उन्होंने बताया कि घटना के बाद इमरजेंसी एग्जिट के कवर को तुरंत ठीक किया गया और यात्री को विमान में दूसरी सीट पर स्थानांतरित किया गया.
सुरक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, इमरजेंसी एग्जिट डोर के हैंडल पर एक कवर होता है, जो उसे केबिन के दबाव या फिर किसी अन्य आकस्मिक कारण से खुलने से बचाता है.
इंडियन एयरलाइंस के उड़ान सुरक्षा के पूर्व निदेशक एसएस पनेसर ने कहा, "अगर कवर हटा दिया जाता है तो हैंडल खुला रहता है और यह किसी भी कारण से हवा में खुल सकता है और यह विमान के लिए खतरनाक है."
एक एयरलाइन के क्रू सदस्य ने बताया कि इमरजेंसी एग्जिट कवर ऐसा है कि यह गलती से भी नहीं खुल सकता है.
चालक दल के एक सदस्य ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, "आपको इसे बाहर निकालना होगा और इसके लिए प्रयास की आवश्यकता होती है. केवल शरारत के कारण ही कोई ऐसा कर सकता है."
उन्होंने कहा, "जिन यात्रियों को इमरजेंसी एग्जिट के पास सीटें दी जाती हैं, उन्हें साफ तौर पर कहा जाता है कि उन्हें कवर या हैंडल के साथ खिलवाड़ नहीं करना चाहिए. यदि कोई यात्री ऐसा करता है तो यह स्पष्टत: शरारत के कारण है. यह अनियंत्रित व्यवहार की परिभाषा में आता है क्योंकि यह विमान को खतरे में डाल देता है."
सूत्रों ने बताया कि एयरलाइन की शिकायत के आधार पर दिल्ली पुलिस ने व्यक्ति के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है.
उन्होंने कहा कि पुलिस ने आईपीसी की धारा 336 लगाई है, जो दूसरों की व्यक्तिगत सुरक्षा को खतरे में डालने से संबंधित है. साथ ही चालक दल द्वारा दिए गए निर्देश का पालन करने से इनकार करने पर विमान नियमों की धारा 22 भी लगाई गई है.
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सऊदी अरब की जेल में ढाई साल से बंद राजस्थान के छाजूराम की आखिरकार केंद्रीय जल शक्ति मंत्री और जोधपुर सांसद गजेंद्र सिंह शेखावत के सफल प्रयासों से स्वदेश वापसी हो ही गई. सऊदी अरब की जेल में बंद झुंझुनू के उदयपुरवाटी निवासी छाजूराम जांगिड़ ने स्वदेश वापसी की उम्मीद तक छोड़ दी थी. हालांकि केंद्रीय मंत्री शेखावत के प्रयासों से छाजूराम अब अपने परिवार के पास वापस लौट आए हैं.
दरअसल, खरबासों की ढाणी निवासी छाजूराम जांगिड़ वर्ष 2017 में रोजगार के लिए सऊदी अरब गए थे. छाजूराम बताते हैं कि 18 अक्टूबर 2017 को अल सोहीन ट्रांसपोर्ट कंपनी में उन्हें चालक की नौकरी मिली थी, वहां बड़ाऊ रसूलपुर निवासी दौलत सिंह ने उनसे दोस्ती कर ली. हालांकि दोनों की कंपनी अलग-अलग थी, जहां एक दिन दौलत ने सप्लाई के दौरान साथ-साथ चलने की बात कही. रास्ते में उसने उनका ट्रक पार्क करवा दिया और चाय पीने के बहाने एक कमरे में ले गया.
छाजूराम ने बताया कि जब बाहर आकर देखा तो तीन पाकिस्तानियों समेत आधा दर्जन लोग उसके ट्रक से दूसरे ट्रक में सामान शिफ्ट कर रहे थे. रोका तो उसके साथ मारपीट की गई. उन्होंने बताया कि आरोपी उन्हें बंधक बनाकर जंगल ले गए ओर तीन अन्य लोगों के हवाले कर दिया.
अपनी दासता बताते हुए छाजूराम ने कहा कि कुछ दिन बाद वे मारपीट कर उनसे पैसों की डिमांड भी करने लगे. परिवार के लोगों ने कर्जा लेकर भारत से करीब साढ़े सात लाख रुपए भेजे,. बावजूद इसके उन्हें नहीं छोड़ा गया. उनके चंगुल में छह माह तक वह फंसा रहा.
वहीं दूसरी तरफ बंधक बनाने वालों ने उनकी कंपनी का ट्रक भी बेच दिया और सामान पारकर दिया. ऐसे में छाजूराम को वहां पर ढाई साल की सजा सुनाई गई और दूसरी तरफ कंपनी ने भी ढाई लाख का क्लेम कर दिया. ऐसे वक्त में छाजूराम को स्वदेश वापसी सपने जैसी लग रही थी और एक बार तो छाजूराम ने देश वापसी की उम्मीद भी छोड़ दी थी. हालांकि परिवार ने केंद्रीय मंत्री से संपर्क कर छाजूराम की स्वदेश वापसी के सफल प्रयास किए.
मंत्री शेखावत ने विदेश मंत्री एस जयशंकर से की थी बात
केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने विदेश मंत्री एस जयशंकर को मामले से अवगत कराया था. छाजूराम के पुत्र का कहना है कि लक्ष्मणदास महाराज के साथ पौंख निवासी विश्वेन्द्र सिंह और लोकेंद्र सिंह शेखावत से मुलाकात की , जहां से उन्होंने केंद्रीय जलशक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत से बात करवाई. शेखावत ने समय गंवाए बिना विदेश मंत्री एस जयशंकर से बात की. विदेश मंत्रालय ने सऊदी अरब में वकील की व्यवस्था करवाई और छाजूराम की स्वदेश वापसी सम्भव हो पाई.
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महाराष्ट्र में शिवसेना बनाम शिवसेना मामले में सुप्रीम कोर्ट एकनाथ शिंदे गुट के विधायकों के खिलाफ लंबित अयोग्यता मामले का परीक्षण करेगा. इसे लेकर सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र विधानसभा के स्पीकर को नोटिस जारी किया है. साथ ही दो हफ्ते में जवाब मांगा है. सुप्रीम कोर्ट एकनाथ शिंदे गुट के विधायकों के खिलाफ लंबित अयोग्यता के मामले में शिवसेना के उद्धव ठाकरे गुट के विधायक सुनील प्रभु की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई कर रहा है.
मुख्य न्यायाधीश जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़, जस्टिस पी एस नरसिम्हा और जस्टिस मनोज मिश्रा की तीन जजों की बेंच ने सुनवाई की.
सुनील प्रभु ने अपनी याचिका में महाराष्ट्र विधानसभा स्पीकर को एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले बागी विधायकों के खिलाफ अयोग्यता याचिकाओं पर शीघ्र फैसला लेने के लिए सुप्रीम कोर्ट से निर्देश देने की मांग की है.
सुनील प्रभु ने अपनी याचिका में कहा कि हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने 11 मई के अपने फैसले में स्पीकर से लंबित अयोग्यता याचिकाओं पर उचित अवधि के भीतर फैसला करने के लिए कहा था, लेकिन स्पीकर ने इस संबंध में कोई कदम नहीं उठाया है.
उन्होंने कहा कि वह पहले ही इस संबंध में स्पीकर को तीन ज्ञापन दे चुके हैं, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ है.
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बीते दिनों में अटलांटिक महासागर की गहराइयों में डूबे टाइटैनिक जहाज को देखने गई एक टूरिस्ट पनडुब्बी विस्फोट का शिकार हो गई थी. हादसे में पनडुब्बी पर सवार सभी पांच यात्रियों की मौत हो गई थी. अप इस हादसे को लेकर एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें ग्राफिक के जरिए यह बाताया गया है कि टूरिस्ट पनडुब्बी में कैसे विस्फोट हुआ? वीडियो के माध्यम से इस भयानक त्रासदी के कारण और परिणाम का वर्णन समुद्र वैज्ञानिकों और समुद्री व्यापारिक संगठनों द्वारा विभिन्न तरीकों से किया गया है.
6 मिनट, 20 सेकंड का एनीमेशन वीडियो, जिसे 30 जून को एक यूट्यूब चैनल ऐटेली द्वारा पोस्ट किया गया था, पोस्टिंग के केवल 12 दिनों में 6 मिलियन से अधिक बार देखा गया है. 18 जून को टाइटैनिक के मलबे की ओर उतरने के बाद दो घंटे से भी कम समय में पनडुब्बी रडार से गायब हो गई. चार दिनों तक चले खोज अभियान के बाद, यूएस कोस्ट गार्ड ने कहा कि जहाज विस्फोट हो गया, जिससे सभी पांच यात्रियों की मौत हो गई.
वीडियो में उपयोग किया गया एनीमेशन विस्तार से बताता है कि विस्फोट आसपास के पानी के बहुत उच्च हाइड्रोस्टेटिक दबाव के कारण हुआ था, जो एक मिलीसेकंड के एक अंश के भीतर हुआ था. यह एनीमेशन में दिखाया गया है. "टाइटैनिक जिस गहराई पर है, उस पर लगभग 5600 पाउंड प्रति वर्ग इंच का दबाव है. यह सतह पर हमारे द्वारा अनुभव किए गए दबाव का लगभग 400 गुना है. दबाव के कारण ही यह विस्फोट हुआ है.
अमेरिका कोस्ट गार्ड ने कहा कि मिशन के संचालक ओशनगेट एक्सपेडिशन को इस जगह की काफी समझ है. कार्बन फाइबर और टाइटेनियम से बने 6.7 मीटर लंबे लापता टाइटन के किसी भी संकेत को खोजने में हवाई खोज अभी तक विफल रही है.
भोपाल: मध्य प्रदेश के कई शहरों में ग्रुप- 2, सब ग्रुप- 4 पटवारी परीक्षा परिणाम में कथित अनियमितता की बात कहकर छात्रों ने गुरूवार को प्रदर्शन किया. वहीं, इस मामले पर सरकार की ओर से सफाई भी दी गई. सरकार ने कांग्रेस को कठघरे में खड़ा करते हुए उसपर प्रदेश को बदनाम करने का आरोप लगाया है. हालांकि, CM शिवराज सिंह ने इस पूरे मामले पर एक्शन लेते हुए परीक्षा के आधार पर की जाने वाली नियुक्तियों को रोक दिया है.
CM शिवराज सिंह ने कहा कि कर्मचारी चयन मंडल द्वारा समूह- 2, उप समूह- 4 औक पटवारी भर्ती परीक्षा के परीक्षा परिणाम में एक सेंटर के परिणाम पर संदेह व्यक्त किया जा रहा है. इस परीक्षा के आधार पर की जाने वाली नियुक्तियां अभी रोक रहा हूं। सेन्टर के परिणाम का पुन परीक्षण किया जाएगा.
सरकार की ओर से कहा गया कि कांग्रेस विश्व की आधुनिकतम चयन परीक्षा प्रणाली पर सवाल उठा रही है और एक के बाद एक श्रंखलाबद्ध झूठ बोल रही है. सरकार ने ये भी आरोप लगाया कि सरकार ग्वालियर के युवाओं की प्रतिभा को कठघरे में खड़ा कर रही है.
मध्य प्रदेश सरकार के प्रवक्ता डॉ नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि कोई गड़बड़ी नहीं हो रही है. प्रदेश को बदनाम कर रहे हैं. ये देश की सबसे प्रतिष्ठित कंपनी है, जिसने आईआईटी और नीट की परीक्षा कराया है. नौकरियां देने का सिलसिला 1 लाख से ज्यादा है ये पीड़ा है कि आप 1 नहीं दे पाए.
सरकार ने बताया कि 1000 नहीं, चयनित उम्मीदवारों में 114 अभ्यर्थियों का सेंटर ग्वालियर स्थित NRI कॉलेज था. टॉप 10 के सारे उम्मीदवारों की परीक्षा तारीख और पाली अलग-अलग है. यानी इन सबके प्रश्न-पत्र भी अलग-अलग थे. 10 टॉपर्स में से 2 अनारक्षित, 1 EWS- विकलांग, 1 SC, 6 OBC श्रेणी से हैं. टॉप 10 अभ्यर्थियों में से 6 ने हिंदी में और 4 ने अंग्रेजी में हस्ताक्षर किये हैं. टॉप 10 के किसी भी उम्मीदवार को अंग्रेजी में पूरे अंक नहीं मिले हैं, बल्कि 13 से 23 के बीच नंबर आए हैं.
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महाराष्ट्र में शिवसेना के एकनाथ शिंदे गुट के विधायकों के खिलाफ लंबित अयोग्यता के मामले में शिवसेना के उद्धव ठाकरे गुट के विधायक सुनील प्रभु की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट 14 जुलाई को सुनवाई करेगा. मुख्य न्यायाधीश जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस मनोज मिश्रा की तीन जजों की बेंच मामले की सुनवाई करेगी.
अपनी याचिका में सुनील प्रभु ने महाराष्ट्र विधानसभा स्पीकर को एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले बागी विधायकों के खिलाफ अयोग्यता याचिकाओं पर शीघ्र फैसला लेने के लिए निर्देश देने की मांग सुप्रीम कोर्ट से की है.
सुनील प्रभु ने अपनी याचिका मे कहा है कि हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने 11 मई के अपने फैसले में स्पीकर से लंबित अयोग्यता याचिकाओं पर उचित अवधि के भीतर फैसला करने को कहा था, लेकिन स्पीकर ने इस संबंध में कोई कदम नहीं उठाया है. उन्होंने कहा है कि वे पहले ही इस संबंध में स्पीकर को तीन ज्ञापन दे चुके हैं, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ है.
सरकार ने सोने के कुछ आभूषणों और अन्य सामान के आयात पर बुधवार को ‘अंकुश' लगाने की घोषणा की. इस कदम से कुछ गैर-जरूरी वस्तुओं के आयात पर रोक लगाने में मदद मिलेगी. अब आयातक को इन स्वर्ण उत्पादों के आयात के लिए सरकार से लाइसेंस की अनुमति लेनी होगी.
हालांकि विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) ने स्पष्ट किया है कि ये अंकुश भारत और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के बीच लागू मुक्त व्यापार करार (FTA) के तहत होने वाले आयात पर लागू नहीं होंगे.
डीजीएफटी ने एक अधिसूचना में कहा कि इन उत्पादों के आयात की नीति को तत्काल प्रभाव से संशोधित कर 'मुक्त' से 'अंकुश' की श्रेणी में डाल दिया गया है.
चालू वित्त वर्ष की अप्रैल-मई की अवधि में मोती एवं मूल्यवान रत्नों का आयात 25.36 प्रतिशत घटकर चार अरब डॉलर पर आ गया है. इस दौरान सोने का आयात भी 40 प्रतिशत घटकर 4.7 अरब डॉलर रह गया है.
चालू वित्त वर्ष में अप्रैल-मई के दौरान कुल व्यापारिक आयात 10.24 प्रतिशत घटकर 107 अरब अमेरिकी डॉलर रह गया. अप्रैल-मई 2023 में व्यापारिक व्यापार घाटा अप्रैल-मई 2022 के दौरान 40.48 बिलियन अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 37.26 बिलियन अमेरिकी डॉलर रहा.
(इनपुट पीटीआई से भी)
राजस्थान में विधानसभा चुनाव की सुगबुगाहट के बीच जोधपुर शहर के अति महत्वपूर्ण एलिवेटेड कॉरिडॉर प्रोजेक्ट का मुद्दा फिर एक बार सुर्खियों में है. शहर की हाट लाइन पर यातायात की व्यवस्था को सुचारू बनाने के लिए 10.7 किलोमीटर लंबी मल्टीलेवल एलिवेटेड कॉरिडोर प्रोजेक्ट को लेकर स्थानीय सांसद और केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत का प्रयास चुनावी दांव के रूप में देखा जा रहा है. 1858 करोड़ रुपये के इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट को लेकर मंगलवार को दिल्ली में केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत और सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी के बीच बैठक हुई. बैठक में शामिल अधिकारियों ने जोधपुर के इस 'फ्यूचर रेडी प्रोजेक्ट' से जुड़ी पॉवर प्वाइंट प्रजेंटेशन भी दी. जोधपुर में मल्टीलेवल एलिवेटेड कॉरिडोर के निर्माण से शहरवासियों को यातायात दबाव से भी राहत मिलेगी. साथ ही वाहन चालकों को आवागमन में समय की बचत होगी तो यह एलिवेटेड रोड शहर के औद्योगिक विकास को भी गति देगा.
केंद्रीय मंत्री शेखावत ने कहा कि इस बैठक में जोधपुर में एलिवेटेड कॉरिडोर पर विशेष चर्चा हुई. 10.7 किमी का एक फ्यूचर रेडी प्रोजेक्ट है. जोधपुर का यातायात व्यवस्थित रहे इसके लिए डबल डेकर फ्लाईओवर प्रस्तावित है. इस परियोजना को लेकर मैं अति उत्साहित हूं. इसका काम पूरा होना मेरे जनसेवा के एक बड़े सपने को साकार करना होगा.
केंद्र व राज्य में भी चली आ रही थी खींचतान
जोधपुर में एलिवेटेड रोड के इस प्रस्ताव को लेकर कई वर्षों से केंद्र और राज्य सरकार के बीच खींचतान चली आ रही थी, जहां अब प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पूर्व केंद्र सरकार ने इस महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट पर काम शुरू कर चुनावी दांव खेला है. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत अपने गृह जिले के इस प्रोजेक्ट को लेकर कई बार उच्चाधिकारियों की बैठक भी ले चुके हैं. हाल ही में 29 जून को सीएम गहलोत ने अपने आवास पर जोधपुर में प्रस्तावित मल्टीलेवल एलिवेटेड रोड प्रोजेक्ट की समीक्षा बैठक भी की थी.
हेरिटेज लुक और एडवांस तकनीक से होगा लैस
जोधपुर में प्रस्तावित एलिवेटेड कॉरिडोर का 1858 करोड़ रुपए का प्रोजेक्ट संभवतया जिले का सबसे बड़ा प्रोजेक्ट होगा. इस हाईब्रिड एलिवेटेड रोड के लिए डबल डेकर पुल बनेगा. इसमें सबसे नीचे सड़क, उसके ऊपर फ्लाईओवर और तीसरे लेयर पर मेट्रो का ट्रैक प्रस्तावित है. हेरिटेज नहीं बिगड़े इसलिए पिलर भी हेरिटेज लुक के साथ बनेंगे. एलिवेटेड रोड के निर्माण के दौरान स्थानीय विरासतों और हेरिटेज का भी विशेष ध्यान रखा जाएगा. इससे शहर का ट्रैफिक आगामी 50 साल तक सुगम रह पाएगा. जहां अभी शहर की हार्टलाइन पर 74 हजार पैसेंजर कार यूनिट का ट्रैफिक दबाव है. एलिवेटेड रोड शहर के मंडोर रोड से शुरू होकर आखलिया तिराहे से प्रतापनगर रोड के समानांतर तक बनेगा.
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पाकिस्तान के निर्वाचन आयोग (Election Commission of Pakistan) ने मंगलवार को अवमानना के एक मामले में पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के खिलाफ गैर जमानती गिरफ्तारी वारंट जारी किया. ईसीपी ने समान अपराध के लिए पूर्व सूचना और प्रसारण मंत्री फवाद चौधरी के खिलाफ भी गैर-जमानती गिरफ्तारी वारंट जारी किया. ईसीपी ने पिछले साल पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के प्रमुख खान और पार्टी के पूर्व नेताओं चौधरी तथा असद उमर के खिलाफ ईसीपी और मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) के खिलाफ कथित तौर पर ‘‘अमर्यादित'' भाषा का इस्तेमाल करने के लिए अवमानना कार्यवाही शुरू की थी.
खान और चौधरी के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट आदेश ईसीपी के सदस्य निसार दुर्रानी की अध्यक्षता वाली चार सदस्यीय पीठ द्वारा पारित किया गया, जब दोनों पीटीआई नेता कई चेतावनियों के बावजूद मंगलवार को उसके सामने पेश नहीं हुए.
हालांकि, उमर को राहत दे दी गई जब उनके वकील ने ईसीपी को बताया कि उन्हें एक और मामले में पेश होना है और उन्होंने चिकित्सा वजहों का उल्लेख करते हुए हाजिर होने से छूट का अनुरोध किया.
निर्वाचन आयोग ने अनुरोध स्वीकार कर लिया और वकील को इस संबंध में एक औपचारिक अर्जी प्रस्तुत करने का निर्देश दिया, लेकिन उसने खान और चौधरी के खिलाफ गैर जमानती गिरफ्तारी वारंट जारी किया तथा सुनवाई 25 जुलाई तक स्थगित कर दी.
ईसीपी ने पीटीआई नेताओं को अपना रुख स्पष्ट करने के लिए निजी रूप से या अपने वकील के माध्यम से उपस्थित होने के लिए कहा था, लेकिन इसके बजाय, उन्होंने ईसीपी नोटिस और अवमानना कार्यवाही को उच्च न्यायालयों में चुनौती दी.
लंबी कार्यवाही के बाद जनवरी में उच्चतम न्यायालय ने ईसीपी को खान, चौधरी और उमर के खिलाफ कार्यवाही जारी रखने की अनुमति दी. इसके बाद, ईसीपी ने उनके खिलाफ आरोप तय करने का फैसला किया.
पिछले साल अप्रैल में सत्ता से बाहर होने के बाद से 70 वर्षीय खान को विभिन्न अदालतों में कई मामलों का सामना करना पड़ रहा है. एक समय खान के वफादार माने जाने वाले चौधरी ने नौ मई को पार्टी समर्थकों द्वारा की गई हिंसा के बाद पार्टी छोड़ दी थी. खान को इस्लामाबाद उच्च न्यायालय के परिसर से गिरफ्तार किए जाने के बाद नौ मई को देश भर में हिंसक विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए.
बाद में सरकार ने खान की पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं के खिलाफ बड़े पैमाने पर कार्रवाई शुरू की और नागरिक और सैन्य प्रतिष्ठानों पर हमला करने के आरोप में हजारों लोगों को गिरफ्तार किया गया.
खान के समर्थकों ने पूर्व प्रधानमंत्री की गिरफ्तारी के विरोध में लाहौर कोर कमांडर हाउस, मियांवाली एयरबेस और फैसलाबाद में आईएसआई भवन सहित एक दर्जन सैन्य प्रतिष्ठानों में तोड़फोड़ की थी. पुलिस ने हिंसक झड़पों में मरने वालों की संख्या 10 बताई, जबकि खान की पार्टी का दावा है कि सुरक्षाकर्मियों की गोलीबारी में उसके 40 कार्यकर्ताओं की मौत हुई.
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सवाई माधोपुर के रणथंभौर स्थित होटल नाहरगढ़ में दो दिवसीय भाजपा की विजय संकल्प बैठक का समापन हो गया. दो दिवसीय भाजपा की विजय संकल्प बैठक में 8 सत्रों में भाजपा ने बैठक के दौरान आगामी विधानसभा व लोकसभा चुनाव को लेकर विस्तार पूर्वक चुनावी रणनीति पर चिंतन मनन एंव मंथन किया. बैठक के दौरान राष्ट्रीय संगठन मंत्री बीएल संतोष ने कई मुद्दों पर भाजपा नेताओं से सुझाव भी लिए. बैठक में भाजपा के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सीपी जोशी, प्रदेश प्रभारी अरुण सिंह, केंद्रीय मंत्री कैलाश चौधरी, अर्जुन राम मेघवाल, गजेंद्र सिंह शेखावत, नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़,सांसद सुखबीर सिंह जौनपुरिया, जसकौर मीणा, राज्यवर्धन सिंह राठौड़, दीया कुमारी, पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सहित कई दिग्गज नेता मौजूद रहे.
दूसरे दिन की विजय संकल्प बैठक सुबह 9:00 बजे से लेकर शाम 5:00 बजे तक लंबी बैठक चली. इस बैठक के पश्चात भाजपा द्वारा पत्रकार वार्ता का आयोजन किया गया. जिसमें भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सीपी जोशी ,नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ ,केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल मौजूद रहे. पत्रकार वार्ता के दौरान सीपी जोशी ने मीडिया को जानकारी देते हुए कहा कि आगामी विधानसभा चुनावों में भाजपा हर बूथ पर जीत के साथ 2023 में ऐतिहासिक जीत का बैठक में संकल्प लिया गया है.
उन्होंने कहा कि बैठक में महिला विरोधी एंव दलित विरोधी प्रदेश की कांग्रेस सरकार को उखाड़ फेंकने का संकल्प लिया गया. तुष्टिकरण का परिवारवाद की राजनीति को समाप्त करने का भी संकल्प बैठक में लिया गया. उन्होंने जानकारी देते हुए कहा कि आगामी 18 जुलाई को अजमेर में कांग्रेस के कुशासन एंव युवाओं को छत्रवृति नही देने के खिलाफ भाजपा द्वारा बड़ा आंदोलन किया जाएगा. इस अवसर पर नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ ने मीडिया को जानकारी देते हुए कहा कि आगामी विधानसभा सत्र में विभिन्न मुद्दों पर भाजपा द्वारा कांग्रेस सरकार को जमकर घेरा जाएगा.
जोधपुर में पूनिया की प्याऊ मामला एक बार फिर गरमा गया है. इस मामले को लेकर एक समाज के लोगों की रविवार को महापंचायत हुई. इसके बाद समाज के लोगों ने कलेक्ट्रेट की ओर कूच किया है. सरकारी जमीन पर अतिक्रमण को लेकर पिछले कुछ दिनों से विवाद चल रहा है. हालात यहां तक पहुंच गए थे कि दो पक्षों के बीच पथराव भी हो चुका है. ऐसे में इस मामले में प्रशासन सतर्क है और भारी संख्या में पुलिस बल को तैनात किया गया है.
जोधपुर के अरणा-झरना में रविवार को एक समाज के लोगों की महापंचायत का आयोजन किया गया. इस दौरान समाज के लोगों ने जोधपुर कलेक्ट्रेट की ओर कूच करने का निर्णय लिया. महापंचायत के बाद 100 से अधिक वाहनों में सवार होकर समाज के लोग जोधपुर कलेक्ट्रेट के लिए रवाना हुए.
वहीं मामले की गंभीरता और तनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने भारी पुलिस बल तैनात किया है. साथ ही आरएसी के जवानों को भी लगाया गया है. स्थिति से निपटने के लिए आला अधिकारी भी मौके पर मौजूद हैं.
बता दें कि जोधपुर के केरू गांव में सरकारी जमीन पर पौधे लगाने की बात पर दो पक्षों के बीच विवाद है. एक पक्ष ने इस जमीन पर पौधे लगाए तो दूसरे पक्ष ने जेडीए के बाहर धरना देकर अतिक्रमण को हटाने की मांग की थी. इसी बीच किसी ने पौधे उखाड़ दिए, जिसके बाद पौधे लगाने वाले पक्ष ने इसका विरोध किया. वहीं 30 जून को दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए थे. पथराव के बाद पुलिस को आंसू गैस के गोले छोड़कर स्थिति को नियंत्रित करना पड़ा था. कुछ लोगों के साथ पुलिसकर्मियों को भी चोटें आई थी.
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दिल्ली मेट्रो के कैलाश कॉलोनी स्टेशन पर शनिवार सुबह 25 वर्षीय एक युवक ने कथित तौर पर मेट्रो रेल के सामने कूदकर आत्महत्या कर ली. पुलिस ने यह जानकारी दी है. इस घटना का एक सीसीटीवी भी सामने आया है. मृतक की पहचान अजय अर्जुन शर्मा के रूप में हुई है, जो ईस्ट ऑफ कैलाश का रहने वाला था.
वारदात का सीसीटीवी भी सामने आया है जिसमें अजय अर्जुन शर्मा नाम का 25 साल का युवक स्टेशन पर खड़ा हुआ दिखाई दे रहा है. जैसे ही तेज रफ्तार से मेट्रो ट्रेन प्लेटफार्म पर आती है, अजय पटरी मेट्रो के सामने कूद जाता है. हालांकि मेट्रो आगे जाकर रुकती है, लेकिन इस घटना के दौरान अजय की मौत हो गई.
पुलिस के मुताबिक, अजय के शव को मेट्रो की पटरी से हटाकर अस्पताल भेज दिया गया है.
पुलिस के अनुसार, अपराध शाखा को घटना के बारे में सूचित कर दिया गया है और सीसीटीवी फुटेज एकत्रित किए जा रहे हैं. उन्होंने बताया कि घटना से मेट्रो परिचालन पर कोई असर नहीं पड़ा.
पुलिस ने कहा कि दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा-174 (आत्महत्या जैसे मामलों में पुलिस का जांच करना और रिपोर्ट देना) के तहत कार्यवाही शुरू कर दी गई है.
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राजस्थान में विधानसभा चुनाव का समय जितना नजदीक आता जा रहा है, उतना ही प्रदेश में नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप और बयानबाजी का दौर बढ़ता जा रहा है. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के राजनीतिक क्षेत्र में घोर विरोधी माने जाने वाले जोधपुर सांसद व केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने गहलोत सरकार के राहत कैंप पर तंज कसते हुए राज्य सरकार पर सीधा हमला बोला है. दरअसल, शेखावत शनिवार को जोधपुर के लोहावट व फलोदी क्षेत्र के दौरे पर थे. इस दौरान मीडिया से अनौपचारिक बात करते हुए शेखावत ने गहलोत सरकार की महंगाई राहत घोषणा पर तंज कसते हुए कहा कि इस राहत के पिटारे की असलियत जनता समझ चुकी है. उन्होंने कहा कि जनता की जेब से पैसे निकाल कर उसे महंगाई राहत के नाम पर वापस लौटाने के नाटक से अब जनता को बहकाया नहीं जा सकता.
गहलोत सरकार के पांच सौ रुपये में सिलेंडर देने की योजना पर सवाल खड़े करते हुए शेखावत ने कहा कि देश में अन्य प्रदेशों की तुलना में राजस्थान में पेट्रोल दस रुपये ज्यादा मांगा है. इससे राज्य सरकार छह सौ करोड़ रुपए प्रदेश की जनता की जेब से हर माह अतिरिक्त निकाल रही है. साढ़े चार साल तक जनता से तीस हजार करोड़ रुपये लूटे जा चुके हैं और अब आप पांच सौ रुपये गैस सिलेंडर के लिए देकर राहत देने का नाटक कर रहे हो, देश और प्रदेश की जनता इसी अच्छे से समझती है. शेखावत ने इसके साथ ही किसानों को दी जा रही है फ्री बिजली और अपने ऊपर लगे संजीवनी प्रकरण के आरोपों पर भी खुलकर बात रखी.
पूर्ववर्ती वसुंधरा सरकार की सब्सिडी बंद करने का लगाया आरोप
गहलोत सरकार की ओर से किसानों को बिजली मुफ्त देने की घोषणा पर सवाल खड़े करते हुए शेखावत ने कहा कि पूर्ववर्ती वसुंधरा राजे सरकार के समय से किसानों को दस हजार रुपए प्रति वर्ष की सब्सिडी कृषि कनेक्शनों में मिलती थी. गहलोत सरकार ने वह सब्सिडी दो साल से बंद कर दी, यानी दो साल तक किसान के हक का 20 हजार रुपए मार लिया गया. उसके बाद अब राज्य सरकार किसान को दो हजार यूनिट बिजली फ्री करने की बात कर रही है. जहां बारिश का दौर शुरू होने से राजस्थान के 99 प्रतिशत किसानों को अभी बिजली की जरूरत नहीं है. सरकार मुश्किल से एक महीने की दो हजार रुपए की राहत देकर के 20 हजार रुपए को बराबर करना चाहती है.
राजस्थान में मोदी के चेहरे पर चुनाव लड़ेगी भाजपा
राजस्थान में मुख्यमंत्री के चेहरे को लेकर भाजपा में चली आ रही खींचतान पर विराम लगाते हुए केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि भाजपा में मुख्यमंत्री का नाम तय करने का काम संसदीय बोर्ड करेगा. भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और पूर्व अध्यक्ष अमित शाह कई बार कह चुके हैं कि राजस्थान में विधानसभा चुनाव में हमारा चेहरा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी होंगे. दुनिया का सबसे लोकप्रिय चेहरा हमारे पास है. उन्होंने कहा कि मैं जिस विचारधारा से आता हूं उसमें कौन व्यक्ति क्या काम करेगा, यह तय करने का काम संगठन करता है. मेरे मार्गदर्शक जैसा काम देंगे, वही काम पूरी ऊर्जा से करूंगा.
शेखावत में खुद पर लगे आरोपों को बताया निराधार
केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत पर संजीवनी प्रकरण में लगे आरोपों पर बात करते हुए कहा कि मेरे ऊपर जितने भी आरोप अब तक लगाए गए हैं, सब निराधार हैं. किसी भी कोर्ट ने मुझ पर कोई प्रसंज्ञान नहीं लिया, जबकि मैंने मानहानि का जो दावा किया था उस पर कोर्ट ने प्रसंज्ञान लेकर मुख्यमंत्री को समन भेजा है.
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दिल्ली के शराब नीति केस (Delhi Liquor Scam) में तिहाड़ जेल में बंद पूर्व डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया (Manish Sisodia) को प्रवर्तन निदेशालय (ED) की तरफ से एक और झटका लगा है. ईडी ने शुक्रवार को मनीष सिसोदिया और उनकी पत्नी समेत कई आरोपियों की कुल 52 करोड़ की संपत्ति कुर्क की है. इसमें सिसोदिया के 5 लाख और 65 लाख रुपये के दो फ्लैट, बैंक अकाउंट में जमा 11.5 लाख रुपये भी शामिल हैं. वहीं, बीजेपी सिसोदिया की करोड़ों की संपत्ति जब्त किए जाने के दावे कर रही है. ऐसे में दिल्ली सीएम अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) और आम आदमी पार्टी के नेता सिसोदिया के बचाव में उतर आए हैं.
सिसोदिया के बचाव में उतरे केजरीवाल
अरविंद केजरीवाल ने ट्वीट किया, "प्रधानमंत्री जी, जब आपको मनीष सिसोदिया के खिलाफ कुछ नहीं मिला तो आपने ED के जरिये मनीष को बदनाम करना चालू कर दिया? आपकी ED शाम से टीवी चैनलों पर झूठी खबरें चलवा रही है कि मनीष सिसोदिया की 52 करोड़ की संपत्ति जब्त की गई. ED ने असल में जो संपत्ति जब्त की है, उसके कागजात ये रहे. टोटल 81 लाख की संपत्ति जब्त की है, वो भी 2018 के पहले की. जब एक्साइज नीति बनी ही नहीं थी. पूरी संपत्ति एक नंबर की है. Declared." केजरीवाल ने आगे लिखा, "असली भ्रष्टाचारी कौन हैं, ये आप भी जानते हैं. उन्हें पकड़ कर दिखाइए."
बीजेपी के शर्मनाक झूठ का खुलासा: आतिशी
दिल्ली सरकार में मंत्री आतिशी ने भी सिसोदिया की संपत्ति जब्त करने को लेकर बीजेपी पर निशाना साधा. उन्होंने कहा, "बीजेपी के एक और शर्मनाक झूठ का खुलासा हुआ है. मीडिया में मनीष सिसोदिया के 50 करोड़ की संपत्ति का झूठ फैलाया जा रहा है. ईडी के पास मनीष सिसोदिया के खिलाफ कोई सबूत नहीं है. यही कारण है कि अब ED ने सिसोदिया की 2 प्रॉपर्टी अटैच की हैं. इनमें से एक 2005 में 5 लाख रुपये में खरीदा गया गाजियाबाद के वसुंधरा का फ्लैट है. दूसरा 2018 में दिल्ली के मयूर विहार में खरीदा गया 65 लाख रुपये का फ्लैट है. ये दोनों ही फ्लैट 2018 से पहले खरीदे गए, जब एक्साइज पॉलिसी का दूर तक कहीं जिक्र भी नहीं था.
ईडी के डॉक्यूमेंट देखें बीजेपी नेता-आतिशी
आतिशी आगे कहती हैं, "इसके अलावा ईडी ने सिसोदिया के बैंक अकाउंट भी जब्त किए हैं, जिसमें 11.5 लाख रुपये थे. ऐसे में कुल मिलाकर ईडी ने सिसोदिया की 81 लाख की संपत्ति जब्त की है. लेकिन, बीजेपी वाले इसे करोड़ों की संपत्ति बता रहे हैं. क्योंकि बीजेपी जानती है कि ये आम आदमी पार्टी के नेता ही हैं, जो जेल जाने के बाद भी टूटकर बीजेपी में शामिल नहीं हुए. मैं बीजेपी से कहना चाहूंगी कि मीडिया में कुछ भी कहने से पहले ईडी के डॉक्यूमेंट देखिए."
झूठ बोलने की भी सीमा होती है-सौरभ भारद्वाज
दिल्ली सरकार के एक अन्य मंत्री सौरभ भारद्वाज ने भी बीजेपी पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि भाई झूठ बोलने की भी कोई सीमा होती है. सिसोदिया तीन चुनावों में एफिडेविट दें चुके हैं. ED ने खुद उनकी दो संपत्ति की कीमत 5 लाख और 65 लाख बताई है. थोड़ा तो भगवान से डरो.
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तिरुवनंतपुरम: केरल में संक्षिप्त अंतराल के बाद बृहस्पतिवार को दक्षिण पश्चिम मानसून की भारी वर्षा हुई तथा दो जिलों के लिए रेड अलर्ट जारी किया गया, जहां हजारों लोग अपने घरों से विस्थापित हो गये हैं. वर्षा जनित घटनाओं में तीन लोगों की जान भी चली गई. भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने आज के लिए कन्नौर और कसारगोड जिलों के लिए ‘रेड अलर्ट' तथा सात अन्य जिलों के लिए ‘ऑरेंज अलर्ट' जारी किया. वैसे उसने यह भी संकेत दिया कि अगले कुछ दिनों में वर्षा की तीव्रता कम हो सकती है.
रेड अलर्ट इस बात का संकेत होता है कि 24 घंटे में भारी से भीषणतम वर्षा यानी 20 सेंटीमीटर से अधिक वर्षा हो सकती है. ऑरेंज अलर्ट छह सेंटीमीटर से 20 सेंटीमीटर तक वर्षा होने का संकेत देता है .खराब मौसम के मद्देनजर मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने लोगों से चौकन्ना रहने की अपील की क्योंकि राज्य के विभिन्न भागों में आकस्मिक बाढ़ आने , भूस्खलन होने तथा आंधी-तूफान चलने की आशंका है.
विजयन ने एक फेसबुक पोस्ट में कहा कि पथानमथिट्टा, अलाप्पुझा, कोट्टायम, एर्नाकुलम, मलप्पुरम और कासरगोड जिलों में कुल 47 राहत शिविर स्थापित किए गए हैं और 879 लोगों को वहां स्थानांतरित किया गया है. मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि भारी बारिश जारी रहने के कारण अचानक बाढ़ आने, भूस्खलन होने और निचले इलाकों में जलभराव की संभावना है और इसलिए लोगों और सरकारी एजेंसियों को सतर्क रहना चाहिए और सावधानी बरतनी चाहिए.
बारिश की वजह से पेड़ उखड़ने के कारण कई मकान क्षतिग्रस्त हो गए या नदी में जलस्तर बढ़ने से आई बाढ़ में बह गये जिससे बेघर हुए लोगों को राहत शिविरों में शरण लेनी पड़ी. पिछली रात से लगातार हो रही बारिश की वजह से राज्य के विभिन्न जिलों में कई मकानों को नुकसान पहुंचा है. भारी बारिश के बाद इडुक्की जिले में मलंकारा बांध तथा कुछ अन्य बांधों के द्वार अतिरिक्त पानी छोड़ने के लिए खोल दिए गए. अन्य कई बांधों में जल स्तर में गिरावट देखी गई .
पिछले कुछ दिनों में पूरे केरल में लगातार भारी बारिश होने से सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ है. जगह जगह सड़कें पानी में डूबी हैं, नदियों और बांधों में जल स्तर बढ़ गया है, पेड़ उखड़ने से घर क्षतिग्रस्त हो गए हैं और तटीय इलाकों में भी समुद्री लहरों के कारण मकानों को नुकसान हुआ है.
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मैट्रिमोनियल साइट्स में लगातार धोखाधड़ी के मामले बढ़ते जा रहे हैं. ताज़ा मामला इंदौर के एरोड्रम थाना का है. यहां एक शख्स ने एक मैट्रिमोनियल साइट पर फेक प्रोफाइल बनाई. लड़की के घरवाले ने जब साइट पर देखा तो लड़का उन्हें पसंद आ गया. इसी बीच बातचीत का सिलसिला भी शुरु हुआ. लड़के ने परिजनों से कहा कि वो डॉक्टरी की पढ़ाई के लिए पैसे चाहिए. परिजनों ने बिना देर किए हुए लाखों रुपये पैसे ट्रांसफर कर दिए. पैसे मिलने के बाद शख्स ने अपनी प्रोफाइल डिलीट कर दी और फरार हो गया. परिजनों को तब होश आया जब मैट्रिमोनियल साइट से शख्स जा चुका था.
ये कहानी इंदौर के एरोड्रम थाना क्षेत्र के अंबिकापुरी में रहने वाले भगवान सिंह की है. उन्होंने थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई. उन्होंने पुलिस को जानकारी दी कि उनकी बेटी की शादी के लिए उन्होंने एक मैट्रिमोनियल साइट पर पर रिश्ता खोजा था. उनकी बात बलविंदर सिंह नामक युवक से हुई. उन्होंने अपनी बेटी का रिश्ता तय भी कर दिया था. दोनों के बीच बातचीत भी होती थी. वहीं आरोपी बलविंदर द्वारा खुद को मेडिकल का स्टूडेंट बताया और डॉक्टर की पढ़ाई में लगने वाली फीस का बहाना बनाकर आरोपी ने अलग-अलग माध्यम से पीड़िता से साढ़े 7 लाख रुपए अकाउंट में डलवा लिए. जिसके बाद उसने बात करना भी बंद कर दी और फोन भी बंद कर लिया.
अपनी बेटी से ठगी करने वाले लड़के जिसने अपना नाम बलविंदर सिंह बताया था उसकी तलाश में अपनी बेटी के साथ हरियाणा स्थित बताए गए पते पर पहुंचे तो वहां पर कोई भी नहीं मिला. इसके बाद फरियादी ने इंदौर के एरोड्रम थाने पहुंचकर अपने साथ हुई धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज कराई है पुलिस ने मामला दर्ज कर पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है.
इंदौर के डीसीपी आदित्य मिश्रा ने बताया कि एरोड्रम पुलिस थाना क्षेत्र में जो ठगी की वारदात सामने आई है. इसमें एक मैट्रिमोनियल साइट पर युवक द्वारा प्रोफाइल बनाने के बाद रिश्ता तय करने के लिए युवती से फोन पर संपर्क शुरू किया और उसे ठगी का शिकार बनाते हुए युवती से ऑनलाइन ऐप के माध्यम से लोन लेने के लिए प्रेरित किया. युवती ने ऑनलाइन लोन ऐप को डाउनलोड किया और युवक के अनुसार ही उससे रुपए लिए और फिर बाद में यह रुपए उसने अपने अकाउंट में डलवा लिया. जब रुपए की मांग की तो युवक ने बात करना बंद कर दी अपनी प्रोफाइल डिलीट कर दी. और अब तो फोन भी बंद कर दिया है पुलिस ने कहा कि वह इस मामले की बैंक अकाउंट के माध्यम से जांच कर रहे हैं.
पटना: बिहार के आठ जिलों में वज्रपात की चपेट में आकर पिछले 24 घंटे में 15 लोगों की मौत हो गई है. घटना पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शोक जताया है . अधिकारियों ने इसकी जानकारी दी. अधिकारियों ने बताया कि वज्रपात में मरने वालों में रोहतास में पांच, कटिहार, गया और जहानाबाद में दो-दो तथा खगड़िया, कैमूर, बक्सर और भागलपुर में एक-एक व्यक्ति की मौत हुई है.
मुख्यमंत्री ने इन सभी मौत पर शोक जताते हुये कहा है कि आपदा की इस घड़ी में वे प्रभावित परिवारों के साथ हैं. उन्होंने मृतक के परिजनों को अविलंब चार-चार लाख रूपये अनुग्रह अनुदान देने के निर्देश दिये है.
राज्य के बांका में 2, बक्सर में 2, भागलपुर में 1, रोहतास में 1, जहानाबाद में 1, औरंगाबाद में 1 एवं जमुई में 1 व्यक्ति की वज्रपात से मृत्यु दुःखद। मृतकों के आश्रितों को 4-4 लाख रु० अनुग्रह अनुदान दिया जाएगा। (1/2)
— Nitish Kumar (@NitishKumar) July 4, 2023
मुख्यमंत्री ने लोगों से अपील की है कि सभी लोग खराब मौसम में पूरी सतर्कता बरतें. खराब मौसम होने पर वज्रपात से बचाव के लिये आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा समय-समय पर जारी किये गये सुझावों का अनुपालन करें. खराब मौसम में घरों में रहें और सुरक्षित रहे.
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राजस्थान के श्रीगंगानगर निवासी क्रिकेटर मानव सुथार का भारत 'ए' की टीम में चयन हुआ है. मानव की इस उपलब्धि पर इलाके में ख़ुशी की लहर है. लोग आपस में मिठाई बांटकर ख़ुशी का इजहार कर रहे हैं. जिला क्रिकेट संघ सचिव विनोद सहारन के अनुसार, मानव सुथार ने एक मध्यम वर्गीय परिवार में पैदा होकर जिला क्रिकेट संघ, श्रीगंगानगर द्वारा संचालित एकेडमी में 12 वर्ष की आयु में खेलना प्रारम्भ किया. जिला क्रिकेट संघ के मुख्य कोच धीरज शर्मा के सानिध्य में प्रशिक्षण प्रारम्भ किया और अण्डर 14 व 16 के श्रीगंगानगर के कप्तान के रूप में खेलते हुए श्रीगंगानगर को विजयी बनाया व अण्डर 16, 19 व अण्डर 23 में राजस्थान की तरफ से खेलते हुए लगातार शानदार प्रदर्शन किया.
लगातार 10 वर्षों तक बीसीसीआई के सभी फार्मेट में शानदार प्रदर्शन कर रणजी ट्रॉफी में चयनित हुआ. उसके बाद मानव सुथार रणजी ट्रॉफी में भी शानदार प्रदर्शन की बदौलत दलीप ट्रॉफी में चयनित हुआ. मानव सुथार के प्रदर्शन की बीसीसीआई के सभी पदाधिकारियों ने प्रशंसा की है एवं आज बीसीसीआई सीनियर चयन समिति द्वारा भारत 'ए' की टीम में मानव सुथार का चयन किया गया है.
इस चयन पर श्रीगंगानगर के खेल प्रेमियों एवं जिला क्रिकेट संघ के पदाधिकारियों में खुशी की लहर है। जिला क्रिकेट संघ के अध्यक्ष मुकेश शाह, कोषाध्यक्ष जयदीप बिहाणी, सचिव विनोद सहारण व समस्त कार्यकारिणी द्वारा खुशी जाहिर की गयी.
मानव सुथार की खासियत
मुख्य कोच धीरज शर्मा ने बताया कि मानव सुथार की खासियत लेफ्ट आर्म स्पीन बॉलिंग हैं. वह एक ओवर में लेफ्ट आर्म स्पीन, आर्मर, सीम स्विंग में माहिर है. उन्होंने बताया कि सत्र 2022-23 में 92 विकेट व विभिन्न आयु वर्गों में लगभग 250 विकेट मानव ने अपने नाम किये। मानव सुथार इस साल आईपीएल में गुजरात टाइटंस टीम का सदस्य भी था. मानव सुथार बीसीसीआई का ZCA, NCA का प्रशिक्षण शिविर ले चुका है। मानव सुथार अण्डर-19 टीम का भी सदस्य रहा है.
महाराष्ट्र की सियासत (Maharashtra Crisis) में तेजी से घटनाक्रम बदल रहे हैं. शरद पवार (Sharad Pawar)के भतीजे अजित पवार (Ajit Pawar) के एनसीपी में बगावत करने और शिवसेना-बीजेपी सरकार में शामिल हो जाने के बाद अब पार्टी पर दावे की लड़ाई है. इसके लिए एनसीपी के शरद पवार गुट और अजित पवार गुट ने बुधवार को अहम मीटिंग बुलाई है. अजित पवार ने एनसीपी के सभी नेताओं और सांसदों को बुधवार की मीटिंग में मौजूद रहने को कहा है. ऐसा माना जा रहा है कि अजित पवार मीटिंग में पार्टी पर अपनी दावेदारी पेश कर सकते हैं. इस बीच NDTV ने बागी एनसीपी नेता प्रफुल्ल पटेल (Praful Patel) से खास बातचीत की. पटेल ने अजित पवार की बगावत पर कहा कि इसे एनसीपी का फैसला ही माना जाना चाहिए.
प्रफुल्ल पटेल ने कहा- "जो भी फैसला हमने लिया है वो एनसीपी के नाते ही लिया है. करीब-करीब सभी विधायकों, वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं का यही मानना रहा है कि हमे सरकार के साथ जाना चाहिए." शरद पवार और प्रफुल्ल पटेल की जोड़ी आखिर कैसे टूट गई? इसके जवाब में उन्होंने कहा-"शरद पवार मेरे गुरु हैं. आज भी, कल भी और हमेशा वो मेरे गुरु रहेंगे. मुझे जिंदगी में कभी भी मुश्किल घड़ी में कोई सलाह-मशवरा या मार्गदर्शन की जरूरत पड़ेगी, तो मैं उनके पास ही जाऊंगा. हम अलग नहीं हुए हैं. ठीक है इस मामले में मेरी और उनकी सोच अलग है. इसलिए हमने ये फैसला लिया. इसमें पवार साहब के खिलाफ जाकर कुछ करने जैसी कोई बात नहीं है."
शरद पवार को मंशा के बारे में थी जानकारी-पटेल
बागी एनसीपी नेता ने कहा- "शरद पवार हमारे लिए आदरणीय हैं. उनके लिए सम्मान और आदर हमेशा है ही." क्या शरद पवार को इस बगावत की सारी जानकारी थी? क्या वो इससे वाकिफ थे कि आप अलग गुट बनाकर बीजेपी-शिवसेना के साथ जा रहे हैं? इन सवालों के जवाब में प्रफुल्ल पटेल ने कहा-"कोई सरकार बन रही है ऐसा तो कुछ नहीं था कि जानकारी होगी. हां... पवार साहब को हमारी मंशा तो मालूम ही थी. एकनाथ शिंदे की बगावत के वक्त जब हमारी गठबंधन सरकार गिरने वाली थी, तब एनसीपी के करीब-करीब सभी विधायकों ने कहा था कि हो सके तो हमें बीजेपी के साथ सरकार बनानी की कोशिश करनी चाहिए. उस वक्त बात नहीं बनी, क्योंकि एकनाथ शिंदे और बीजेपी की सरकार बन चुकी थी."
शरद पवार साहब को हमारे साथ आना चाहिए-प्रफुल्ल पटेल
क्या शरद पवार ने ऐसा कहा कि आप लोगों को जाना है तो जाइए, मगर मैं नहीं जाऊंगा? सरकार में शामिल होने को लेकर पूछे गए इस सवाल पर प्रफुल्ल पटेल ने कहा, "हम तो चाहेंगे कि शरद पवार साहब को हमारे साथ रहना चाहिए. उन्हें सब अपना परिवार मानते हैं. हम चाहते हैं कि हमारा परिवार अच्छे तरीके से चलता रहे. विचारधारा की बात जहां तक थी, वो तो खत्म हो गई. हमें ऐसी कोई वैचारिक बात कही नहीं है, जिससे किसी को आपत्ति होनी चाहिए."
मोदी जी का नेतृत्व आज सभी को स्वीकार्य-पटेल
प्रफुल्ल पटेल ने NDTV से कहा- "BJP महाराष्ट्र में कोई छोटी पार्टी नहीं है. उसके साथ सरकार बनाने से राज्य का भला होगा. सरकार में स्थिरता भी बनी रहेगी. राष्ट्रीय स्तर पर भी देखा जाए तो मोदी जी का नेतृत्व आज सभी को स्वीकार्य है. वो देश के ही नहीं, दुनिया में भी लोकप्रिय नेता हैं. उनके पीएम काल में विदेश में भारत की काफी ख्याति बढ़ी है. इन सब चीजों को लेकर हमें आगे बढ़ना चाहिए."
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नागालैंड में मंगलवार शाम भूस्खलन के कारण एक पहाड़ी से बड़े-बड़े पत्थर गिरने के कारण दो कार इसकी चपेट में आ गए. इस घटना में 2 लोगों की मौत हो गई. दीमापुर और कोहिमा के बीच चुमौकेदिमा जिले में राष्ट्रीय राजमार्ग 29 पर भारी बारिश के बीच शाम करीब 5 बजे हुई दुर्घटना में तीन अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए. पीड़ितों की पहचान अभी तक नहीं हो पाई है. कोहिमा की ओर से आ रही दो कारों को पूरी तरह से कुचलने के बाद, पत्थरों में से एक दूसरी कार को गिराता हुआ चला गया. पीछे इंतजार कर रही एक कार के डैशबोर्ड में लगे कैमरे में यह भयानक तस्वीर कैद हो गई. हादसे का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है.
Video: Giant Boulder Crushes Cars After Landslide In Nagaland https://t.co/wQ00KIEOQO pic.twitter.com/5OdGajgGAv
— NDTV (@ndtv) July 4, 2023
समाचार एजेंसी पीटीआई ने अधिकारियों के हवाले से बताया है कि एक व्यक्ति की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दूसरे की अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हुई. रिपोर्ट में पुलिस के हवाले से दावा किया गया है कि एक अन्य व्यक्ति अभी भी कारों में से एक के अंदर फंसा हुआ है और बचाव कार्य जारी है.
मुख्यमंत्री नेफियू रियो ने एक ट्वीट में लोगों की मौत पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि जिस स्थान पर दुर्घटना हुई, उसे "पकाला पहाड़" के नाम से जाना जाता है और इस जगह पर भूस्खलन और चट्टानों के गिरने की संभावना रहती है. मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार घायलों को आपातकालीन सेवाएं और आवश्यक चिकित्सा सहायता प्रदान करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठा रही है. प्रत्येक पीड़ित परिवार को 4 लाख रुपये की आर्थिक मदद का भी ऐलान किया गया है.
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महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना के काम मशीनों से कराने में प्रतिबंध लगे इसके लिए राष्ट्रीय मोबाइल मॉनीटरिंग सिस्टम (एनएमएमएस) लांच किया गया, लेकिन सतना में उसका भी तोड़ कर्मचारियों ने ढूंढ निकाला. साइट पर श्रमिकों का नियोजन है यह साबित करने के लिए प्रतिदिन फोटो एप के माध्यम से अपलोड़ करना था, लेकिन यहां की ग्राम पंचायतों के सचिव और रोजगार सहायकों ने बच्चों और बुजुर्गों की फोटो अपलोड़ करनी शुरू कर दी.
मंगलवार को जनसुनवाई में कलेक्टर के समक्ष मझगवां जनपद पंचायत क्षेत्र की ग्राम पंचायत बरौं के कुछ ग्रामीण शिकायत लेकर पहुंचे. आरोप लगाया गया कि ग्राम पंचायत के सरपंच और कर्मचारियों द्वारा लोगों को रोजगार देने की जगह फर्जी फोटो अपलोड़ कर मनमानी की जा रही है. लिखित शिकायत देने के साथ ही एनएमएमएस में दर्ज की गई तस्वीरों के फोटो भी उपलब्ध कराए गए हैं. ग्रामीणों ने मांग की है कि इस मामले की विधिवत जांच करते हुए दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए.
मनरेगा के काम में बच्चों के नियोजन किए जाने के मामले में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी परीक्षित झाड़े ने कहा कि एनएमएमएस में केवल श्रमिकों की ही फोटो अपलोड़ की जानी चाहिए. कोई भी ग्राम पंचायत अगर, ऐसा कर रही है तो उसकी जांच कराकर संबंधितों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी.
नर्मदापुरम के सिवनी मालवा नगर पालिका में पिछले दो दिनों से सफाईकर्मी हड़ताल पर थे. सिवनी मालवा नगरपालिका के सफाई कर्मचारियों के द्वारा विगत 2 दिनों से अनिश्चितकालीन हड़ताल की जा रही थी. ऐसे में शहर में गंदगी देख कर नगर पालिका अध्यक्ष नितेश जैन ने शहर के मुख्य चौराहे पर झाड़ू लगाई. सफाईकर्मियों ने कई मांगे रखी थी, मांग पूरी नहीं होने पर अनिश्चितकालीन हड़ताल की गई. नगर पालिका अध्यक्ष व सीएमओ के समझाने के बाद भी कर्मचारी नहीं मान रहे थे ऐसे में नगरपालिका अध्यक्ष और पार्षदों ने जय स्तंभ चौक पर झाड़ू लगाई.
सफाई कर्मचारी यूनियन एवं अध्यक्ष द्वारा आपसी सहमति एवं आश्वासन के बाद अनिश्चितकालीन हड़ताल समाप्त कर दी गई. जिसके बाद सफाई कर्मचारी अपने-अपने कार्य पर लौट चुके हैं. सफाईकर्मचारियों ने शहर की सफाई व्यवस्था भी संभाल ली है. नगर पालिका अध्यक्ष रितेश जैन तहसीलदार ललित सोनी सहित नगरपालिका के पार्षद मौजूद रहे.
नगर पालिका परिषद सिवनी मालवा के अध्यक्ष रितेश जैन ने बताया कि सफाई कामगारों द्वारा अनिश्चितकालीन हड़ताल की गई थी, जिसमें आपसी सहमति एवं आश्वासन द्वारा चर्चा की गई है. शासन स्तर की मांगों को शासन स्तर पर एवं निकाय स्तर की मांगों को हमारे द्वारा पूरा करने का प्रयास किया जायेगा. सभी कर्मचारी अपने-अपने सफाई कार्य पर लौट गए हैं. उन्हें अपने कार्यों को ईमानदारी से करने के लिए निर्देशित किया गया है.
मुख्य नगरपालिका अधिकारी शीतल भलावी ने बताया कि मेरे द्वारा अभी पदभार ग्रहण किया गया है. निकाय की स्थिति को देखते हुए जो भी सफाई कर्मचारियों द्वारा मांग की जा रही है, नियमानुसार उन्हें पूरा करने का प्रयास किया जाएगा.
अजित पवार के महाराष्ट्र के एकनाथ शिंदे नीत सरकार में शामिल होने के बाद उनके और शरद पवार के बीच राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) पर दावेदारी को लेकर लड़ाई तेज हो गई है और इसी कड़ी में शक्ति प्रदर्शन के वास्ते दोनों गुटों ने बुधवार को अलग-अलग बैठक बुलाई है. अजित पवार ने मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व की प्रशंसा करते हुए कहा कि उनका कोई विकल्प नहीं है. राकांपा के शरद पवार गुट ने पार्टी की बैठक दक्षिण मुंबई स्थित यशवंत राव चव्हाण केंद्र में बुधवार को अपराह्न एक बजे बुलाई है जबकि अजित पवार ने मुंबई के उपनगर बांद्रा स्थित मुंबई एजुकेशन ट्रस्ट के परिसर में पूर्वाह्न 11 बजे बैठक बुलाई है.
किस गुट के पास हैं कितने विधायक?
दोनों गुटों की बैठक से स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है कि किसके साथ कितने विधायक हैं. 288 सदस्यीय महाराष्ट्र विधानसभा में राकांपा के 53 विधायक हैं और अजित पवार गुट को दलबदल कानून के तहत अयोग्य ठहराए जाने से बचने के लिए कम से कम 36 विधायकों का समर्थन चाहिए. अजित पवार गुट ने 40 विधायकों के समर्थन का दावा किया है. वहीं, शरद पवार गुट ने दावा किया है कि सरकार में शामिल अजित पवार सहित केवल नौ विधायकों ने ही पाला बदला है और बाकी शरद पवार के साथ हैं.
नरेन्द्र मोदी जैसा कोई नेता नहीं है: अजित पवार
विधायक सरोज अहिरे, प्रजाक्त तानपुरे और सुनील भुसारा के बारे में कहा जा रहा था कि वे अजित पवार के साथ हैं लेकिन उन्होंने शरद पवार से मिलकर उनके प्रति निष्ठा व्यक्त की. इस बीच, महाराष्ट्र के पद पर शपथ लेने के दो दिन बाद उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने मंगलवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जैसा कोई नेता नहीं है. अजित पवार ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के अपने गुट का दक्षिण मुंबई में बने नए कार्यालय का उद्घाटन किया. इस मौके पर संवाददाताओं से बातचीत में उन्होंने कहा, ‘‘देश उनके (मोदी के) नेतृत्व में आगे बढ़ रहा है. हम उनका समर्थन करने के लिए सरकार में शामिल हुए हैं.''
उन्होंने कहा, ‘‘मोदी जैसा कोई नेता नहीं है. उनका कोई विकल्प नहीं है.'' अजित पवार ने संकेत दिया कि राज्य में मंत्रियों के विभागों की घोषणा तत्काल नहीं की जाएगी. उन्होंने इस देरी के लिए मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नागपुर दौरे को कारण बताया. दोनों नेता राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की आगवानी करने वहां गये हैं. राष्ट्रपति का मंगलवार शाम को नागपुर पहुंचने का कार्यक्रम है.
असंतोष का कोई सवाल ही नहीं है: अजित पवार
राकांपा विधायकों के मंत्रिमंडल में शामिल करने को लेकर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे नीत खेमे के कुछ सदस्यों के नाराज होने की खबर के बारे में पूछे जाने पर अजित पवार ने कहा, ‘‘हमने मिलकर काम करने का फैसला किया है. असंतोष का कोई सवाल ही नहीं है.'' महाराष्ट्र कांग्रेस विधायक दल (सीएलपी) की मंगलवार को हुई बैठक में महाराष्ट्र विधानसभा में विपक्ष के नेता के मुद्दे पर चर्चा नहीं हुई और राज्य में राजनीतिक घटनाक्रम के बीच “देखो और इंतजार करो” की रणनीति अपनाने का फैसला किया गया. एक वरिष्ठ नेता ने यह जानकारी दी.
पहले यह कहा गया था कि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के नेता अजित पवार के पद से इस्तीफा देने और शिवसेना-भाजपा सरकार में शामिल होने के बाद कांग्रेस नेता प्रतिपक्ष के पद पर दावा पेश करने के मुद्दे पर चर्चा कर सकती है. पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि यहां विधान भवन में आयोजित कांग्रेस विधायक दल (सीएलपी) की बैठक में कांग्रेस ने पार्टी के साथ-साथ महा विकास आघाडी (एमवीए) को मजबूत करने के लिए काम करने का फैसला किया, जिसमें वह राकांपा और शिवसेना (यूबीटी) के साथ एक घटक है.
कांग्रेस विधायकों की हुई बैठक
कांग्रेस के महाराष्ट्र मामलों के प्रभारी एच.के. पाटिल की मौजूदगी में कांग्रेस विधायक दल के नेता बालासाहेब थोराट समेत पार्टी के 45 में से 39 विधायकों ने हिस्सा लिया. एच.के. पाटिल ने कहा, “हम एमवीए और कांग्रेस को मजबूत करेंगे. हमने उद्धव ठाकरे और शरद पवार का समर्थन किया है. हम इंतजार करेंगे और देखेंगे कि आने वाले दिनों में क्या घटनाक्रम होता है.” उन्होंने कहा कि नेता प्रतिपक्ष के पद को लेकर कोई चर्चा नहीं हुई.
पाटिल ने यह भी कहा कि कांग्रेस लोगों के मुद्दों को उजागर करने के लिए काम करेगी और भारतीय जनता पार्टी तथा “असंवैधानिक और अनैतिक सरकार” से लड़ने के लिए एकजुट रहेगी. कांग्रेस विधायक दल (सीएलपी) की बैठक में शामिल होने के बाद कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष नाना पटोले और कार्यकारी अध्यक्ष नसीम खान, वाई.बी. चव्हाण केंद्र में शरद पवार से मुलाकात करने गए.
पटोले ने पवार से मुलाकात के बाद कहा, ‘‘जिस तरह से भाजपा ने राकांपा के विधायक दल को तोड़ने की साजिश रची उसकी कांग्रेस निंदा करती है. एमवीए एकजुट है और भाजपा को हराएगी.'' कांग्रेस विधायक दल के नेता बालासाहेब थोराट ने कहा कि मौजूदा संकट से एमवीए और मजबूत होकर उभरेगी क्योंकि जनता हमारे साथ है. उन्होंने कहा, ‘‘ कांग्रेस एकजुट है. शरद पवार वरिष्ठ नेता हैं और हम सभी उनका मागदर्शन प्राप्त करते हैं.''
शरद पवार ने विरोधियों को चेताया
राकांपा अध्यक्ष शरद पवार ने मंगलवार को कहा कि जिस पार्टी के वह अध्यक्ष हैं और जयंत पाटिल, जिसकी महाराष्ट्र इकाई के प्रमुख हैं, वही उनकी तस्वीर का इस्तेमाल कर सकती है. पवार ने संवाददाताओं से कहा कि जिन्होंने उनकी विचारधारा के साथ ‘धोखा किया', उन्हें उनकी तस्वीर का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए.
इससे पहले, शरद पवार की तस्वीर मंगलवार को दक्षिण मुंबई में स्थापित अजित पवार के नेतृत्व वाले राकांपा गुट के नए कार्यालय में देखी गई थी. पार्टी सूत्रों ने बताया कि शरद पवार अपने भतीजे अजित पवार के शिवसेना-भाजपा सरकार में शामिल होने और उनकी (अजित की)ओर से बड़ी संख्या में विधायकों का समर्थन होने का दावा करने के कारण पार्टी में पैदा हुए संकट से निपटने के लिए कानूनी राय ले रहे हैं.
राकांपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता क्लाईड क्रास्टो ने क्या कहा?
राकांपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता क्लाईड क्रास्टो ने कहा कि सोमवार रात सतारा से लौटने के बाद शरद पवार मौजूदा राजनीतिक घटनाक्रम से निपटने के मद्देनजर कानूनी विशेषज्ञों के साथ चर्चा कर रहे हैं. उन्होंने कहा, ‘‘कानूनी राय लेना जरूरी है, क्योंकि यह मुद्दा संविधान की 10वीं अनुसूची से संबंधित है.'' संविधान में 10वीं अनुसूची का प्रावधान पद का लालच, भौतिक लाभ या इसी तरह के विचारों से प्रेरित राजनीतिक दलबदल को रोकने के लिए किया गया है. यह दलबदल के आधार पर अयोग्य ठहराए जाने के मुद्दे और सदन के अध्यक्ष की भूमिका से भी संबंधित है.
क्रास्टो ने दावा किया कि अजित पवार के नेतृत्व वाले समूह को 13 से अधिक विधायकों का समर्थन प्राप्त नहीं है और इस पर दल-बदल रोधी कानून के प्रावधान लागू हो सकते हैं. प्रवक्ता ने कहा, ‘‘कल (बुधवार) दोपहर एक बजे शरद पवार द्वारा बुलाई गई बैठक में उन्हें हासिल समर्थन की स्पष्ट तस्वीर सामने आ जाएगी.''
अजित पवार को मुझे हटाने का अधिकार नहीं: जयंत पाटिल
राकांपा की महाराष्ट्र इकाई के अध्यक्ष जयंत पाटिल ने मंगलवार को कहा कि अजित पवार के नेतृत्व वाले खेमे को उन्हें पद से हटाने का कोई अधिकार नहीं है. एक दिन पहले, अजित पवार खेमे ने जयंत पाटिल की जगह सुनील तटकरे को राकांपा की महाराष्ट्र इकाई का अध्यक्ष नियुक्त किया था. इसने महाराष्ट्र के विधानसभा अध्यक्ष से जयंत पाटिल और जितेंद्र आव्हाड को सदन की सदस्यता से अयोग्य घोषित करने के लिए भी कहा था.
जयंत पाटिल ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘(अजित पवार) के नेतृत्व वाला गुट ‘नेशनलिस्ट' पार्टी है. उन्हें मुझे (राकांपा प्रदेश इकाई अध्यक्ष के) पद से हटाने का कोई अधिकार नहीं है.'' उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ‘‘सभी विधायक हमारे साथ हैं और कल आपको पता चल जाएगा. जयंत पाटिल ने कहा कि सभी पदाधिकारियों, राकांपा के प्रकोष्ठों के प्रमुख, जिला इकाइयों के अध्यक्ष, कार्य समिति के सदस्यों, तालुका स्तर के पार्टी कार्यकर्ताओं, विधायक, विधान पार्षद और सांसदों को बैठक में शामिल होने के लिए कहा गया है.
इस बीच, महाराष्ट्र के मंत्री और भाजपा नेता सुधीर मुनगंटीवार ने मंगलवार को शरद पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) को अपने समर्थन वाले विधायकों की संख्या प्रदर्शित करने के लिए उन्हें परेड कराने की चुनौती दी. मुनगंटीवार ने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘‘मैं उन्हें (शरद पवार नीत राकांपा को) चुनौती देता हूं कि वे उनको समर्थन देने वाले विधायकों की संख्या प्रदर्शित करें. विधायक अजित पवार के साथ हैं. उन्होंने विकास और सच्चाई के साथ चलना चुना है.'' उन्होंने कहा, ‘‘वे (शरद पवार के नेतृत्व वाली राकांपा) एक बैठक आयोजित कर सकते हैं और उन विधायकों की परेड करा सकते हैं जो उनका समर्थन कर रहे हैं. उन्हें अपनी ताकत दिखानी चाहिए.''
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राजस्थान में इसी साल विधानसभा चुनाव (Rajasthan Assembly Elections 2023) होने हैं. मुख्यमंत्री चेहरे को लेकर पार्टी आलाकमान की ओर से अभी तक कोई स्पष्ट संदेश नहीं आया है. लेकिन लगता है कि बीजेपी अभी वसुंधरा राजे (Vasundhara Raje) को साथ लेकर चलने के मूड में है. गृहमंत्री अमित शाह (Amit Shah) की हालिया बैठक में इसी का संकेत मिला.
शुक्रवार को वसुंधरा राजे को उदयपुर में अमित शाह के साथ एक मंच साझा करते हुए देखा गया. इस दौरान दोनों के बीच दोस्ती देखने को मिली. राजे का इस रैली में बोलने का कार्यक्रम नहीं था. लेकिन अमित शाह ने जोर देकर उनसे रैली को संबोधित करने को कहा. शाह ने ये भी कहा कि राजे के बोलने के बाद ही वह रैली को संबोधित करेंगे.
बीजेपी ने बदली रणनीति
अभी तक बीजेपी में वसुंधरा राजे को कथित तौर पर किनारे करने की कोशिश हो रही थी, लेकिन पीएम मोदी के बाद पार्टी के सबसे शक्तिशाली नेता अमित शाह के मंच पर यह केमिस्ट्री स्पष्ट संकेत है कि बीजेपी ने राजस्थान में अपना घर व्यवस्थित कर लिया है.
पीएम मोदी के चेहरे पर ही चुनाव लड़ेगी बीजेपी
दरअसल, राजस्थान में बीजेपी कई चेहरों को लेकर चल रही है. मसलन सीपी जोशी, गजेंद्र सिंह शेखावत, वसुंधरा राजे और पूर्व अध्यक्ष सतीश पुनिया. लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला भी यहां काफी एक्टिव हैं. नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौर की भी मौजूदगी है. लेकिन बीजेपी फिलहाल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चेहरे पर ही चुनाव लड़ेगी. ये पार्टी के लिए सबसे बड़ा बदलाव है, क्योंकि पिछले चुनाव तक राजस्थान में बीजेपी का चेहरा वसुंधरा राजे थीं. राजे अब भी पार्टी के लिए अहम नेता हैं. वो वोट कैचर हैं, लेकिन वो पार्टी में सबसे बड़ी नेता नहीं हैं.
बीजेपी के लिए क्यों अहम हैं वसुंधरा राजे?
वसुंधरा राजे 2013 से 2018 के बीच राजस्थान की मुख्यमंत्री रह चुकी हैं. वह राज्य की पहली महिला मुख्यमंत्री हैं. 2013 में बीजेपी को राजस्थान की सत्ता दिलाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है. राजस्थान में वसुंधरा राजे एक मात्र ऐसी नेता जो सीएम अशोक गहलोत के खिलाफ खुलकर विरोध करती है. इसके उलट कांग्रेस के पास वसुंधरा राजे पर पलटवार करने के लिए कोई ठोस वजहें नहीं है, जिससे पूरे प्रदेश में बीजेपी के खिलाफ हवा बन सके.
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दौसा जिले के लालसोट उपखण्ड अंतर्गत एक गांव से बीती देर रात को एक बेटी के अपहरण और उसको बचाने गए पिता की हत्या का सनसनीखेज मामला सामने आया है. यह मामला पूरी तरह से हैरान कर देने वाला है. जानकारी के मुताबिक, अवारा पशुओं को अपने खेत से भगाने गए दंपत्ती जब घर वापस लौट रहे थे तो उन्होंने देखा कि दो अनजान शख्स उनकी 16 साल की बेटी का अपहरण कर रहे थे. बेटी का अपहरण देख पिता भी सकते में आ गया. बिना देर किए हुए पिता ने अपनी मोटरसाइकिल से अपहरणकर्ताओं का पीछा किया. बदमाशों का पीछा करते-करते वे लालसोट के इंदावा गांव के पास पहुंच गए. यहां अपराधियों ने मोटरसाइकिल रोक दी और पिता को पीटने लगे. अपराधियों ने पिता की हत्या कर दी. इसके अलावा अपराधियों ने मां को भी पीटा. मां भी पूरी तरह से घायल हो चुकी है. यह पूरा मामला दौसा जिले के लालसोट थाने का है. घटना के बाद पुलिस ने लड़की की मां के बयान लेकर मामला दर्ज कर लिया है. आरोपियों के खिलाफ धारा 302 व पोक्सो एक्ट में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है और आरोपी युवकों को डिटेन कर लिया गया है.
राजकीय जिला अस्पताल में भर्ती लड़की की घायल मां ने रिपोर्ट दर्ज कराते हुए बताया कि देर रात उनके खेत में आवारा पशुओं के घुसने की सूचना मिली थी. जिस पर वह अपने पति के साथ पशुओं को दौड़ाकर वापस अपने घर लौट रही थी. इसी दौरान गांव में स्थित एक दुकान के पास एक मोटरसाइकिल पर सवार दो लोग उनकी 16 साल की नाबालिग बेटी को जबरन बिठाकर लेकर जा रहे थे. ऐसे में बाइक से मैं और मेरे पति अपराधियों का पीछा कर रहे थे. इसी क्रम में अपराधियों ने हमारे पति की हत्या कर दी. महिला ने रिपोर्ट में बताया कि उक्त युवकों में से एक युवक का नाम दिलखुश था. दूसरे का नाम महिला को नहीं पता है.
पीछा करते-करते ग्रामीण भी घटनास्थल पहुंच गए. ग्रामीणों को देखकर अपराधी लड़की को छोड़कर फरार हो गए. लहूलुहान अवस्था में लड़की के पिता को लेकर ग्रामीण राजकीय जिला चिकित्सालय लालसोट पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद लड़की के पिता को मृत घोषित कर दिया. वहीं घायल महिला का इलाज जारी है. घटना से आक्रोशित लड़की के परिजनों और गांव के ग्रामीणों ने सोमवार सुबह लालसोट थाने के बाहर जमकर बवाल किया और थाने के सामने नेशनल हाईवे संख्या 11 ए को भी जाम करने का भी प्रयास किया. पुलिस ने आक्रोशित लोगों को समझाने का प्रयास किया लेकिन ग्रामीण आरोपियों की शीघ्र गिरफ्तारी करने की मांग और परिजनों को आर्थिक मुआवजा देने की मांग पर अड़े रहे. हालांकि, प्रशासन के समझाने के बाद हाइवे को खोल दिया गया.
इस दौरान राज्य मंत्री एवं वंशावली संरक्षण एवं संवर्धन संस्थान बोर्ड के अध्यक्ष रामसिंह राव भी लालसोट पहुंचे. उन्होंने कहा कि समाज के कमजोर तबके पर अत्याचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. समाज के लोगों में आक्रोश है, पुलिस कह रही है कि आरोपियों को डिटेन कर लिया गया है. परंतु पुलिस की जांच से समाज के लोग संतुष्ट नहीं दिखाई दे रहे हैं. समाज के लोगों को डर है कि कहीं कोई बयान नहीं बदलवा दे इसलिए मुकदमे के साथ छेड़खानी न की जाए.
अजित पवार के अचानक शिंदे सरकार में शामिल होने के कदम के बार में अनजान शरद पवार की एनसीपी ने कहा कि यह मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के लिए अच्छी खबर नहीं है. पार्टी ने संकेत दिए कि भारतीय जनता पार्टी की ओर से एकनाथ शिंदे का रिप्लेसमेंट ढूंढ़ा जा रहा था. रविवार शाम को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में एनसीपी नेता जयंत पाटिल ने कहा कि "एकनाथ शिंदे की शक्ति कम हो जाएगी." इस दौरान ही उन्होंने अजित पवार के उस दावे का खंडन किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि पूरी एनसीपी उनके साथ है.
उन्होंने इसके पीछे का कारण बताते हुए दावा किया कि "कुछ लोगों" को मुख्यमंत्री के काम करने का तरीका पसंद नहीं आता. पाटिल ने कहा, "अब उनकी (एकनाथ शिंदे के) पावर को कम करने के लिए, अजित पवार को उस सरकार में शामिल किया गया है जो पहले से ही बहुमत में है." जब एकनाथ शिंदे को गठबंधन की सरकार में मुख्यमंत्री पद दिया गया, लेकिन मतभेद रहे हैं. शिंदे के गुट के नेताओं का दावा है कि भाजपा बड़े भाई की भूमिका निभाने की कोशिश कर रही है.
ऐसी खबरें हैं कि भाजपा चाहती है कि राज्य मंत्रिमंडल में आगामी फेरबदल से पहले एनसीपी मंत्रियों के लिए जगह बनाने के लिए शिंदे गुट के 10 मंत्रियों को हटा दिया जाए. अप्रैल महीने में एकनाथ शिंदे गुट ने कहा था कि अगर अजित पवार एनसीपी के अन्य नेताओं के साथ गठबंधन में शामिल होते हैं, तो वे सरकार का हिस्सा नहीं रहेंगे. ऐसा कहा जाता है कि मामला केंद्रीय मंत्री और भाजपा के मुख्य रणनीतिकार अमित शाह के हस्तक्षेप से सुलझा लिया गया था, जिन्होंने पिछले हफ्ते दिल्ली में एकनाथ शिंदे और अजित पवार दोनों से मुलाकात की थी.
रविवार को एकनाथ शिंदे ने एनसीपी नेता का गर्मजोशी से स्वागत किया. एकनाथ शिंदे ने कहा, "अब डबल इंजन सरकार के पास ट्रिपल इंजन है. अब राज्य (विकास के पथ पर) तेजी से आगे बढ़ेगा. अब हमारे पास एक मुख्यमंत्री और दो उपमुख्यमंत्री हैं. इससे राज्य के तेजी से विकास में मदद मिलेगी." बीजेपी ने इस मामले पर कोई टिप्पणी नहीं की है. पार्टी के सूत्रों ने कहा कि अजित पवार का गठबंधन सरकार को समर्थन देने का फैसला कांग्रेस द्वारा राहुल गांधी को विपक्ष के नेता और 2024 के लिए पीएम उम्मीदवार के रूप में पेश करने की कोशिश का नतीजा है. एक नेता ने कहा, ''राहुल गांधी और कांग्रेस की मनमानी एनसीपी के टूटने की वजह है."
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एनसीपी के वरिष्ठ नेता अजित पवार ( Ajit Pawar) ने शिंदे सरकार में शामिल होकर महाराष्ट्र की राजनीति में एक बड़ा भूचाल ला दिया. इसके बाद अब सवाल खड़ा हो गया कि "असली एनसीपी" कौन है? पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल ने कहा, ''हम एक पार्टी हैं और शरद पवार हमारे नेता हैं." प्रफुल्ल पटेल एनसीपी के उन नेताओं में शामिल हैं, जिन्होंने अजित पवार के साथ मिलकर शरद पवार से बगावत की है. रविवार को महाराष्ट्र राजभवन में अजित पवार ने आठ अन्य एनसीपी विधायकों के साथ मंत्री पद की शपथ ली है. इस दौरान प्रफुल्ल पटेल भी राजभवन में मौजूद थे.
एनडीटीवी से बात करते हुए पटेल ने कहा, "कोई भी ना तो पार्टी से अलग हुआ है, और ना ही किसी ने पार्टी बदली है. कभी-कभी पार्टी के भीतर मतभेद होते हैं और फिर इन्हें सुलझा लिया जाता है. आप कुछ और दिन इंतजार करें और आप देखेंगे कि मेरे कहने का क्या मतलब है." रविवार को शपथ लेने वालों में एनसीपी नेताओं में छगन भुजबल, दिलीप वलसे पाटिल, हसन मुश्रीफ, धनंजय मुंडे, अदिति तटकरे, धर्मराव अत्राम, अनिल पाटिल और संजय बनसोडे शामिल हैं.
शपथ समारोह के बाद, उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने जोर देकर कहा कि उन्हें "पूरी एनसीपी" का समर्थन प्राप्त है, लेकिन इसके तुरंत बाद उनके चाचा शरद पवार ने इसे खारिज कर दिया. जब शरद पवार से पत्रकारों ने पूछा कि अब पार्टी का चेहरा कौन होगा, तो उन्होंने यह जवाब दिया "शरद पवार". प्रफुल्ल पटेल ने यह भी कहा कि यह निर्णय "पार्टी विधायकों और पार्टी के नेताओं के साथ व्यापक परामर्श के बाद" लिया गया है.
इससे पहले शरद पवार ने कहा कि वह "गलत रास्ता" अपनाने के लिए प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे को छोड़कर किसी से भी नाराज नहीं हैं. उन्होंने कहा, "मैं प्रफुल्ल पटेल और तटकरे को छोड़कर किसी से नाराज नहीं हूं. मैंने उन्हें महासचिव नियुक्त किया था, लेकिन उन्होंने पार्टी अध्यक्ष के दिशानिर्देशों दरकिनार कर और गलत रास्ता अपना लिया. उन्हें उस पद पर बने रहने का कोई अधिकार नहीं है."
उनकी पार्टी इस बात पर जोर दे रही है कि जिन विधायकों के बारे में अजित पवार दावा कर रहे हैं कि वे उनका समर्थन कर रहे हैं, वे वास्तव में अभी भी शरद पवार के साथ हैं. शरद पवार के करीबी सहयोगी माने जाने वाले पटेल को पिछले महीने पार्टी के 24वें स्थापना दिवस पर सुप्रिया सुले के साथ एनसीपी का कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया था. तटकरे को एनसीपी का राष्ट्रीय महासचिव नियुक्त किया गया था, जिनकी बेटी अदिति ने अजित पवार के साथ मंत्री पद की शपथ ली है. बता दें, चार साल के अंदर यह तीसरी बार है कि अजित पवार तीन मुख्यमंत्रियों-देवेंद्र फड़णवीस, उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे के अंडर में डिप्टी सीएम बने हैं.
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मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने अपने इस्तीफे देने के फैसले को लेकर कहा कि मैं बहुत ही दुखी था. इसीलिए मैंने इस्तीफा देने का फैसला किया था. इस मुद्दे पर पहली बार बोलते हुए उन्होंने एनडीटीवी के साथ एक खास बातचीत में कहा कि मुझे लगा कि जब लोगों को मुझ पर भरोसा ही नहीं है तो फिर मुख्यमंत्री रहने का क्या मतलब है. साथ ही उन्होंने बताया कि आखिर क्यों उन्होंने इस्तीफा देने का फैसला वापस लिया. बता दें कि मणिपुर हिंसा के दौरान अब तक सौ से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है.
मणिपुर सीएम ने कहा, "मैं अपने सहकर्मियों से कहता था कि लोग राजनेताओं को उनके व्यवहार के चलते गाली देते हैं. इसलिए, राजनेताओं को अपना व्यवहार और कार्यशैली को बदलना होगा, जिससे लोग जैसा दूसरों का सम्मान करते हैं, वैसा हमारा भी सम्मान करें. यही मेरा सिद्धांत था. तो मैंने सोचा कि यदि कोई मेरी इज्जत ही नहीं कर रहा है तो इसका क्या मतलब है."
उन्होंने इस्तीफा देने से जाने से पहले अपने घर के बाहर जुटी भीड़ को लेकर कहा कि मैं इससे काफी आश्चर्यचकित था. जब मैंने भीड़ को देखा तो मैंने भगवान और अपने लोगों को धन्यवाद दिया जो मुझसे इतना प्यार करते हैं. उन्होंने मुझे जो विश्वास दिया, उसके कारण मैंने अपना निर्णय बदला. उन्होंने कहा कि राज्य और देश के लोगों से मैंने वादा किया कि मैं देश और राज्य के लिए काम करता रहूंगा.
मणिपुर सीएम ने कहा कि राज्य में शांति के लिए बातचीत करने की जरूरत है. उन्होंने कहा, "मैंने कुछ ही घंटे पहले अपने कुकी सहकर्मियों को टेलीफोन किया और अनुरोध किया कि जो हो गया है वो हो गया है. पति पत्नी में भी झगड़ा होता है, दो महीने हो गए हैं. हमने काफी भुगता है. कृपया वापस आ जाइए. हमें साथ रहना है, साथ जीना है." साथ ही उन्होंने कहा कि मैं मणिपुर के लोगों को धन्यवाद देता हूं कि आप लोगों का समर्थन और प्रेम मिला. आप लोगों की वजह से ही शांति आ रही है. साथ ही उन्होंने हर वर्ग और समुदाय के लोगों से शांति की अपील की.
बता दें कि मणिपुर में बहुसंख्यक मैतेई और अल्पसंख्यक कुकी समुदाय के बीच तीन मई को जातीय संघर्ष शुरू हुआ था. इस संघर्ष में अब तक 100 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है. साथ ही इसके कारण हजारों की संख्या में लोगों को विस्थापित होना पड़ा है.
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विदेश दौरे से वापस आने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यूनिफ़ॉर्म सिविल कोड यानी समान नागरिक संहिता को लेकर बयान दिया. भोपाल में उन्होंने कहा कि एक घर में दो क़ानून नहीं हो सकते हैं. प्रधानमंत्री के भाषण में संकेत मिलने के बाद इसका विरोध भी शुरू हो गया है. इसके तहत हर नागरिक के लिए एक समान क़ानून होगा. कानून का किसी धर्म विशेष से ताल्लुक नहीं होगा. अलग-अलग धर्मों के पर्सनल लॉ ख़त्म हो जाएंगे. शादी, तलाक़ और ज़मीन-जायदाद के मामले में एक ही क़ानून चलेगा. धर्म के आधार पर किसी को भी विशेष लाभ नहीं मिलेगा.
यूनिफ़ॉर्म सिविल कोड संविधान के नीति निर्देशक तत्व का हिस्सा है
यूनिफ़ॉर्म सिविल कोड का ज़िक्र संविधान में भी दिखता है. संविधान के निर्माताओं ने यूनिफ़ॉर्म सिविल कोड को नीति निर्देशक तत्वों के तहत भविष्य के एक लक्ष्य की तरह छोड़ दिया था. संविधान के अनुच्छेद 44 में नीति निर्देशक तत्वों के तहत कहा गया है कि भारत के राज्य क्षेत्र में नागरिकों के लिए एक समान नागरिक संहिता यानी यूनिफॉर्म सिविल कोड को सुरक्षित करने का प्रयास करना चाहिए. लेकिन साथ ही अनुच्छेद 37 में कहा गया है कि नीति निर्देशक तत्वों का उद्देश्य लोगों के लिए सामाजिक आर्थिक न्याय सुनिश्चित करना और भारत को एक कल्याणकारी राज्य के रूप में स्थापित करना है.
गौरतलब है कि नीति निर्देशक तत्व सरकार की ज़िम्मेदारी को दिखाते हैं लेकिन इन पर अमल ज़रूरी नहीं है. लेकिन देर-सबेर अमल हो सके तो बेहतर है. मौलिक अधिकारों की तरह इन्हें लेकर न्यायालय में सरकार को चुनौती नहीं दी जा सकती है.
हर धर्म में अपने-अपने नियम है
अब सबसे बड़ा सवाल ये उठ रहा है कि आखिर ऐसा समान नागरिक संहिता बनाना क्या आसान काम है जिससे सभी दल के लोग सहमत हों. फिलहाल उत्तराखंड में एक विशेष पैनल बनाया गया था जिसने अब उत्तराखंड में कॉमन सिविल कोड का मसौदा तैयार कर लिया है. उसकी कुछ ख़ास बातें आपको हम बता रहे हैं.
उत्तराखंड समान नागरिक संहिता का क्या है ड्राफ्ट?
कांग्रेस सहित कई विपक्षी दल फिलहाल इसपर अपना स्टैंड खुलकर साफ़ नहीं कर रहे हैं. ऐसे में अब सरकार के सामने क्या-क्या विकल्प है.सरकार ने यूसीसी पर विधि आयोग बनाया है जो कि इस वक्त आम लोगों से राय ले रहा है.
यूसीसी कैसे बनेगा?
गुरुग्राम: हरियाणा के गुरुग्राम में 12 घंटे से अधिक समय तक इंतजार करने के बावजूद भर्ती नहीं करने पर एक महिला को कथित तौर पर यहां सदर अस्पताल के प्रसूति वार्ड के बाहर अपने बच्चे को जन्म देने के लिए मजबूर होना पड़ा. अधिकारियों ने शनिवार को यह जानकारी दी. अधिकारियों के मुताबिक महिला ने शुक्रवार देर रात प्रसूति वार्ड के बाहर बच्चे को जन्म दिया. इस घटना पर एक सोशल मीडिया पोस्ट जल्द ही वायरल हो गया, जिसके बाद प्रधान चिकित्सा अधिकारी (पीएमओ) को इस सिलसिले में जांच के आदेश देने पड़े.
महिला का पति नरेंद्र सिंह उत्तर प्रदेश के हरदोई का रहने वाला है. नरेंद्र सिंह ने बताया कि वह एक कंपनी में काम करता है और पिछले कई वर्षों से अपने परिवार के साथ लक्ष्मण विहार कॉलोनी में रह रहा है. नरेंद्र सिंह ने सदर अस्पताल के एक चिकित्सक और एक नर्स की कथित लापरवाही के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है, जिसके कारण उनकी पत्नी को अस्पताल के वार्ड के बाहर बच्ची को जन्म देने के लिए मजबूर होना पड़ा.
नरेंद्र ने कहा, ‘‘मैं अपनी गर्भवती पत्नी को लेकर शुक्रवार सुबह करीब सात बजे सदर अस्पताल पहुंचा, क्योंकि उसे पेट में दर्द हो रहा था. अस्पताल में, प्रसूति वार्ड में मौजूद नर्स ने दर्द से कराह रही मेरी पत्नी की जांच किए बिना मुझे बाद में आने के लिए कहा.''
महिला के पति ने कहा, ‘‘ मैंने वार्ड में मौजूद एक चिकित्सक से भी मुलाकात की. लेकिन चिकित्सक ने भी कोई ध्यान नहीं दिया. ऐसे में दोपहर 12 बजे तक हम इलाज के लिए गुहार लगाते रहे. लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ. मैं परेशान होकर अस्पताल परिसर के पार्क में बैठ गया और रात में प्रसूति वार्ड के बाहर इंतजार करने लगा. लेकिन मेरी पत्नी को वार्ड में भर्ती नहीं किया गया. 12 घंटे से अधिक समय तक इंतजार करने के बाद, उसने शुक्रवार देर रात अस्पताल की पहली मंजिल पर प्रसूति वार्ड के बाहर बच्ची को जन्म देने के लिए मजबूर होना पड़ा. ''
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तीस्ता सीतलवाड़ की याचिका पर शनिवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. शनिवार होने के कारण अदालत में अवकाश का दिन था इस कारण नई दिल्ली के चिन्मया मिशन में सुप्रीम कोर्ट के कई वर्तमान और पूर्व जज पहुंचे थे. दरअसल यहां ऑडिटोरियम में सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस के वी विश्वनाथन की बेटी सुवर्णा विश्वनाथन का भरतनाट्यम नृत्य कार्यक्रम चल रहा था.
इसमें CJI डी वाई चंद्रचूड़ के अलावा सुप्रीम कोर्ट के कई वर्तमान जज और पूर्व जज भी मौजूद थे. इसके अलावा सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और अन्य वरिष्ठ वकील भी इसमें शामिल थे. करीब 6 बजे जब नृत्य शुरू हो चुका था इस दौरान ही खबर आई कि तीस्ता ने सुप्रीम कोर्ट में जमानत की अर्जी लगाई है. इस पर 6.30 बजे जस्टिस ए एस ओक और जस्टिस प्रशांत मिश्रा की बेंच सुनवाई करेगी.
इसके बाद SG तुषार मेहता को इसकी सूचना दी गई और वो तुरंत वहां से निकल गए. इसके बाद वो बेंच के सामने पेश हुए और कुछ देर की सुनवाई के बाद जजों की राय अलग- अलग रही और मामले को तीन जजों के पास भेजने के लिए सीजेआई चंद्रचूड़ के पास भेज दिया गया. इधर करीब सात बजे मामले की सूचना CJI डी वाई चंद्रचूड को दी गई और वो तुरंत उठाकर नृत्य को छोड़कर बाहर जाकर बात करने लगे.
इस बीच SG तुषार मेहता वापस कार्यक्रम में पहुंच गए थोड़ी देर बाद अचानक CJI फिर से बाहर की ओर जाते दिखे. लेकिन दस मिनट बाद फिर से आकर कार्यक्रम देखने लगे. हालांकि इसके बाद नृत्य कार्यक्रम खत्म हो गया और इसके बाद सब जाने लगे. तभी CJI चंद्रचूड़ ने ऑडीटोरियम में मौजूद जस्टिस बी आर गवई और जस्टिस ए एस बोपन्ना को इस केस के बारे में बताया. दोनों ने इस मामले में अपनी सहमति दे दी और फिर सीजेआई ने इस मामले में जस्टिस बी आर गवई , जस्टिस ए एस बोपन्ना और जस्टिस दीपांकर दत्ता की बेंच का गठन कर दिया जिसने रात 9.15 बजे सुनवाई की.
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भोपाल: मध्य प्रदेश में भोपाल की एक विशेष अदालत ने 2009 के दंगा और सरकारी अधिकारियों को उनके कर्तव्य में बाधा डालने के एक मामले में शनिवार को कांग्रेस विधायक जीतू पटवारी और तीन अन्य को दोषी करार देते हुए एक साल कैद की सजा सुनाई . विधायकों और सांसदों की सुनवाई के लिए एमपी-एमएलए विशेष अदालत के न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी (जेएमएफसी) विधान माहेश्वरी ने पटवारी, पूर्व कांग्रेस विधायक कृष्ण मोहन मालवीय, सुरेन्द्र मरमट और घनश्याम वर्मा को एक-एक साल कैद की सजा सुनाई और 10-10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया.
इंदौर के राऊ से विधायक पटवारी पर 2009 में राजगढ़ में किसान आंदोलन के दौरान दंगा करने और सरकारी अधिकारियों के काम में बाधा डालने का आरोप था. उनके वकील अजय गुप्ता ने पीटीआई-भाषा को बताया कि उन्हें मध्य प्रदेश विधानसभा की सदस्यता से अयोग्य नहीं ठहराया जाएगा, क्योंकि सजा दो साल या उससे अधिक की नहीं है.
अभियोजन पक्ष के अनुसार वर्ष 2009 में पटवारी सहित सभी आरोपी राजगढ़ में किसान आंदोलन को लेकर सरकार के खिलाफ आंदोलन कर रहे थे. इसी दौरान किसी अज्ञात व्यक्ति ने पथराव शुरू कर दिया था जो घटना बलवा में तब्दील हो गई थी. गुप्ता ने बताया कि बाद में इसी विशेष अदालत ने पटवारी और अन्य को निजी मुचलके पर जमानत दे दी. उन्होंने कहा, ‘‘हम अदालत के आदेश के खिलाफ 30 दिनों के भीतर सत्र न्यायाधीश की अदालत में अपील दायर करेंगे.''
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